तीन बहनों की चुतों की चुदाई कहानी: डायरी ने खोली तीनों की प्यास

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इंदौर के पुराने घर की ऊपरी मंजिल पर गीता जब कबाड़ वाला कमरा साफ कर रही थी, तब उसे कविता के गद्दे के नीचे एक मोटी डायरी मिली, और उसे नहीं पता था कि यह डायरी तीन बहनों की चुतों की चुदाई कहानी की पहली कड़ी बन जाएगी। डायरी का कवर पुराना था, पन्ने मुड़े हुए थे, और पहले ही पन्ने पर कविता की लिखावट में समीर का नाम लिखा था। गीता की उंगलियां कांप गईं, क्योंकि समीर उनका बचपन का दोस्त था, जो अब पड़ोस में ही रहता था और जिस पर तीनों बहनों की नजर बरसों से थी।

गीता ने डायरी खोली और पहली लाइन पढ़ते ही उसका गला सूख गया। कविता ने लिखा था कि समीर की बाहों की ताकत देखकर उसकी चूत गीली हो जाती है, और वह रात में उसके बारे में सोचकर अपनी उंगलियों से खुद को शांत करती है। गीता ने पन्ना पलटा, फिर दूसरा, फिर तीसरा, और हर पन्ने पर कविता की प्यास और भी खुलकर लिखी थी। उसने डायरी को सीने से लगा लिया, क्योंकि उसे लगा कि यह सिर्फ कविता की कहानी नहीं है, यह उसकी भी कहानी है।

तभी पीछे से सुनीता की आवाज आई, और गीता हड़बड़ा कर डायरी छिपाने लगी। सुनीता ने हंसते हुए कहा कि छिपाने की जरूरत नहीं है, वह यह डायरी पहले ही पढ़ चुकी है। गीता हैरान रह गई, और सुनीता ने धीरे से कहा कि कविता की तरह वह भी समीर को लेकर यही सब महसूस करती है, बस कभी कह नहीं पाई। दोनों बहनें एक दूसरे को देखने लगीं, और कमरे में एक अजीब सी गर्मी फैल गई।

सुनीता ने गीता का हाथ पकड़ा और बोली कि आज रात तीनों को सच बोल देना चाहिए, क्योंकि छिपते छिपते बरस हो गए हैं। गीता ने शर्माते हुए कहा कि उसे समीर का ख्याल आते ही बदन में आग लग जाती है, और वह कई रातों से तकिए को बाहों में भरकर सोती है। सुनीता ने उसके कान में कहा कि वह भी यही करती है, और दोनों हंस पड़ीं। तभी नीचे से कविता की आवाज आई कि खाना तैयार है, और दोनों ने डायरी वापस गद्दे के नीचे रख दी।

खाने की मेज पर समीर भी आ गया, क्योंकि मां ने उसे बुला लिया था। समीर सफेद कुर्ते में था, उसकी बाहें मजबूत थीं, और वह हंसते हुए कविता से बात कर रहा था। कविता की नजरें बार बार उसके हाथों पर जा रही थीं, सुनीता की नजरें उसके सीने पर थीं, और गीता की नजरें उसकी मुस्कान पर अटकी थीं। समीर ने मजाक में कहा कि तीनों बहनें आज कुछ ज्यादा ही चुप हैं, और तीनों एक साथ हंस पड़ीं।

खाना खत्म होने के बाद मां सोने चली गईं, और तीनों बहनें कविता के कमरे में इकट्ठा हो गईं। कविता ने दरवाजा बंद किया और धीरे से पूछा कि डायरी किसने पढ़ी है। सुनीता और गीता ने एक दूसरे की तरफ देखा, फिर दोनों ने मान लिया। कविता पहले तो गुस्सा हुई, फिर हंस पड़ी और बोली कि अच्छा है, अब छिपाना नहीं पड़ेगा। उसने कहा कि समीर से वह बरसों से प्यार करती है, और आज रात वह सच सामने लाना चाहती है।

तीनों ने तय किया कि समीर को बहाने से बुलाएंगी। गीता ने समीर को संदेश भेजा कि छत की टंकी में कुछ खराबी है, और वह तुरंत आ गया। कविता के कमरे में पहुंचते ही उसने देखा कि तीनों बहनें नाइटी में हैं, और कमरे की बत्ती धीमी है। समीर ठिठक गया, पर कविता ने उसका हाथ पकड़कर उसे बिस्तर तक ले आई। उसने कहा कि आज कोई शर्म नहीं, आज सिर्फ सच होगा।

समीर ने कविता को बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर होंठ रख दिए। कविता ने उसके कुर्ते के बटन खोल दिए और उसके सीने पर हाथ फेरने लगी। सुनीता पीछे से समीर की पीठ से चिपक गई और उसके कानों पर अपने होंठ रख दिए। गीता ने समीर का हाथ पकड़ा और उसे अपनी छाती पर रख दिया। समीर की सांसें तेज हो गईं, और उसने तीनों को बारी बारी से चूमा।

कविता ने समीर की पैंट खोली और उसका लंड बाहर निकाल लिया। वह मोटा और गर्म था, और कविता ने उसे अपने हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाना शुरू किया। फिर उसने उसे मुंह में ले लिया और चूसने लगी, उसकी जीभ लंड के चारों ओर घूम रही थी। समीर ने कविता के बाल पकड़ लिए और हल्के से उसके मुंह में धक्के लगाने लगा। सुनीता यह देखकर और भी गर्म हो गई, और उसने अपनी नाइटी उतार दी।

