हिंदी एडल्ट स्टोरी: जयपुर की रात में पुरानी दोस्ती का नया एहसास
दरवाजे की घंटी बजी और रीमा ने दरवाजा खोला तो सामने विक्रम खड़ा था, हाथ में कैमरा बैग और कंधे पर एक छोटा बैग। तीन दिन के शूट के लिए वह जयपुर आया था और आज रात उसे रीमा के घर रुकना था। दरवाजा खुलते ही दोनों की नजरें मिलीं और उस एक पल में ही यह हिंदी एडल्ट स्टोरी शुरू हो गई।
रीमा ने उसे अंदर बुलाया और विक्रम ने जूते उतारते हुए पूरे घर पर एक नजर डाली। लिविंग रूम में हल्की रोशनी थी, सोफे पर एक शॉल पड़ी थी और हवा में उसकी परफ्यूम की महक घुली हुई थी। विक्रम ने बैग कोने में रखा और मुस्कुराकर कहा, तुम तो पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो। रीमा हंस पड़ी और बोली, झूठ बोलना कॉलेज से ही तुम्हारी आदत है।
दोनों सोफे पर बैठ गए और पुरानी कॉलेज की बातें शुरू हो गईं। विक्रम ने याद दिलाया कि कैसे रीमा क्लास में सबसे आगे बैठती थी और फिर भी सबसे ज्यादा शरारतें करती थी। रीमा ने चाय का कप उसकी तरफ बढ़ाया और कहा, तुम तो अब बड़े फोटोग्राफर बन गए हो, हमें तो भूल ही गए। विक्रम ने कप लेते हुए उसकी उंगलियों को हल्के से छू लिया और कहा, भूलता तो तब जब तुम भूलने देतीं।
चाय पीते हुए रीमा ने अपने बुटीक के बारे में बताया, कैसे वह सुबह से शाम तक कपड़ों, कस्टमर और कारीगरों में उलझी रहती है। विक्रम ने उसकी तारीफ की और कहा कि जयपुर में उसके काम की चर्चा शूट वाली टीम तक पहुंच गई है। रीमा ने बताया कि उसके पति काम के सिलसिले में बाहर गए हुए हैं और घर में इस वक्त वह अकेली है। विक्रम ने यह सुनकर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी, पर उसकी आंखों में एक हल्की सी चमक आ गई।
शाम ढलने लगी तो रीमा किचन में खाना बनाने चली गई और विक्रम भी उसके पीछे पीछे आ गया, उसने कहा कि वह हाथ बंटाएगा, पर सच यह था कि वह रीमा के करीब रहना चाहता था। सब्जी काटते हुए रीमा के हाथ कांप से रहे थे क्योंकि विक्रम बार बार उसके कंधे से टकरा जाता था। रीमा ने हंसकर कहा, तुम हटो यहां से, वरना खाना जल जाएगा। विक्रम ने उसके कान के पास धीरे से कहा, खाना जल जाए तो भी चलेगा, पर यह मौका नहीं।
खाना तैयार हुआ तो दोनों ने डाइनिंग टेबल पर खाना खाया, पर बातें खाने से ज्यादा एक दूसरे पर टिकी थीं, विक्रम ने पूछा कि क्या वह अभी भी पुरानी वाली रीमा है जो बिना सोचे कुछ भी कह देती थी। रीमा ने कहा, वह रीमा तो अब भी यहीं है, बस जिम्मेदारियों ने उसे थोड़ा छिपा दिया है। विक्रम ने उसकी आंखों में देखा और कहा, तो आज रात उसे बाहर निकालो। रीमा ने नजरें झुका लीं, पर उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई।
खाने के बाद दोनों बालकनी में आ गए, जहां जयपुर की रात की ठंडी हवा चल रही थी, विक्रम रीमा के बगल में खड़ा हो गया और दोनों कुछ देर बिना कुछ कहे नीचे जाती सड़क को देखते रहे। अचानक विक्रम ने रीमा का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच लिया। रीमा ने विरोध नहीं किया, बल्कि उसके सीने से लग गई और धीरे से बोली, विक्रम, यह गलत तो नहीं। विक्रम ने कहा, जो दिल से हो वह गलत नहीं होता।
