Hindi Sex Kahani: ट्यूशन वाले लड़के की डायरी
शालिनी ने कभी नहीं सोचा था कि स्टोररूम की धूल भरी अलमारी से निकला एक पुराना रजिस्टर उसकी ज़िंदगी की सबसे गरम hindi sex kahani बन जाएगा। दिवाली की सफाई चल रही थी और वह पुरानी किताबें कबाड़ी को देने के लिए अलग कर रही थी।
रजिस्टर का कवर फटा हुआ था। पहले पन्ने पर टेढ़े मेढ़े अक्षरों में लिखा था, निखिल, क्लास 12, फिज़िक्स ट्यूशन। आठ साल पुरानी बात थी। तब निखिल सत्रह का दुबला पतला लड़का था जो हर शाम उसके घर पढ़ने आता था।
शालिनी मुस्कुराई और पन्ने पलटने लगी। बीच के पन्नों में फॉर्मूले और डायग्राम थे। लेकिन आखिरी पन्ने पर पहुँचकर उसकी उँगलियाँ रुक गईं। वहाँ नीली स्याही से एक दिल बना था और नीचे लिखा था, शालिनी मैम के लिए।
उसके नीचे चार लाइनें थीं। कच्ची उम्र का इश्क़, अधूरी हिम्मत वाली चार लाइनें। शालिनी की साँस थम गई। उसने वो लाइनें दो बार पढ़ीं। सत्रह साल के लड़के ने अपनी ट्यूशन टीचर के लिए जो महसूस किया था, वह आज आठ साल बाद भी कागज़ पर धड़क रहा था।
तभी नीचे से आवाज़ आई, शालिनी जी, आपका कूरियर आया है। नीचे वाला फ्लैट। निखिल की आवाज़ थी। पिछले महीने ही वह नीचे वाले फ्लैट में शिफ्ट हुआ था। छब्बीस साल का निखिल अब एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, लंबा, चौड़े कंधों वाला, हल्की दाढ़ी वाला।
शालिनी ने रजिस्टर जल्दी से तकिये के नीचे छिपाया, जैसे कोई चोरी पकड़ी गई हो। उसका दिल अजीब तरह से धड़क रहा था। उसने दरवाज़ा खोला तो निखिल सामने खड़ा था, हाथ में एक छोटा पार्सल।
आपका पार्सल डिलीवरी वाले ने नीचे दे दिया, निखिल ने कहा और पार्सल बढ़ाया। उसकी नज़र शालिनी के चेहरे पर टिकी थी। आप ठीक हैं? चेहरा लाल हो रहा है।
सफाई की धूल है, शालिनी ने जल्दी से कहा। अंदर आओ, चाय पीकर जाना। यह कहते हुए वह खुद हैरान थी। पहले भी निखिल कई बार ऊपर आया था, लेकिन आज उसकी आवाज़ में कुछ और था।
निखिल अंदर आया और सोफे पर बैठ गया। शालिनी रसोई में चाय बनाने गई। उसके हाथ काँप रहे थे। तकिये के नीचे छिपा रजिस्टर जैसे उसे चिढ़ा रहा था।
चाय लेकर वह बाहर आई तो निखिल उसकी किताबों की अलमारी देख रहा था। आप आज भी उतनी ही किताबें पढ़ती हैं, उसने कहा। कुछ चीज़ें नहीं बदलतीं।
कुछ बदल भी जाती हैं, शालिनी ने कहा और उसकी आँखों में देखा। तुम ही देख लो। सत्रह के निखिल और आज के निखिल में ज़मीन आसमान का फर्क है।
निखिल हँसा। वह हँसी अब लड़कों वाली नहीं थी। गहरी, ठहरी हुई हँसी। अंदर से कुछ चीज़ें नहीं बदलतीं, शालिनी जी। कुछ एहसास वैसे के वैसे रहते हैं।
शालिनी की साँस अटक गई। क्या उसे पता था? क्या उसने जानबूझकर कहा था? उसने चाय का कप उठाया ताकि अपने चेहरे को छिपा सके।
स्टोररूम की सफाई कर रही थीं? निखिल ने पूछा। पुराना सामान निकला होगा। मेरे ट्यूशन के दिन की कोई किताब मिली क्या? माँ कहती है मेरी आधी किताबें यहीं छूट गई थीं।
शालिनी का दिल ज़ोर से धड़का। मिलीं, उसने धीरे से कहा। एक रजिस्टर मिला। तुम्हारा। फिज़िक्स का।
निखिल का चेहरा एक पल के लिए सफेद पड़ा, फिर लाल हो गया। वह रजिस्टर? आपने, आपने उसे खोला?
आखिरी पन्ना देखा, शालिनी ने कहा। उसकी आवाज़ में शरारत थी जो उसे खुद हैरान कर रही थी। निखिल, वह दिल और वह चार लाइनें, किसके लिए थीं?
