हिंदी गंदी कहानी: कविता और आरव का आखिरी राज़, Part 3
कविता ने दरवाज़ा खोला तो आरव सामने खड़ा था। उसकी आँखों में वही शरारत थी जो जिम में होती थी, पर इस बार उसके हाथ में एक छोटा सा पार्सल था और चेहरे पर ऐसा भाव जैसे वह सच में कुछ लौटाने आया हो। पीछे बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी। कविता का पति शावर ले रहा था और उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि दरवाज़े पर कौन खड़ा है।
कविता की साँस अटक गई। पिछली रात आरव ने दरवाज़े की घंटी बजाई थी और अब वह सच में उसके सामने था। उसने जल्दी से आरव को अंदर खींचा और फुसफुसाकर कहा कि पति घर पर है, अभी बाथरूम में है। आरव ने पार्सल टेबल पर रखा और बोला कि यह तुम्हारा जिम का तौलिया है, जो कल लॉकर रूम में रह गया था। उसकी आवाज़ इतनी सामान्य थी कि कविता को हँसी आ गई, पर डर भी लगा।
तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला। कविता के पति ने तौलिया लपेटा हुआ था और आरव को देखकर चौंक गए। आरव ने तुरंत हाथ जोड़कर नमस्ते कहा और बताया कि वह नीचे वाले जिम का ट्रेनर है और मैडम का तौलिया लौटाने आया है। पति ने मुस्कुराकर कहा कि शुक्रिया, चाय पिएँगे। आरव ने मना कर दिया और कहा कि अगली क्लास का समय हो गया है। वह मुस्कुराता हुआ बाहर निकल गया, पर जाते जाते उसने कविता की तरफ एक ऐसी नज़र डाली जिसमें साफ लिखा था कि रात को बात होगी।
पति ने कहा कि अच्छा लड़का है, शिष्ट है। कविता ने हाँ में सिर हिलाया और चाय बनाने चली गई। उसके हाथ काँप रहे थे। वह सोच रही थी कि आरव कितना बेखौफ है। दरवाज़े पर आना, पति के सामने खड़े होकर झूठ बोलना, यह सब उसके लिए खेल जैसा था। पर कविता के लिए यह आग थी। वह जानती थी कि यह खेल अब और खतरनाक होता जा रहा है।
दोपहर को पति ने बताया कि कल सुबह उसे इंदौर लौटना है। वहाँ एक हफ्ते का काम आ गया है और इस बार शायद एक महीना भी लग सकता है। कविता ने राहत की साँस ली, पर साथ ही एक अजीब सी बेचैनी भी महसूस की। पति के जाते ही घर खाली हो जाएगा और आरव की मौजूदगी और बढ़ जाएगी। वह यही चाहती थी और इसी से डरती भी थी।
रात को जब पति सो गया, कविता के फोन पर आरव का मैसेज आया। उसने लिखा कि कल सुबह पति के जाते ही वह जिम के बाद उसके फ्लैट पर आएगा। कविता ने मैसेज पढ़कर फोन साइलेंट पर रख दिया। उसने पति की तरफ देखा। वह गहरी नींद में था। कविता को लगा जैसे वह दो ज़िंदगियाँ जी रही है। एक में वह एक अच्छी पत्नी है, दूसरी में वह एक ऐसी औरत है जो अपनी प्यास को छिपा नहीं पा रही।
सुबह पति चला गया। दरवाज़ा बंद होते ही कविता ने लंबी साँस ली। उसने घर साफ किया, नाश्ता बनाया और फिर जिम जाने के लिए तैयार हुई। जिम में आरव पहले से उसका इंतज़ार कर रहा था। उसने कविता को देखते ही कहा कि आज उसकी आँखों में नींद की कमी साफ दिख रही है। कविता ने हँसकर कहा कि तुम ही इसकी वजह हो। दोनों की हँसी में वह पुरानी शरारत वापस आ गई थी।
वर्कआउट के बाद आरव ने कहा कि आज बैक रूम में कोई नहीं है। कविता ने पहले मना किया, फिर उसकी आँखों में देखकर मान गई। बैक रूम में जाते ही आरव ने दरवाज़ा बंद किया और कविता को दीवार से लगा लिया। उसने उसके होंठों को चूमा, पहले धीरे, फिर ज़ोर से। कविता ने उसकी कमर को पकड़ लिया और उसके शरीर से सट गई। उसके हाथ आरव की पीठ पर चल रहे थे और उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