विक्रम ने रीमा के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर एक लंबा गहरा चुंबन दिया, रीमा ने पहले धीरे से जवाब दिया, फिर पूरी तरह उसके चुंबन में खो गई। उसकी उंगलियां विक्रम के बालों में उलझ गईं और विक्रम के हाथ उसकी कमर पर कसते गए। चुंबन इतना गर्म हो गया कि दोनों की सांसें तेज हो गईं और रीमा ने विक्रम की शर्ट को मुट्ठी में कस लिया। वह बोली, रुक मत, आज रात मैं पूरी तरह तुम्हारी हूं।
विक्रम ने रीमा को गोद में उठाया और लिविंग रूम के सोफे पर ले आया, उसने रीमा की कुर्ती के बटन एक एक करके खोले और उसकी गोरी त्वचा पर अपने होंठ रख दिए। रीमा की सांसें तेज हो गईं और उसने विक्रम का सिर अपने सीने से लगा लिया। विक्रम ने उसकी ब्रा का हुक खोला और उसके मुलायम बूब्स को अपने हाथों में लेकर धीरे धीरे दबाने लगा। रीमा सिसक पड़ी और बोली, और जोर से करो, मुझे यही चाहिए।
विक्रम ने रीमा के बूब्स को चूसा, उसकी निप्पल को जीभ से छेड़ा और फिर उसके पेट पर चुंबनों की लकीर बनाते हुए नीचे आ गया, रीमा ने अपनी सलवार की डोरी खुद खोल दी और विक्रम ने उसे धीरे से नीचे खिसका दिया। उसकी पैंटी भीग चुकी थी और विक्रम ने उसे हटाकर उसकी चूत को अपनी उंगलियों से छुआ। रीमा की कमर उठ गई और वह बोली, विक्रम, अब और मत तड़पाओ। विक्रम ने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, जीभ से उसके दाने को छेड़ते हुए उसे पागल कर दिया।
रीमा का शरीर कांपने लगा और वह जोर जोर से सिसकियां लेने लगी, उसने विक्रम के सिर को अपनी जांघों के बीच दबा लिया और कहा, हां, ऐसे ही, बस ऐसे ही। विक्रम ने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर तक ले जाकर उसे चाटा और उंगलियों से भी उसे सहलाया। रीमा का पहला चरम सुख करीब आ गया और अचानक उसके शरीर में एक तेज लहर दौड़ गई। वह चिल्ला पड़ी और उसकी चूत से पानी निकल गया, जिसे विक्रम ने पूरी तरह चाट लिया।
रीमा अभी संभली भी नहीं थी कि विक्रम ने अपने कपड़े उतार दिए, उसका लंबा मोटा लंड तनकर खड़ा था और रीमा ने उसे देखते ही अपने होंठों पर जीभ फेरी, उसने विक्रम के लंड को अपने हाथ में लिया और धीरे धीरे हिलाने लगी। फिर उसने उसे अपने मुंह में लिया और ऊपर नीचे करते हुए चूसने लगी। विक्रम ने उसके सिर को पकड़ लिया और कहा, रीमा, तुम तो कमाल हो, ऐसे ही चूसो। रीमा ने उसके लंड के अगले हिस्से को जीभ से चाटा और गहराई तक लेकर उसे पूरी तरह गीला कर दिया।
विक्रम ने रीमा को सोफे पर लिटाया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया, उसने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रगड़ा और धीरे धीरे अंदर धकेल दिया। रीमा ने एक लंबी सांस ली और कहा, आह, कितना मोटा है, धीरे से डालो। विक्रम ने पहले धीरे धीरे धक्के लगाए, फिर गति बढ़ा दी और पूरी ताकत से उसकी चुदाई करने लगा। सोफा हिलने लगा, रीमा के बूब्स उछलने लगे और कमरे में दोनों की सिसकियां और धक्कों की आवाज गूंजने लगी।
विक्रम ने रीमा को पलटकर घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चुदाई करने लगा, उसने रीमा की कमर को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और हर धक्के के साथ उसके नितंबों पर हल्की थपकी दी। रीमा ने सोफे की गद्दी को कसकर पकड़ लिया और कहा, हां विक्रम, और तेज, मुझे पीछे से ही चाहिए। विक्रम ने गति और बढ़ा दी, उसका लंड पूरी गहराई तक उसकी चूत में जा रहा था और रीमा बार बार चरम सुख के करीब पहुंच रही थी। उसकी चूत ने विक्रम के लंड को कसकर जकड़ लिया और दोनों एक साथ झड़ने के करीब आ गए।