निखिल चुप रहा। उसके हाथ की मुट्ठी भिंच गई। वह बचपन था, शालिनी जी। बेवकूफी थी। भूल जाइए।
अगर मैं न भूलना चाहूँ तो? शालिनी ने कहा और सोफे पर उसके करीब खिसक आई। दोनों के घुटने टकराए। उस छुअन से जैसे करंट दौड़ गया।
निखिल ने उसकी आँखों में देखा। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। शालिनी जी, आप जानती हैं आप क्या कह रही हैं?
मैं इकतीस की हूँ, निखिल। मुझे पता है मैं क्या कह रही हूँ, शालिनी ने कहा। आठ साल से मैं अकेली हूँ। पति गए हुए पाँच साल हो गए। और आज जब मैंने वह पन्ना पढ़ा, तो मुझे लगा कि किसी ने मुझे इतनी शिद्दत से चाहा था और मुझे पता भी नहीं चला।
पता तो आपको अब चला, निखिल ने कहा। उसकी आवाज़ भारी हो गई थी। और वह एहसास, शालिनी जी, वह आज भी उतना ही ताज़ा है। शायद और गहरा।
उसने शालिनी का हाथ पकड़ लिया। उसका हाथ गरम था। शालिनी ने हाथ नहीं छुड़ाया। दोनों के बीच की हवा जैसे भारी हो गई थी। बाहर शाम ढल रही थी और कमरे में हल्की धूप तिरछी पड़ रही थी।
निखिल, यह गलत है, शालिनी ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में कोई विरोध नहीं था। तुम मेरे स्टूडेंट थे।
था, निखिल ने कहा। अब नहीं हूँ। अब मैं एक मर्द हूँ, शालिनी जी। और आप एक औरत हैं। बस।
उसने धीरे से शालिनी के गाल को छुआ। उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं। शालिनी ने आँखें बंद कर लीं। उस छुअन में आठ साल का इंतज़ार था।
जब निखिल के होंठ उसके होंठों से मिले, तो शालिनी के अंदर जैसे कोई बाँध टूट गया। उसने उसके कॉलर को पकड़कर उसे अपने करीब खींच लिया। चुम्बन में शुरुआत की झिझक थी, फिर भूख आ गई।
निखिल ने उसे सोफे पर लिटा दिया। उसके हाथ शालिनी के कुर्ते के बटनों पर थे। एक एक बटन खुलता गया। शालिनी की साँसें तेज़ होती गईं। उसने निखिल की शर्ट के बटन खोलने में उसकी मदद की।
तुम्हारी छाती पर यह निशान, शालिनी ने उसकी छाती पर बने पुराने निशान को छूते हुए कहा।
क्रिकेट का है। कॉलेज का, निखिल ने कहा और शालिनी के गले पर चूमा। उसकी दाढ़ी की खुरदराहट से शालिनी की रूह काँप गई।
शालिनी ने अपनी ब्रा का हुक खुद खोला। उसके भारी स्तन आज़ाद हो गए। निखिल की आँखों में जो भूख दिखी, उसने शालिनी को मदहोश कर दिया। उसने एक स्तन को मुँह में लिया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा।
आह, शालिनी के मुँह से सिसकारी निकली। निखिल, धीरे, कोई सुन लेगा।
सुनने दो, निखिल ने कहा। आज मैं आठ साल का हिसाब चुकता कर रहा हूँ।
उसने शालिनी की सलवार का नाड़ा खोला। शालिनी ने अपनी कमर उठाकर उसे उतारने में मदद की। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। निखिल ने उसे भी खींचकर उतार दिया।
शालिनी पूरी तरह नंगी सोफे पर लेटी थी। शाम की धूप उसके बदन पर पड़ रही थी। निखिल उसे देखता रह गया। आप कितनी खूबसूरत हैं, शालिनी जी। रजिस्टर वाले दिल से भी ज़्यादा।
अब शालिनी जी मत कहो, शालिनी ने कहा और अपनी टाँगें फैला दीं। सिर्फ शालिनी कहो।
निखिल ने उसकी जाँघों के बीच मुँह रखा। उसकी जीभ ने शालिनी की चूत को छुआ तो शालिनी की कमर उछल पड़ी। उसने निखिल के बाल पकड़ लिए।
उसकी जीभ अंदर बाहर होती रही। शालिनी की सिसकारियाँ बढ़ती गईं। उसका बदन पसीने से भीग गया। निखिल, बस, अब और नहीं सहा जाता। अंदर आओ।
निखिल ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड तना हुआ था, लंबा और मोटा। शालिनी ने उसे हाथ में पकड़ा। गरम और सख्त। उसने उसे अपनी चूत के मुँह पर रगड़ा।
