हिंदी सेक्स कहानी पढ़ें: भोपाल में प्रिया की चूत में राहुल का लंड, पूरी रात की चुदाई
दरवाजा खुलते ही राहुल अंदर आया, हाथ में एक किताब थी, चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। और प्रिया ने जैसे ही उसे देखा। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा, क्योंकि यह वही रात थी जिसका वह चुपचाप इंतजार कर रही थी, और यह हिंदी सेक्स कहानी पढ़ें वाली मुलाकात अब सिर्फ किताब की बात नहीं रहने वाली थी।
भोपाल के उस छोटे से फ्लैट में रात गहरा रही थी, बाहर सड़क की आवाजें धीमी पड़ गई थीं, अंदर हल्की रोशनी जल रही थी, प्रिया ने नीली सलवार कमीज पहनी थी। उसके बाल खुले थे। और राहुल, तीस साल का मजबूत कद काठी वाला युवक, उसे ऐसे देख रहा था जैसे वह किताब भूलकर सिर्फ उसे ही पढ़ना चाहता हो।
राहुल ने किताब मेज पर रखी, धीरे से आगे बढ़ा, प्रिया के सामने खड़ा हो गया, और कहा कि वह कहानी सुनाने आया था। मगर उसकी नजरें प्रिया के होंठों पर टिकी थीं। उसके हाथ कांप रहे थे, और प्रिया ने मुस्कुराकर कहा कि कहानी तो बाद में भी सुनी जा सकती है, पहले वह उसके इतने करीब क्यों खड़ा है, यह बता दे।
राहुल ने जवाब में कुछ नहीं कहा, उसने बस प्रिया की कमर पर हाथ रखा, उसे अपनी ओर खींचा, और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, पहले धीरे से। फिर गहराई से। जीभ से जीभ मिलाते हुए, और प्रिया ने भी उसे कसकर पकड़ लिया, उसके बालों में उंगलियां डाल दीं, और उसकी सांसें तेज हो गईं।
चुंबन लंबा होता गया, राहुल के हाथ प्रिया की पीठ पर घूमने लगे, वह उसकी कमीज के ऊपर से ही उसकी कमर, उसके कंधे। उसकी गर्दन को सहलाने लगा। और प्रिया ने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए, एक एक करके, जब तक उसकी छाती खुल नहीं गई, और उसने अपने होंठ उसकी छाती पर रख दिए।
राहुल ने प्रिया को उठाकर सोफे तक ले गया, उसे धीरे से लिटाया, उसके ऊपर झुक गया, और फिर से उसे चूमने लगा, इस बार उसकी गर्दन, उसके कान। उसके गाल। और प्रिया हंसते हुए, सिसकते हुए, उसे और करीब खींच रही थी, उसके पैर उसकी कमर के आसपास लिपट रहे थे, और दोनों के शरीर एक दूसरे से सट रहे थे।
प्रिया ने अपनी कमीज ऊपर उठाई, राहुल ने उसे उतारने में मदद की, फिर उसकी ब्रा का हुक खोला, और जैसे ही उसके स्तन आजाद हुए, राहुल ने उन्हें दोनों हाथों से पकड़ लिया। दबाया। सहलाया, और एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा, धीरे धीरे, फिर तेजी से, और प्रिया की आवाज कमरे में गूंजने लगी।
राहुल ने दूसरे स्तन को भी उसी तरह चूसा, काटा नहीं, सिर्फ प्यार से चूमा, दबाया। और प्रिया ने उसकी पीठ को नाखूनों से खरोंचा। उसके सिर को पकड़ा, और कहा कि और जोर से करो, मुझे पूरा महसूस कराओ, और राहुल ने उसकी बात मानते हुए उसकी सलवार की डोरी खोल दी।
सलवार नीचे सरक गई, प्रिया की पैंटी भीग चुकी थी, राहुल ने उसे धीरे से उतारा, और उसके सामने उसकी चूत गीली, गुलाबी और खुली हुई थी, उसने अपनी उंगलियों से उसे छुआ। सहलाया। अंदर एक उंगली डाली, फिर दूसरी, और प्रिया ने कमर उठाकर, आंखें बंद करके, उसके हाथ की हर हरकत को महसूस किया।