सुनीता ने समीर के सामने अपनी चूत खोल दी और बोली कि अब उसकी बारी है। समीर ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत को चाटने लगा, उसकी जीभ अंदर तक जा रही थी। सुनीता की कमर उठने लगी, वह समीर के बाल पकड़कर उसे और अंदर दबाने लगी। गीता यह सब देख रही थी और अपनी उंगलियों से खुद को रगड़ रही थी। सुनीता की चूत से पानी बहने लगा, और वह जोर से सिसकने लगी।

समीर ने अब कविता को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। उसने अपना लंड कविता की चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेल दिया। कविता ने आह भरी और समीर की पीठ को नाखूनों से पकड़ लिया। समीर ने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी, और कविता की चूत उसके लंड को कसकर पकड़ने लगी। हर धक्के के साथ बिस्तर हिलने लगा, और कविता की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं।

तभी सुनीता समीर के पीछे आ गई और उसके कंधों को चूमने लगी, और गीता ने समीर का हाथ पकड़कर उसे अपनी चूत पर रख दिया। समीर एक हाथ से गीता की चूत को रगड़ रहा था और दूसरे से कविता को चोद रहा था। कविता की आंखें बंद हो गईं, उसका बदन कांपने लगा, और वह जोर से झड़ गई, उसका पानी समीर के लंड पर बह गया। समीर ने उसे चूमकर शांत किया और फिर सुनीता की तरफ मुड़ा।

सुनीता ने समीर को घोड़ी बनाया और उसके ऊपर बैठ गई। उसने समीर का लंड अपनी चूत में खुद डाला और ऊपर नीचे होने लगी। उसके बूब्स उछल रहे थे, और समीर ने उन्हें हाथों में पकड़कर दबाना शुरू किया। गीता ने समीर के होंठों को चूमना शुरू कर दिया, और कविता ने सुनीता की कमर पकड़ ली। सुनीता की रफ्तार बढ़ती गई, और वह चिल्लाकर झड़ गई, उसका बदन समीर पर ही ढीला पड़ गया।

अब गीता की बारी थी, और वह शर्माते हुए समीर के सामने लेट गई। समीर ने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और अपना लंड उसकी चूत में धीरे से उतार दिया। गीता ने पहले तो दर्द से सिसकी भरी, फिर मजे से कराहने लगी। समीर ने उसे कई पोजीशन में चोदा, कभी सीधा, कभी करवट, और हर बार गीता की चूत और भी गीली होती गई। कविता और सुनीता दोनों गीता को चूम रही थीं, और गीता का बदन तीनों के बीच में कांप रहा था।

गीता के झड़ने के बाद समीर ने तीनों को एक साथ बिस्तर पर लिटा दिया। उसने कविता की चूत में फिर से लंड डाला, फिर सुनीता की चूत में, फिर गीता की चूत में, बारी बारी से सबको चोदता रहा। तीनों बहनें एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए थीं, और उनकी सिसकारियां एक साथ उठ रही थीं। समीर की रफ्तार अब बहुत तेज हो गई थी, और उसका लंड तीनों की चूतों से गीला हो चुका था।

आखिर में समीर ने कविता की चूत में गहरे धक्के लगाए और जोर से झड़ गया, उसका पानी कविता की चूत में भर गया। कविता ने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होंठ चूम लिए। सुनीता और गीता दोनों समीर से चिपक गईं, और चारों पसीने में भीगे हुए एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे। कमरे में सिर्फ तेज सांसों की आवाज थी, और खिड़की से रात की ठंडी हवा आ रही थी।

इसके बाद समीर ने कविता को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया। कविता ने बिस्तर की चादर कसकर पकड़ ली, और समीर ने उसकी कमर पकड़कर तेज धक्के लगाने शुरू किए। सुनीता कविता के सामने बैठ गई और उसके बूब्स को चूसने लगी, और गीता ने समीर की पीठ को चूमते हुए उसके कूल्हों पर हाथ फेरा। कविता की चूत से पानी बह रहा था, और वह हर धक्के पर और जोर से कराह रही थी। समीर ने उसकी चूत को तब तक चोदा जब तक वह दोबारा झड़ नहीं गई, और उसकी टांगें कांपने लगीं।

फिर तीनों बहनों ने समीर को बिस्तर पर लिटा दिया और बारी बारी से उसका लंड चूसा। कविता ने लंड को मुंह में लिया, सुनीता ने उसके अंडकोष को चूमा, और गीता ने समीर के सीने पर अपने बूब्स रगड़े। समीर का लंड फिर से सख्त हो गया था, और उसने गीता को अपने ऊपर बैठा लिया। गीता ने लंड को अपनी चूत में डाला और धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी, और उसकी आंखें बंद हो गईं। सुनीता और कविता ने गीता की कमर पकड़ ली, और तीनों की सांसें एक साथ चलने लगीं। गीता के झड़ते ही समीर ने उसे कसकर पकड़ लिया, और कमरा उनकी सिसकारियों से भर गया।

सुबह होने से पहले समीर चुपचाप अपने घर लौट गया, और तीनों बहनें एक दूसरे को देखकर मुस्कुराईं। कविता ने डायरी निकाली और उसमें एक नई लाइन लिखी कि आज रात तीनों बहनों की प्यास एक साथ बुझी है। गीता ने डायरी को वापस गद्दे के नीचे रख दिया, और तीनों ने तय किया कि यह उनका राज़ रहेगा। पर तीनों जानती थीं कि यह सिर्फ शुरुआत है, और आने वाली रातें और भी लंबी होंगी।

🔒 Bonus Scene locked

अगली दोपहर जब मां बाजार गईं, तो समीर फिर घर आया, और इस बार तीनों बहनों ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

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