धीरे से, शालिनी ने कहा। बहुत दिनों बाद, समझे।
निखिल ने धीरे से धक्का दिया। लंड का सुपारा अंदर घुसा। शालिनी ने होंठ भींच लिए। फिर एक और धक्का। आधा लंड अंदर था। शालिनी की चूत उसे कसकर पकड़ रही थी।
दर्द हो रहा है? निखिल ने पूछा।
थोड़ा, लेकिन अच्छा लग रहा है, शालिनी ने कहा। रुकना मत। पूरा अंदर करो।
निखिल ने एक ज़ोर का धक्का दिया और पूरा लंड अंदर समा गया। शालिनी चीख पड़ी। उसकी नाखून निखिल की पीठ में धँस गए।
फिर धक्कों की रफ्तार बढ़ी। सोफा दीवार से टकराने लगा। शालिनी की चूत से गीली आवाज़ें आने लगीं। दोनों के पसीने मिल गए।
शालिनी, तुम इतनी टाइट हो, निखिल हाँफते हुए बोला।
और तुम इतने बड़े हो, शालिनी ने कहा। उसकी आँखों में आँसू थे, मज़े के आँसू। और अंदर, निखिल, और अंदर।
निखिल ने उसे गोद में उठाया। शालिनी ने अपनी टाँगें उसकी कमर में लपेट लीं। वह उसे गोद में लिए हुए धक्के देता रहा। इस पोज़ में लंड और गहरा जा रहा था।
शालिनी का बदन अकड़ने लगा। उसका चरम करीब था। निखिल, मैं आने वाली हूँ। रुकना मत।
मैं भी, निखिल ने कहा। साथ में, शालिनी।
दोनों एक साथ झड़े। शालिनी की चूत ने लंड को निचोड़ा और निखिल का पानी उसके अंदर छूट गया। शालिनी की चीख उसके कंधे में दब गई।
कुछ देर दोनों वैसे ही रहे। हाँफते हुए, पसीने में भीगे हुए। फिर निखिल ने उसे सोफे पर लिटाया और बगल में लेट गया।
रजिस्टर वाला लड़का बड़ा हो गया, शालिनी ने उसकी छाती पर सिर रखते हुए कहा।
और उसकी मैम भी, निखिल ने कहा। पहले से ज़्यादा खूबसूरत।
बाहर अँधेरा हो गया था। शालिनी उठी और दोनों के लिए पानी लाई। निखिल अपने कपड़े पहनने लगा।
रजिस्टर, निखिल ने पूछा। वह कहाँ है?
तकिये के नीचे, शालिनी ने शरारत से कहा। चाहो तो ले जाओ। लेकिन आखिरी पन्ना मैं रखूँगी। वह मेरी hindi sex kahani का पहला पन्ना है।
निखिल ने उसे देखा। उसकी आँखों में वादा था। यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई, शालिनी। यह तो शुरुआत है।
उसने शालिनी के माथे पर चूमा। फिर दरवाज़े की ओर बढ़ा। दरवाज़ा खोलते हुए वह रुका और मुड़ा।
कल शाम फिर आऊँगा, उसने कहा। डायरी का अगला पन्ना लिखने। और इस बार पन्ना कोरा नहीं रहेगा।
शालिनी दरवाज़े पर खड़ी उसे जाते देखती रही। उसके होंठों पर मुस्कान थी और बदन में अभी भी उसकी छुअन की गर्मी। वह बेडरूम में गई और शीशे के सामने खड़ी हो गई। शीशे में दिख रही औरत अब वह अकेली विधवा नहीं थी जो सुबह स्टोररूम साफ कर रही थी।
उसने दरवाज़ा बंद किया और तकिये के नीचे से रजिस्टर निकाला। आखिरी पन्ने पर दिल के नीचे उसने अपनी कलम से लिखा, जारी है।
अगली शाम निखिल सच में आया। उसके हाथ में एक नया रजिस्टर था। इस बार आखिरी पन्ना कोरा था, लेकिन पहले पन्ने पर लिखा था, शालिनी के लिए, भाग दो।
शालिनी ने रजिस्टर लिया और उसे सोफे पर खींच लिया। आज कोई चाय नहीं बनेगी, उसने कहा। आज सीधे मुद्दे पर आते हैं।
निखिल हँसा और उसके ब्लाउज़ के बटन खोलने लगा। आज शालिनी ने खुद पहल की थी। उसने निखिल को सोफे पर लिटाया और उसके ऊपर बैठ गई।
आज मैं ऊपर रहूँगी, उसने कहा। आठ साल तुमने इंतज़ार किया, आज मेरी बारी है हुक्म चलाने की।
उसने निखिल की शर्ट उतारी और उसकी छाती पर जीभ फेरी। नीचे बढ़ते हुए उसने उसकी पैंट खोली। उसका लंड पहले से तना हुआ था। शालिनी ने उसे मुँह में लिया।