राहुल नीचे झुका, उसने प्रिया की टांगें फैलाईं, अपने मुंह को उसकी चूत पर रखा, जीभ से उसे चाटने लगा, ऊपर से नीचे तक। फिर उसके दाने को जीभ की नोक से छेड़ने लगा। चूसने लगा, और प्रिया चिल्ला उठी, उसकी टांगें कांपने लगीं, और कुछ ही मिनटों में वह पहली बार झड़ गई, उसका शरीर थरथरा उठा।
प्रिया ने राहुल को ऊपर खींचा, उसके पैंट का बटन खोला, जिप नीचे की, और उसका लंड बाहर निकाला, लंबा, मोटा, गर्म और कड़ा। उसने उसे दोनों हाथों से पकड़ा। हिलाया, सहलाया, फिर अपने मुंह में लिया, ऊपर से नीचे तक चूसा, जीभ से उसके सिरे को छेड़ा, और राहुल ने आंखें बंद करके गहरी सांस ली।
प्रिया देर तक उसका लंड चूसती रही, कभी धीरे, कभी तेजी से, कभी गहराई तक लेकर, कभी सिर्फ सिरे को चूमकर। और राहुल ने उसके बाल पकड़ लिए। उसके मुंह की गर्मी को महसूस किया, और कहा कि बस अब और नहीं, वरना वह यहीं झड़ जाएगा, और उसे प्रिया की चूत में ही झड़ना है, पूरी रात।
राहुल ने प्रिया को सोफे पर सीधा लिटाया, उसकी टांगें फैलाईं, अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा, धीरे से धक्का दिया, और लंड अंदर जाने लगा। पहले थोड़ा। फिर पूरा, और प्रिया ने जोर से आह भरी, उसकी चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया, और दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा।
राहुल ने धक्के लगाने शुरू किए, पहले धीरे, फिर तेज, अंदर बाहर, गहराई तक। और प्रिया की चूत से गीली आवाजें आने लगीं। उसके स्तन हर धक्के के साथ हिलने लगे, राहुल ने उन्हें पकड़ लिया, दबाया, और प्रिया ने उसकी कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया, उसे और अंदर खींचा।
कुछ देर बाद राहुल ने प्रिया को पलट दिया, उसे घुटनों के बल किया, पीछे से उसकी कमर पकड़ी, अपना लंड फिर से उसकी चूत में डाला। और पीछे से जोरदार धक्के लगाने लगा। उसके चूतड़ हर धक्के से हिल रहे थे, प्रिया आगे झुककर सोफे को पकड़े थी, और उसकी सिसकियां पूरे फ्लैट में गूंज रही थीं।
राहुल ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा, उसके बाल खींचे, उसके चूतड़ों पर हल्की थपकी दी, और धक्कों की गति बढ़ा दी। प्रिया पीछे की ओर धक्का देकर उसका साथ दे रही थी। दोनों की सांसें तेज थीं, पसीना आ रहा था, और फिर प्रिया दूसरी बार झड़ गई, उसकी चूत ने लंड को कसकर भींच लिया।
राहुल रुका नहीं, उसने प्रिया को बेडरूम तक ले गया, उसे बिस्तर पर लिटाया, एक टांग ऊपर उठाई, खुद साइड से लेट गया, अपना लंड फिर से अंदर किया। और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। साथ ही उसके दाने को उंगलियों से सहलाने लगा, और प्रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया, आंखें बंद करके, होंठ काटते हुए, आनंद लिया।
फिर प्रिया ऊपर आ गई, राहुल के ऊपर बैठ गई, उसकी चूत में उसका लंड पूरी तरह समा गया, वह ऊपर नीचे होने लगी, पहले धीरे। फिर तेजी से। उसके स्तन उछल रहे थे, राहुल ने उन्हें पकड़कर चूसा, उसकी कमर पकड़ी, और नीचे से भी धक्के लगाए, दोनों एक ही लय में हिल रहे थे।
