देसी हिंदी सेक्स कहानी: जयपुर की मीना और उसका ट्रेनर
रात के साढ़े दस बजे मीना का फोन बजा। स्क्रीन पर अर्जुन का नाम चमक रहा था और उसके नीचे एक छोटा सा मैसेज था, कल सुबह सात बजे, जिम बंद रहेगा, तो क्या मैं घर आकर ट्रेनिंग दे दूँ। मीना ने मैसेज को दो बार पढ़ा। उसके पति दुबई में थे और जयपुर के इस फ्लैट में वह पिछले आठ महीनों से अकेली रह रही थी। उसने उँगलियों से धीरे से टाइप किया, ठीक है, आ जाना। उसे नहीं पता था कि उसी मैसेज से एक देसी हिंदी सेक्स कहानी शुरू हो रही थी।
अर्जुन उसका जिम ट्रेनर था। अट्ठाईस साल का, लंबा, चौड़ी छाती वाला लड़का जो हर सुबह उसे वेट ट्रेनिंग कराता था। मीना चौंतीस की थी, दो बच्चों की माँ नहीं, बल्कि एक ऐसी औरत जिसकी शादी को छह साल हो गए थे और जिस्म अभी भी वैसा ही कसा हुआ था जैसा शादी के वक्त था। जिम में अर्जुन जब उसके पीछे खड़ा होकर उसकी कमर पकड़कर स्क्वाट्स कराता था, तो मीना की साँसें तेज हो जाती थीं। वह खुद को समझाती थी कि यह सिर्फ ट्रेनिंग है, लेकिन उसका दिल जानता था कि यह कुछ और है।
सुबह सात बजे दरवाज़े की घंटी बजी। मीना ने गुलाबी रंग की टीशर्ट और काले लेगिंग पहने थे। अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, मैडम, आज घर पर ही वार्म अप करते हैं। उसने अपना बैग सोफे पर रखा और हॉल के बीच में मैट बिछा दी। मीना ने कहा, तुम मुझे मैडम मत कहा करो, मीना कहो। अर्जुन हँसा और बोला, ठीक है मीना, आज से सिर्फ मीना।
वार्म अप के दौरान अर्जुन ने मीना के कंधों को पकड़ा और उन्हें धीरे धीरे घुमाया। उसकी उँगलियाँ मीना की गर्दन के पास रुक गईं। मीना ने आँखें बंद कर लीं। उसने कहा, अर्जुन, तुम्हारे हाथ बहुत गर्म हैं। अर्जुन ने धीरे से कहा, मीना, तुम्हारी गर्दन पर पसीने की बूँदें हैं, मैं साफ कर दूँ। उसने एक तौलिए से उसकी गर्दन पोंछी और उसकी उँगलियाँ अनजाने में मीना के गले से नीचे फिसल गईं।
मीना ने उसकी कलाई पकड़ ली। उसने कहा, तुम जानते हो यह गलत है। अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा और बोला, गलत तब होता जब दिल न चाहे। तुम्हारा दिल क्या कहता है मीना। मीना चुप रही। उसके गाल लाल हो गए। अर्जुन ने धीरे से उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले वह किस हल्का था, फिर गहरा हो गया। मीना ने उसके बालों में उँगलियाँ डाल दीं और उसे अपने और करीब खींच लिया।
किस के बीच में अर्जुन ने मीना की टीशर्ट के नीचे हाथ डाला। उसकी पीठ सहलाते हुए वह ऊपर बढ़ा और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। मीना ने एक लंबी साँस ली और कहा, अर्जुन, रुक मत। अर्जुन ने टीशर्ट ऊपर खींची और उसके बोब्स को अपने हाथों में भर लिया। वह उन्हें दबाता रहा, चूमता रहा, और मीना की साँसें और तेज होती गईं। मीना ने कहा, इतने महीनों से कोई मुझे इस तरह नहीं छुआ।
अर्जुन ने मीना को सोफे पर लिटा दिया। उसने उसके लेगिंग उतारे और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। मीना ने अपनी टाँगें खोल दीं और कहा, हाँ, वहीं, बस वहीं। अर्जुन ने पैंटी एक तरफ सरकाई और अपनी उँगली उसकी चूत के अंदर डाल दी। मीना की चूत पहले से ही गीली थी। वह उँगली को अंदर बाहर करता रहा और मीना के मुँह से आहें निकलने लगीं।
मीना ने अर्जुन की टीशर्ट खींचकर उतार दी। उसकी छाती पर पसीना था और मीना ने उस पर अपने होंठ रख दिए। वह उसकी छाती को चूमती रही, चाटती रही, और नीचे बढ़ते हुए उसने उसके शॉर्ट्स का बटन खोल दिया। अर्जुन का लंड पहले से ही तना हुआ था। मीना ने उसे हाथ में लिया और धीरे धीरे हिलाने लगी। उसने कहा, इतना बड़ा, इतना गर्म।