आरव ने कविता की टीशर्ट ऊपर उठाई और उसके पेट को चूमा। कविता ने आँखें बंद कर लीं। उसकी उँगलियाँ आरव के बालों में थीं। आरव ने धीरे धीरे उसकी ब्रा का हुक खोला और उसके बूब्स को हाथों में ले लिया। वह उन्हें दबा रहा था, चूम रहा था, और कविता की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। उसने कहा कि धीरे बोलो, कोई सुन लेगा। कविता ने उसके होंठों पर हाथ रख दिया और खुद ही उसे चूमने लगी।
फिर आरव ने कविता के लोअर को नीचे सरकाया। कविता की चूत पहले से गीली थी। आरव ने अपनी उँगलियों से उसे सहलाया और कविता के पैर काँपने लगे। उसने आरव का लंड अपने हाथ में लिया। वह सख्त और गर्म था। कविता ने उसे सहलाया और आरव की आँखें बंद हो गईं। वह बोला कि तुम यह बहुत अच्छा करती हो। कविता ने मुस्कुराकर कहा कि तुमने ही सिखाया है।
आरव ने कविता को बेंच पर बिठाया और उसकी टाँगें फैलाईं। उसने अपना लंड धीरे धीरे उसकी चूत में डाला। कविता ने लंबी साँस ली और उसके कंधों को पकड़ लिया। आरव धीरे धीरे अंदर बाहर हो रहा था और हर धक्के के साथ कविता की आवाज़ बढ़ रही थी। उसकी चूत से पानी बह रहा था और आरव का लंड पूरी तरह भीगा हुआ था।
कुछ देर बाद आरव ने रफ्तार बढ़ाई। कविता ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर लपेट लीं और हर धक्के का जवाब अपनी कमर हिलाकर देने लगी। बैक रूम में उनकी साँसों और शरीरों की आवाज़ गूँज रही थी। कविता को लगा जैसे उसका पूरा शरीर आग में है। उसने आरव को ज़ोर से पकड़ लिया और बोली कि और तेज़, और ज़ोर से। आरव ने उसकी बात मानी और तेज़ धक्के लगाने लगा।
कविता का शरीर ऐंठने लगा। उसकी चूत सिकुड़ने लगी और वह ज़ोर से चिल्लाई। उसका पानी निकल गया और वह आरव से लिपट गई। आरव ने भी कुछ ही धक्कों में अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। दोनों हाँफ रहे थे और एक दूसरे से लिपटे हुए थे। कविता ने कहा कि यह पागलपन है, पर यही पागलपन उसे ज़िंदा रखता है।
शाम को आरव कविता के फ्लैट पर आया। इस बार कोई डर नहीं था, कोई जल्दी नहीं थी। कविता ने दरवाज़ा खोला और आरव को अंदर खींच लिया। उसने दरवाज़ा बंद किया और आरव के गले लग गई। आरव ने उसे उठाकर सोफे पर बिठा दिया और उसके होंठों को चूमने लगा। कविता ने उसकी शर्ट के बटन खोले और उसकी छाती को चूमा।
कविता ने आरव को बेडरूम तक खींचा। वहाँ उसने खुद अपने कपड़े उतारे, एक एक करके, आरव की आँखों के सामने। आरव उसे देख रहा था और उसकी आँखों में भूख साफ दिख रही थी। कविता बिस्तर पर लेट गई और अपनी टाँगें फैला दीं। आरव ने उसके पैरों से चूमना शुरू किया, ऊपर बढ़ते हुए उसकी जाँघों तक, फिर उसकी चूत तक।
आरव ने अपनी जीभ से कविता की चूत को चाटना शुरू किया। कविता की कमर बिस्तर से उठने लगी। उसने आरव के सिर को पकड़ लिया और अपने पैरों को उसके कंधों पर रख दिया। आरव की जीभ अंदर तक जा रही थी और कविता की आवाज़ पूरे कमरे में फैल रही थी। वह बोली कि बस, अब और मत तड़पाओ। आरव ने मुस्कुराकर कहा कि तड़पाना ही तो मज़ा है।
फिर कविता ने आरव को अपने ऊपर खींच लिया। उसने उसका लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे धीरे अंदर लिया। इस बार वह खुद ऊपर थी। उसने आरव की छाती पर हाथ रखे और धीरे धीरे हिलने लगी। उसकी चूत आरव के लंड को कसकर पकड़े हुए थी। आरव ने उसके बूब्स को पकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए नीचे से धक्के लगाने लगा।
कविता की रफ्तार बढ़ती गई। उसके बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे और पसीना उसकी पीठ पर बह रहा था। वह तेज़ तेज़ हिल रही थी और आरव भी नीचे से ज़ोर लगा रहा था। दोनों की साँसें एक हो गई थीं। कविता ने ज़ोर से कहा कि वह आने वाली है। आरव ने उसे कसकर पकड़ लिया और कुछ ही पलों में कविता का शरीर काँपने लगा। उसका पानी बह गया और वह आरव की छाती पर गिर पड़ी।