राहुल ने कहा कि वह अब झड़ने वाला है, प्रिया ने कहा कि अंदर ही झड़ो, मेरी चूत में ही अपना पूरा पानी छोड़ दो। और राहुल ने जोर से धक्के लगाए। फिर एक लंबी आह के साथ अपना वीर्य प्रिया की चूत में छोड़ दिया, गर्म धार अंदर तक गई, और प्रिया भी उसी समय तीसरी बार झड़ गई।
दोनों बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर लेट गए, राहुल का लंड अभी भी प्रिया की चूत में था, धीरे धीरे नरम पड़ रहा था। प्रिया ने उसके सीने पर सिर रखा। उसकी धड़कन सुनी, और कहा कि किताब की कहानी तो अभी बाकी है, मगर आज की रात की कहानी उससे कहीं ज्यादा मजेदार हो गई है।
राहुल हंसा, उसने प्रिया को चूमा, उसके कान में कहा कि रात अभी लंबी है, थोड़ी देर आराम के बाद वह उसे फिर से चोदेगा, इस बार बाथरूम में। दीवार से लगाकर। और प्रिया ने शरमाते हुए, हंसते हुए कहा कि वह तैयार है, बस उसे थोड़ा पानी पिला दे, फिर रात फिर से शुरू होगी।
प्रिया उठी, दो गिलास पानी लाई, राहुल ने एक गिलास पिया, दूसरा प्रिया को पिलाया। दोनों ने एक दूसरे को देखा। मुस्कुराए, और राहुल ने उसे फिर से अपनी बाहों में खींच लिया, क्योंकि भोपाल की वह रात अभी खत्म नहीं हुई थी, वह तो बस शुरू हुई थी।
थोड़ी देर आराम के बाद राहुल बाथरूम में गया, उसने प्रिया का हाथ पकड़ा, उसे भी अंदर बुलाया, और शावर के नीचे दोनों खड़े हो गए। गर्म पानी उनके शरीरों पर गिर रहा था, राहुल ने प्रिया को दीवार से लगाया, उसे चूमा, उसके स्तनों को दबाया, और प्रिया ने उसका लंड फिर से पकड़ लिया, उसे हिलाया, उसे कड़ा किया। राहुल ने उसकी एक टांग उठाई, अपना लंड उसकी चूत में डाला, धीरे धीरे धक्के लगाए, और पानी की आवाज के बीच प्रिया की सिसकियां गूंजने लगीं।
बाथरूम से बाहर आकर दोनों ने तौलिया लपेटा, बिस्तर पर आकर लेट गए, और राहुल ने प्रिया के गीले बालों को सहलाया, उसके माथे को चूमा, उसके होंठों को फिर से चूमा। प्रिया ने कहा कि उसे भूख लगी है, राहुल ने कहा कि पहले एक और बार, फिर खाना, और प्रिया हंस पड़ी, उसने कहा कि ठीक है, मगर इस बार वह ऊपर रहेगी, अपनी मर्जी से। वह राहुल के ऊपर बैठ गई, उसकी चूत में लंड लिया, धीरे धीरे हिलने लगी, और राहुल ने नीचे से उसका साथ दिया, उसके चूतड़ों को पकड़कर, उसे ऊपर नीचे करके।
प्रिया की गति बढ़ती गई, उसके स्तन उछलने लगे, राहुल ने उन्हें पकड़ लिया, चूसा, दबाया, और प्रिया ने आंखें बंद करके, सिर पीछे करके, जोर से आह भरी। वह झड़ गई, उसका शरीर कांपा, उसकी चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया, और राहुल ने भी उसी समय अंदर झड़ने की कोशिश को रोका, धक्के धीमे किए, सांस संभाली। प्रिया उसके सीने पर लेट गई, दोनों हंसने लगे, पसीने से तरबतर, थके हुए, मगर खुश, और राहुल ने कहा कि यह रात उसकी जिंदगी की सबसे अच्छी रात है।
कुछ देर बाद दोनों ने कपड़े पहने नहीं, सिर्फ चादर ओढ़ी, रसोई से फल और पानी लाए, बिस्तर पर बैठकर खाया, बातें कीं, हंसे। प्रिया ने पूछा कि किताब की कहानी क्या थी, राहुल ने कहा कि किताब तो बहाना थी, असली कहानी तो आज लिखी गई है, और प्रिया ने तकिया उठाकर उसे मारा, हंसते हुए। राहुल ने उसे फिर से खींचा, चूमा, और कहा कि अगली बार वह पूरी किताब लेकर आएगा, मगर पढ़ेगा सिर्फ उसे, उसके शरीर की हर लाइन को।