अर्जुन ने कहा, मीना, मुँह में लो ना। मीना ने हँसते हुए कहा, सब्र करो, पहले तुम्हें पूरा देख तो लूँ। उसने लंड को अपने मुँह में लिया और धीरे धीरे चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के चारों ओर घूम रही थी और अर्जुन के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। मीना ने लंड को गले तक लिया और फिर छोड़ा। अर्जुन ने उसके बाल पकड़े और कहा, मीना, तुम यह बहुत अच्छा करती हो।
कुछ देर बाद अर्जुन ने मीना को उठाया और बेडरूम में ले गया। उसने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। उसने अपना लंड मीना की चूत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। मीना ने कहा, आह, धीरे, धीरे। लंड अंदर गया और मीना की चूत ने उसे कसकर जकड़ लिया। अर्जुन ने धक्के मारने शुरू किए, पहले धीरे, फिर तेज।
बिस्तर की चरमराहट और मीना की आहें कमरे में गूँज रही थीं। अर्जुन ने मीना के बोब्स को पकड़ा और उन्हें दबाते हुए चोदता रहा। मीना ने अपनी टाँगें उसकी कमर से लपेट लीं और कहा, और तेज, अर्जुन, और तेज। अर्जुन ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। मीना की चूत से पानी निकलने लगा और वह झड़ने के करीब आ गई।
मीना ने चिल्लाते हुए कहा, मैं झड़ रही हूँ, अर्जुन, मैं झड़ रही हूँ। उसका जिस्म काँपने लगा और उसकी चूत ने लंड को और कसकर दबा लिया। अर्जुन ने भी अपनी रफ्तार बढ़ाई और कुछ ही धक्कों में उसका पानी मीना की चूत में निकल गया। दोनों हाँफते हुए एक दूसरे से लिपटे रहे। मीना ने कहा, यह देसी हिंदी सेक्स कहानी मेरी अपनी कहानी बन गई है।
थोड़ी देर बाद मीना उठी और बाथरूम से लौटकर उसने अर्जुन के लिए चाय बनाई। दोनों बालकनी में बैठे। अर्जुन ने कहा, मीना, कल फिर आऊँ। मीना ने मुस्कुराते हुए कहा, कल जिम खुलेगा, लेकिन शाम को घर आ जाना। अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, शाम को पक्का। मीना ने आसमान की ओर देखा और सोचा कि आठ महीनों की तन्हाई आज एक ही सुबह में खत्म हो गई थी।
शाम को जब अर्जुन आया, तो मीना ने दरवाज़ा खोलते ही उसे अंदर खींच लिया। उसने कहा, आज मैं तुम्हें कुछ नया दिखाती हूँ। वह उसे बेडरूम में ले गई और बिस्तर पर घोड़ी बन गई। उसने कहा, पीछे से करो, मुझे यह बहुत पसंद है। अर्जुन ने उसके पीछे आकर अपना लंड उसकी चूत में डाला और धक्के मारने लगा। मीना की आहें और तेज हो गईं।
अर्जुन ने मीना के बाल पकड़े और उसकी पीठ पर किस किया। मीना ने कहा, हाँ, ऐसे ही, रुकना मत। उसकी चूत से पानी बह रहा था और अर्जुन का लंड और भी सख्त हो गया था। कुछ ही मिनटों में मीना फिर झड़ गई। उसने कहा, अर्जुन, तुमने मुझे फिर से जवान कर दिया। अर्जुन हँसा और बोला, यह तो अभी शुरुआत है मीना।
रात को दोनों ने साथ खाना खाया। मीना ने कहा, मेरे पति को इस बारे में कभी पता नहीं चलना चाहिए। अर्जुन ने कहा, यह बात सिर्फ हम दोनों के बीच रहेगी। मीना ने उसका हाथ थामा और कहा, तुम मेरे ट्रेनर ही नहीं, अब मेरी आदत बन गए हो। अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, और तुम मेरी सबसे खास स्टूडेंट।
अगले दिन जिम में जब मीना पहुँची, तो अर्जुन ने उसे देखकर आँख मारी। मीना ने भी मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। ट्रेनिंग के दौरान जब अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ी, तो मीना ने धीरे से कहा, शाम को घर आ जाना। अर्जुन ने कहा, सात बजे, पक्का। मीना जानती थी कि अब उसकी हर शाम का एक ही मतलब था, अर्जुन और उसकी बाँहों में बीतने वाली रातें।
एक हफ्ते बाद मीना के पति का फोन आया। उन्होंने कहा, मैं अगले महीने आ रहा हूँ। मीना ने कहा, अच्छा, घर सब ठीक है। फोन रखने के बाद मीना ने अर्जुन को मैसेज किया, अगले महीने वह आ रहे हैं, तब तक हर दिन मेरा है। अर्जुन ने जवाब दिया, हर दिन, हर रात, सिर्फ तुम्हारा। मीना ने फोन को सीने से लगाया और मुस्कुरा दी।