आरव अभी रुका नहीं था। उसने कविता को पलटकर घोड़ी बनाया। उसने पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाला और तेज़ धक्के लगाने लगा। कविता ने चादर को पकड़ लिया और हर धक्के के साथ आगे पीछे हो रही थी। आरव ने उसके बाल पकड़े और उसकी पीठ को चूमा। कुछ ही मिनटों में आरव ने ज़ोर से धक्का लगाया और अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। दोनों बिस्तर पर गिर पड़े और हाँफते हुए एक दूसरे को देखने लगे।
रात के खाने के बाद दोनों बालकनी में बैठे। आरव ने कहा कि उसे इस तरह छिपकर मिलना अच्छा लगता है, पर वह यह भी जानता है कि यह हमेशा नहीं चल सकता। कविता ने कहा कि वह जानती है। उसने कहा कि पति का तबादला अभी लंबा चलेगा और वह इस दौरान आरव से मिलती रहेगी, पर कुछ नियम होंगे। कोई और दरवाज़े की घंटी वाला खेल नहीं, कोई पति के सामने झूठ नहीं। सिर्फ जिम और उसका फ्लैट, और सिर्फ तब जब पति शहर से बाहर हो।
आरव ने हँसकर कहा कि नियम तोड़ने के लिए ही बनते हैं। कविता ने उसके हाथ पर हल्का सा मारा और कहा कि इस बार नियम नहीं टूटेंगे। वह अपनी ज़िंदगी को आग नहीं लगाना चाहती। वह बस अपनी प्यास बुझाना चाहती है, अपनी शर्तों पर। आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा कि ठीक है, तुम्हारी शर्तें ही मेरी शर्तें हैं।
रात को सोने से पहले पति का फोन आया। उसने बताया कि इंदौर का काम एक महीने बढ़ गया है। कविता ने सामान्य आवाज़ में कहा कि ठीक है, अपना ख्याल रखना। फोन रखते ही उसने आरव की तरफ देखा। दोनों मुस्कुरा दिए। कविता ने फोन साइलेंट पर किया, दरवाज़ा बंद किया और आरव को बेडरूम की तरफ खींच लिया। उसने कहा कि एक महीना लंबा है और रात अभी बाकी है।
उस रात के बाद कविता और आरव की मुलाकातों का एक नया नियम बन गया था। पति इंदौर में था और घर में सिर्फ कविता थी। एक शाम आरव जिम से सीधे उसके फ्लैट पर आया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कविता ने उसे अंदर ले लिया। इस बार आरव के हाथ में कोई बहाना नहीं था, सिर्फ उसकी मुस्कान थी।
कविता ने उसे पानी दिया और दोनों सोफे पर बैठ गए। आरव ने उसका हाथ पकड़ा और उसकी उँगलियों को चूमा। कविता ने कहा कि आज उसे कुछ अलग चाहिए। आरव ने पूछा कि क्या। कविता ने मुस्कुराकर कहा कि आज वह खुद उसे तैयार करेगी, जैसे वह उसे ट्रेनिंग में तैयार करता है।
उसने आरव की शर्ट उतारी और उसकी छाती पर हाथ फेरा। फिर वह उसके सामने घुटनों पर बैठ गई और उसका लंड अपने हाथ में लिया। वह धीरे धीरे उसे सहला रही थी और आरव की आँखें बंद हो रही थीं। कविता ने उसे अपने मुँह में लिया और धीरे धीरे चूसने लगी। आरव ने उसके बाल पकड़ लिए और उसकी हर हरकत का मज़ा लेने लगा।
कुछ देर बाद कविता उठी और अपने कपड़े उतार दिए। वह सोफे पर झुक गई और आरव को इशारा किया। आरव ने पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाला और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। कविता की आवाज़ धीरे धीरे बढ़ रही थी। उसने सोफे की गद्दी को पकड़ लिया और हर धक्के के साथ अपनी कमर हिलाने लगी।
आरव ने उसकी पीठ को चूमा और उसके बूब्स को हाथों से दबाया। कविता का शरीर काँपने लगा और उसका पानी निकल गया। आरव ने भी ज़ोर से धक्का लगाया और अपना पानी छोड़ दिया। दोनों सोफे पर गिर पड़े और हँसने लगे। कविता ने कहा कि यही उसकी असली ट्रेनिंग है और आरव ने कहा कि वह इसका सबसे अच्छा स्टूडेंट है।
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