निखिल की सिसकारी निकली। शालिनी, धीरे, मैं अभी झड़ जाऊँगा।
तो झड़ जाओ, शालिनी ने शरारत से कहा। लेकिन निखिल ने उसे रोककर अपने ऊपर खींच लिया। अभी नहीं। पहले तुम।
शालिनी ने अपनी साड़ी ऊपर की और गीली चूत को उसके लंड पर रखा। धीरे धीरे वह नीचे बैठती गई। पूरा लंड अंदर समा गया। उसने अपनी कमर हिलानी शुरू की।
कमरे में सिर्फ उनकी साँसों और गीली आवाज़ों का शोर था। शालिनी की रफ्तार बढ़ती गई। उसके स्तन उछल रहे थे। निखिल ने उन्हें हाथों में पकड़ लिया।
मैं आ रही हूँ, शालिनी चीखी। उसका बदन काँपा और वह निखिल की छाती पर गिर पड़ी। निखिल ने उसे कसकर पकड़ा और नीचे से ज़ोर के धक्के दिए।
उसका पानी भी छूट गया। दोनों पसीने में भीगे एक दूसरे से लिपटे रहे। शालिनी ने रजिस्टर उठाया और आखिरी पन्ने पर लिखा, भाग दो, पूरा हुआ।
निखिल ने उसके माथे को चूमा। कल भाग तीन, उसने कहा। शालिनी हँस पड़ी। इस डायरी का कोई आखिरी पन्ना नहीं होगा।
रात को सोने से पहले शालिनी ने रजिस्टर को अपने तकिये के पास रखा। आठ साल तक वह कागज़ अलमारी में धूल खाता रहा था। अब वह उसकी सबसे कीमती चीज़ बन गया था।
Readers who enjoyed “Hindi Sex Kahani: ट्यूशन वाले लड़के की डायरी” also read
8 curated storiesहाईवे के ढाबे पर एक रात
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर आधी रात को ट्रक ड्राइवर सूरज रानी के ढाबे पर रुकता है। खाने की खुशबू, बातचीत और एक ऐसी रात, जो दोनों कभी नहीं भूलेंगे।
गर्मी की दोपहर भाभी के साथ अकेला घर जब साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था और जो हुआ दोपहर की गर्मी से भी ज्यादा गर्म था
घर में कोई नहीं था। भाभी रसोई में काम कर रही थीं। साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था। फिर जो हुआ वो दोपहर की गर्मी से भी ज्यादा गर्म था।
गर्मी की रात प्रिया की गीली प्यास जब पंखे की आवाज़ में दबी चीखें और साड़ी कमर तक उठी हुई थी
पंखे की आवाज़ में दबी चीखें। प्रिया की साड़ी पहले ही कमर तक उठी हुई थी और रोहन उसके अंदर बेतहाशा धक्के मार रहा था।
रात भर की प्यास रिया की बेकाबू हवस जब उसने ब्रा उतारी तो लंड पहले से तंबू बना चुका था और दोनों ने एक-दूसरे को पूरी तरह चखा
रिया ने ब्रा उतारी तो आरव का लंड पहले से ही तंबू बना चुका था। रात भर चली वो कामुक लड़ाई, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे को पूरी तरह चखा।
हिंदी स्टोरी सेक्सी वाली: जयपुर की छत से बेड तक ऋतु की चुदाई
हिंदी स्टोरी सेक्सी वाली: जयपुर की छत पर होली की पुरानी याद और आज की रात की कहानी। ऋतु और कबिर की धड़कनें, पुरानी शरारत और नई हिम्मत।
बेस्ट हिंदी सेक्स कहानी: नागपुर की राधा और भूली हुई स्केचबुक
बेस्ट हिंदी सेक्स कहानी में नागपुर की राधा को बालकनी में एक भूली हुई स्केचबुक मिलती है, जिसमें उसकी ही तस्वीरें बनी हैं।
हिंदी रोमांटिक सेक्स कहानी: उदयपुर में काव्या और कबीर की सालगिरह वाली रात
उदयपुर की झील के किनारे सालगिरह मनाने पहुंची काव्या के लिए कबीर ने एक सरप्राइज शाम सजाई है। यह हिंदी रोमांटिक सेक्स कहानी धीमी शुरुआत से एक यादगार रात तक जाती है, जहां हर पल में प्यार और चाहत है।
भाई बहन की छुपी हुई चुदाई कहानी: बहन की चूत में भाई का लंड, दिल्ली घर की पहली रात
भाई बहन की छुपी हुई चुदाई कहानी में दिल्ली के घर की एक रात, जब माता पिता शादी में गए थे और दो दिलों के बीच छुपा एहसास सामने आया।