विक्रम ने आखिरी तेज धक्के लगाए और एक जोरदार सिसकी के साथ अपना पूरा पानी रीमा की चूत में छोड़ दिया, रीमा भी उसी पल झड़ गई, उसका शरीर कांप गया और वह सोफे पर ही निढाल हो गई। दोनों कुछ देर वैसे ही पड़े रहे, पसीने से भीगे, एक दूसरे की सांसों को महसूस करते हुए। विक्रम ने रीमा के माथे पर चुंबन दिया और कहा, यह रात मैं कभी नहीं भूलूंगा। रीमा ने उसकी छाती पर सिर रखकर कहा, मैं भी नहीं।
कुछ देर बाद रीमा उठी और विक्रम का हाथ पकड़कर उसे बेडरूम में ले गई, बेडरूम की हल्की पीली रोशनी में दोनों ने एक दूसरे को फिर से देखा और हंस पड़े। रीमा ने कहा, अभी रात बाकी है, क्या तुम थक गए। विक्रम ने उसे बिस्तर पर गिरा दिया और कहा, तुम्हारे साथ थकने का सवाल ही नहीं। उसने रीमा के शरीर पर फिर से चुंबन बरसाने शुरू कर दिए, उसके बूब्स को दबाया और उसकी चूत को उंगलियों से गीला कर दिया।
बिस्तर पर विक्रम ने रीमा को अपने ऊपर बैठा लिया और रीमा ने खुद उसके लंड को अपनी चूत में डाल लिया, वह ऊपर नीचे होने लगी, उसके बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे और उसके बूब्स विक्रम के सामने उछल रहे थे। विक्रम ने उसके बूब्स को अपने हाथों से पकड़कर चूसा और नीचे से भी धक्के लगाने लगा। रीमा ने गति बढ़ा दी और कहा, विक्रम, तुम्हारा लंड मेरी चूत में कितना अच्छा लग रहा है, बस ऐसे ही करते रहो। दोनों की चुदाई की लय तेज हो गई और बिस्तर चरमराने लगा।
रीमा की गति धीमी पड़ी तो विक्रम ने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर आ गया, उसने रीमा की टांगों को चौड़ा किया और मिशनरी पोज में उसकी तेज चुदाई शुरू कर दी, हर धक्के के साथ रीमा की सिसकियां बढ़ती गईं और उसने विक्रम की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। विक्रम ने उसके होंठों को चूमते हुए कहा, रीमा, तुम मेरी हो, सिर्फ मेरी। रीमा ने कहा, हां, आज रात पूरी तरह तुम्हारी। इसके बाद दोनों एक बार फिर साथ झड़े, विक्रम का पानी उसकी चूत में गया और रीमा का शरीर खुशी से कांप उठा।
दूसरी बार झड़ने के बाद दोनों बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर लेट गए, रीमा ने विक्रम की छाती पर उंगली से कुछ लिखा और विक्रम ने उसे अपने बाहों में और कस लिया। दोनों ने धीमी आवाज में पुरानी बातें कीं, कॉलेज के दिनों की शरारतें याद कीं और हंसते रहे। रीमा ने कहा, मुझे डर था कि हम अजनबी हो गए होंगे, पर ऐसा लगा ही नहीं। विक्रम ने कहा, कुछ लोग कभी अजनबी नहीं होते, वह बस वक्त का इंतजार करते हैं।
आधी रात के बाद रीमा को प्यास लगी तो वह किचन में पानी लेने गई और विक्रम भी उसके पीछे आ गया, किचन की ठंडी टाइल्स पर रीमा के नंगे पैर थे और उसने सिर्फ विक्रम की शर्ट पहनी हुई थी, विक्रम ने पीछे से उसे पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चुंबन दिया। रीमा हंस पड़ी और बोली, तुम तो मानोगे ही नहीं। विक्रम ने कहा, तीन दिन हैं, अभी तो पहली रात है। रीमा ने पानी का गिलास रख दिया और उसके होंठों पर एक छोटा सा चुंबन दिया।