उस रात अर्जुन ने मीना को एक नई जगह पर चोदा, किचन के काउंटर पर। मीना ने कहा, यहाँ सब कुछ दिखता है, कोई आ गया तो। अर्जुन ने कहा, दरवाज़ा बंद है, बस तुम और मैं। उसने मीना को काउंटर पर बैठाया, उसकी टाँगें खोलीं और अपना लंड अंदर डाल दिया। मीना ने काउंटर को पकड़ा और आहें भरने लगी।
किचन में बर्तनों की खनक और मीना की साँसों की आवाज़ मिलकर एक अजीब सा संगीत बना रही थी। मीना ने कहा, अर्जुन, तुम पागल हो, लेकिन मुझे तुम्हारा पागलपन पसंद है। अर्जुन ने उसे चूमते हुए कहा, और मुझे तुम्हारी यह आवाज़ पसंद है। मीना झड़ गई और अर्जुन भी उसके साथ ही झड़ गया। दोनों हँसते हुए एक दूसरे से लिपट गए।
मीना ने अर्जुन के कान में कहा, कल सुबह फिर वही मैसेज करना, वही वाला, कल सुबह सात बजे। अर्जुन ने हँसकर कहा, वह मैसेज तो अब हमारी कहानी की शुरुआत बन गया है। मीना ने कहा, हाँ, और यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
अगली सुबह मीना जल्दी उठी और उसने बालकनी में खड़े होकर चाय पी। जयपुर की सुबह की हवा ठंडी थी और सड़क पर धीरे धीरे ज़िंदगी शुरू हो रही थी। मीना ने सोचा कि पहले वह कितनी अकेली थी और अब उसकी सुबहों में एक इंतज़ार होता है। उसने फोन उठाया और अर्जुन का नंबर देखा, फिर मुस्कुराते हुए फोन रख दिया।
सात बजे दरवाज़े की घंटी बजी और मीना ने दरवाज़ा खोला। अर्जुन सामने खड़ा था, हाथ में जिम का बैग और चेहरे पर वही मुस्कान। मीना ने उसे अंदर खींचा और दरवाज़ा बंद कर दिया। उसने कहा, आज ट्रेनिंग नहीं, आज सिर्फ तुम और मैं। अर्जुन ने बैग नीचे रखा और मीना को अपनी बाँहों में भर लिया।
उस रात जब दोनों बालकनी में बैठे थे, तो मीना ने अचानक अर्जुन का हाथ पकड़ा और कहा, तुम्हें एक राज़ बताऊँ। अर्जुन ने कहा, बताओ। मीना ने कहा, मेरे पति के जाने के बाद मैंने कभी किसी को इतना करीब नहीं आने दिया, लेकिन तुमने एक ही सुबह में वह दीवार गिरा दी। अर्जुन ने उसका हाथ चूमा और कहा, तो फिर आज रात वह दीवार पूरी तरह गिरा देते हैं।
मीना उसे बेडरूम में ले गई और अलमारी से एक लाल रंग की नाइटी निकाली। उसने कहा, यह मैंने अपनी शादी के वक्त ली थी, लेकिन कभी पहनी नहीं। आज पहनकर दिखाऊँ। अर्जुन ने कहा, पहनो, मैं देखना चाहता हूँ। मीना ने नाइटी पहनी और शीशे के सामने खड़ी हो गई। नाइटी उसके जिस्म से चिपक रही थी और उसके बोब्स की शेप साफ दिख रही थी। अर्जुन ने पीछे से आकर उसे पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा।
मीना ने कहा, शीशे में देखो, हम दोनों कैसे लग रहे हैं। अर्जुन ने शीशे में देखते हुए मीना की नाइटी के स्ट्रैप नीचे सरकाए। उसके बोब्स बाहर आ गए और अर्जुन ने उन्हें शीशे में देखते हुए दबाना शुरू कर दिया। मीना की साँसें तेज हो गईं। उसने कहा, ऐसे ही, शीशे के सामने ही करो। अर्जुन ने उसकी नाइटी ऊपर उठाई और अपना लंड उसकी चूत में पीछे से डाल दिया।
शीशे में दोनों का अक्स दिख रहा था। मीना ने अपनी आँखें खोलीं और खुद को देखते हुए आहें भरने लगी। अर्जुन ने धक्के मारते हुए कहा, मीना, तुम शीशे में और भी खूबसूरत लग रही हो। मीना ने कहा, तो फिर रोज़ शीशे के सामने ही करेंगे। दोनों हँस पड़े और उसी हँसी के बीच मीना झड़ गई। अर्जुन ने भी कुछ धक्कों बाद अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।
बाद में दोनों बिस्तर पर लेटे और मीना ने कहा, यह लाल नाइटी अब सिर्फ तुम्हारे लिए है। अर्जुन ने कहा, और यह शीशा अब हमारा गवाह है। मीना ने मुस्कुराते हुए कहा, गवाह को भी कभी कभी शर्म आ जाती है। दोनों की हँसी कमरे में गूँज गई और रात और गहरी हो गई।
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