रात के आखिरी पहर में राहुल ने प्रिया को फिर से मिशनरी में लिटाया, उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं, अपना लंड धीरे से अंदर किया, और गहरे धक्के लगाने लगा। प्रिया ने उसकी पीठ पकड़ी, उसके हर धक्के पर सिसकी, उसका नाम लिया, और दोनों एक साथ झड़ गए, राहुल का वीर्य उसकी चूत में भर गया, प्रिया का शरीर थरथरा उठा। दोनों एक दूसरे से लिपट गए, आंखें बंद कीं, और प्रिया ने धीरे से कहा कि कल फिर आना, दरवाजा खुला रहेगा।
सुबह होने से पहले राहुल ने प्रिया को आखिरी बार चूमा, उसके बालों को सहलाया, उसके कान में कहा कि वह उसे रोज याद करेगा, और प्रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया, उसे जाने नहीं दिया, थोड़ी देर और रोका। वह मुस्कुराई, उसने कहा कि किताब मेज पर ही रह गई है, अगली बार उसी किताब के साथ आना, और राहुल ने हंसकर कहा कि किताब तो अब उनकी कहानी बन गई है, वह उसे कभी नहीं भूलेगा।
अगली रात प्रिया ने दरवाजा खुद खोला, उसने लाल सूट पहना था, बाल गीले थे, और राहुल को देखते ही मुस्कुरा दी, उसे अंदर खींच लिया। राहुल ने दरवाजा बंद किया, उसे दीवार से लगाया, उसके होंठों को चूमा, उसकी गर्दन को चूमा, और प्रिया ने उसकी शर्ट पकड़कर उसे बेडरूम तक खींचा। बिस्तर पर पहुंचते ही राहुल ने उसका सूट उतारा, उसकी ब्रा खोली, उसके स्तनों को चूमा, दबाया, और प्रिया ने सिसकते हुए कहा कि आज वह उसे पूरी रात सोने नहीं देगी।
प्रिया ने राहुल के कपड़े उतारे, उसका लंड पकड़ा, उसे मुंह में लिया, धीरे धीरे चूसा, जीभ से छेड़ा, और राहुल ने उसके सिर को पकड़कर, आंखें बंद करके, उसकी गर्मी को महसूस किया। फिर राहुल ने उसे लिटाया, उसकी टांगें फैलाईं, अपना लंड उसकी चूत में डाला, और गहरे धक्के लगाने लगा, पहले धीरे, फिर तेजी से। प्रिया की आवाजें बढ़ती गईं, उसके नाखून राहुल की पीठ पर चलने लगे, और कुछ ही देर में वह झड़ गई, उसका शरीर कांप उठा, उसकी चूत ने लंड को कस लिया।
राहुल रुका नहीं, उसने प्रिया को घुटनों के बल किया, पीछे से उसकी कमर पकड़ी, फिर से अंदर गया, और जोरदार धक्के लगाने लगा, उसके चूतड़ हर धक्के से हिल रहे थे। प्रिया आगे झुककर तकिया पकड़े थी, पीछे धक्का देकर उसका साथ दे रही थी, और दोनों की सांसें तेज हो गईं, पसीना छूटने लगा। राहुल ने उसके बाल खींचे, उसकी पीठ चूमी, धक्कों की गति और बढ़ाई, और प्रिया दूसरी बार झड़ गई, चिल्लाते हुए, उसका नाम लेते हुए।
अंत में प्रिया ऊपर आ गई, राहुल के ऊपर बैठ गई, ऊपर नीचे होने लगी, उसके स्तन उछल रहे थे, राहुल ने उन्हें पकड़ा, चूसा, और नीचे से धक्के लगाए। राहुल ने कहा कि वह झड़ने वाला है, प्रिया ने कहा कि अंदर ही छोड़ दो, और राहुल ने जोर से आह भरकर अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया। दोनों लिपटकर लेट गए, थके हुए, हंसते हुए, और प्रिया ने कहा कि अब यह रातें उनकी आदत बन गई हैं, हर हफ्ते, बिना किसी बहाने के।
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