किचन में ही विक्रम ने रीमा की शर्ट ऊपर की और उसके बूब्स को दबाते हुए उसकी चूत में उंगली डाल दी, रीमा ने किचन स्लैब को पकड़ लिया और धीरे से सिसक पड़ी, विक्रम ने उसे स्लैब के सहारे झुका दिया और पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डालकर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। रीमा ने कहा, धीरे करो, कोई आवाज न हो। पर धक्कों की गति बढ़ती गई और रीमा ने अपना मुंह अपने हाथ से दबा लिया ताकि उसकी सिसकियां बाहर न जाएं। कुछ ही मिनटों में वह फिर झड़ गई और विक्रम ने भी अपना पानी उसके अंदर छोड़ दिया।
इसके बाद दोनों वापस बेडरूम में आए और बिस्तर पर एक दूसरे की बाहों में सो गए, सुबह होने से पहले रीमा ने आंखें खोलीं तो विक्रम उसे ही देख रहा था, उसने धीरे से कहा, तुम जाग रहे हो। विक्रम ने कहा, तुम्हें देखते हुए नींद कैसे आती। रीमा ने मुस्कुराकर उसके होंठों पर चुंबन दिया और कहा, तो फिर सोने का नाटक मत करो, मुझे अपनी बाहों में ही रखो। विक्रम ने उसे कसकर पकड़ लिया और दोनों फिर एक दूसरे की गर्मी में खो गए।
सुबह की पहली किरण खिड़की से अंदर आई तो रीमा की आंख खुली और उसने देखा कि विक्रम पहले से जागकर उसे देख रहा था। उसने मुस्कुराकर रीमा के गाल पर चुंबन दिया और कहा कि आज का दिन भी उनका ही है। रीमा ने उसे धक्का देकर कहा कि पहले चाय तो बनने दो, पर विक्रम ने उसे पकड़कर बिस्तर पर ही रोक लिया। दोनों हंस पड़े और सुबह की इस शरारत ने रात की गर्मी को फिर से जगा दिया।
विक्रम ने रीमा को बाथरूम में ले जाकर शॉवर के नीचे खड़ा कर दिया और गर्म पानी दोनों के शरीर पर गिरने लगा। उसने रीमा के गीले बूब्स को अपने हाथों से दबाया और साबुन लगाते हुए उसके पूरे शरीर को सहलाया। रीमा ने विक्रम के लंड को हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाया और कहा कि सुबह सुबह यह शरारत अच्छी नहीं। विक्रम ने हंसकर कहा कि अच्छी शरारत ही तो सबसे अच्छी होती है।
शॉवर के नीचे ही रीमा घुटनों पर बैठ गई और विक्रम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। पानी की बूंदें उसके बालों से टपक रही थीं और विक्रम ने उसके सिर को पकड़कर धीरे धीरे अंदर बाहर किया। रीमा ने उसके लंड को गहराई तक लिया और जीभ से उसके अगले हिस्से को चाटा। विक्रम सिसक पड़ा और कहा कि रीमा, बस ऐसे ही, तुम मुझे पागल कर देती हो।
विक्रम ने रीमा को दीवार के सहारे खड़ा किया और उसकी एक टांग ऊपर उठाकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। गर्म पानी के बीच उसकी चुदाई की आवाज और दोनों की सिसकियां बाथरूम में गूंजने लगीं। रीमा ने विक्रम की कमर को पकड़ लिया और कहा कि और तेज करो, मुझे सुबह की यह चुदाई बहुत अच्छी लग रही है। विक्रम ने तेज धक्के लगाए और उसकी चूत की गहराई तक पहुंचकर उसे बार बार चरम सुख के करीब ले गया।
आखिर में दोनों एक साथ झड़े, विक्रम का पानी रीमा की चूत में गया और रीमा का शरीर खुशी से कांप उठा। विक्रम ने उसे कसकर गले लगाया और शॉवर के नीचे ही उसके माथे पर चुंबन दिया। रीमा ने हंसकर कहा कि अब तो चाय भी ठंडी हो गई होगी। विक्रम ने कहा कि चाय बाद में, पहले तुम मेरी बाहों में ही रहो।
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