भाभी की हिंदी कहानी: देवर अमन ने भाभी कविता की चूत में लंड डालकर रात भर चोदा
कविता ने रसोई के दरवाजे पर खड़े अमन को देखते ही हँसकर कहा, अरे देवर जी, इतनी रात को पानी पीने आए हो या मुझे देखने आए हो। अमन ने गिलास उठाते हुए जवाब दिया, भाभी, पानी तो बहाना है, असली प्यास तो आपकी हँसी देखकर लगती है। कविता की आँखों में शरारत चमक उठी और उसने चाय का भगौना उठाते हुए कहा, तो फिर बैठो, एक कप चाय पी लो, रात लंबी है। उसी रात से यह भाभी की हिंदी कहानी शुरू हुई।
अमन कुर्सी पर बैठ गया और कविता उसके सामने खड़ी होकर चाय छानने लगी। उसकी साड़ी का पल्लू हल्का सा सरक गया था और अमन की नजर बार बार उसी तरफ जा रही थी। कविता ने यह देखकर भी अनदेखा करने का नाटक किया, लेकिन उसके होंठों पर मुस्कान साफ थी। उसने चाय का कप अमन की ओर बढ़ाया और उँगलियों से उसकी उँगलियों को जानबूझकर छू लिया।
अमन ने कप पकड़ते हुए धीरे से कहा, भाभी, भैया तो शहर से बाहर हैं, आप अकेले रात कैसे काटती हैं। कविता ने आँखें झुकाकर कहा, अकेलेपन की आदत हो गई है, लेकिन आज तुम हो तो मन हल्का लग रहा है। अमन ने उसकी ओर झुककर कहा, तो आज अकेलापन दूर कर देते हैं, बस आप मना मत करना। कविता हँसी और बोली, देवर जी, बातों से तो तुम बड़े तेज हो, देखते हैं हिम्मत कितनी है।
चाय खत्म होते ही कविता बर्तन उठाने लगी और अमन पीछे से आकर उसके करीब खड़ा हो गया। उसकी साँसें कविता की गर्दन पर महसूस हो रही थीं और कविता का शरीर हल्का सा काँप गया। अमन ने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, भाभी, आपकी खुशबू मुझे पागल कर रही है। कविता ने पलटकर उसकी आँखों में देखा और बोली, अमन, यह गलत है, लेकिन मन तो यही चाहता है।
अमन ने कविता को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो कविता ने हल्का सा विरोध किया, फिर उसने भी अमन के होंठों को चूसना शुरू कर दिया। दोनों की जीभें आपस में उलझ गईं और चुम्बन गहरा होता चला गया। कविता के हाथ अमन की पीठ पर कस गए और अमन के हाथ उसकी कमर पर जम गए।
चुम्बन टूटते ही अमन ने कविता की साड़ी का पल्लू धीरे से नीचे सरका दिया। कविता का ब्लाउज उसके भरे हुए सीने को उभार रहा था और अमन की आँखें वहीं टिक गईं। उसने ब्लाउज के ऊपर से ही कविता के स्तनों को दबाना शुरू किया और कविता के मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली। कविता बोली, अमन, धीरे करो, मुझे भी महसूस करने दो।
अमन ने कविता को गोद में उठाकर कमरे की ओर ले जाना चाहा, लेकिन कविता ने उसे रसोई की स्लैब के पास ही रोक लिया। उसने कहा, यहीं से शुरू करते हैं, बिस्तर तक का इंतजार मुझसे नहीं होगा। अमन ने उसे स्लैब पर बिठाया और उसकी साड़ी को ऊपर सरकाकर उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। कविता की जाँघें चिकनी और गरम थीं और अमन की उँगलियाँ धीरे धीरे ऊपर बढ़ रही थीं।
कविता ने अमन का कुर्ता पकड़कर ऊपर उठाया और उसकी छाती पर अपने होंठ रख दिए। उसने अमन के सीने को चूमा, उसकी निप्पल को जीभ से छुआ और अमन ने उसके बालों में हाथ डालकर उसे और करीब खींच लिया। अमन की साँसें तेज हो गई थीं और उसका लंड पजामे में तनकर साफ नजर आ रहा था। कविता ने उस उभार पर हाथ रखा और दबाकर बोली, देवर जी, यह तो पहले से ही तैयार है।
अमन ने कविता के ब्लाउज के बटन एक एक करके खोल दिए और उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से चूमने लगा। फिर उसने ब्रा को भी नीचे सरका दिया और कविता के नंगे स्तनों को अपने मुँह में भर लिया। वह एक स्तन को चूस रहा था और दूसरे को हाथ से दबा रहा था। कविता ने अपनी गर्दन पीछे झुकाई और कहा, अमन, और जोर से चूसो, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
कविता की सिसकारियाँ रसोई में गूँजने लगीं और अमन का जोश और बढ़ गया। उसने कविता की साड़ी और पेटीकोट को पूरी तरह ऊपर कर दिया और उसकी पैंटी पर हाथ रखा। पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी और कविता की चूत की गरमी अमन की उँगलियों को महसूस हो रही थी। अमन ने पैंटी को एक तरफ सरकाया और अपनी उँगली को कविता की चूत पर रगड़ने लगा।
कविता ने अपनी टाँगें और फैला दीं और कहा, अमन, उँगली अंदर डालो, मुझे अंदर से भी छूओ। अमन ने धीरे से एक उँगली उसकी चूत में डाली और कविता ने कसकर उसकी बाँह पकड़ ली। फिर उसने दूसरी उँगली भी डाल दी और अंदर बाहर करने लगा। कविता की चूत से पानी बहने लगा और उसकी सिसकारी तेज हो गई। वह बोली, हाँ, ऐसे ही, और तेज करो।
अमन ने उँगलियों की रफ्तार बढ़ा दी और अपने अँगूठे से कविता के दाने को रगड़ने लगा। कविता का शरीर काँपने लगा और कुछ ही पलों में वह झड़ गई। उसका पानी अमन के हाथ पर बह गया और कविता ने लंबी साँस लेकर कहा, अमन, तुमने तो मुझे पहली बार में ही पागल कर दिया। अमन ने मुस्कुराकर कहा, भाभी, यह तो सिर्फ शुरुआत है, असली रात अभी बाकी है।
कविता स्लैब से नीचे उतरी और अमन के पजामे का नाड़ा खोल दिया। उसका मोटा लंबा लंड बाहर आते ही कविता ने उसे हाथ में पकड़ लिया और ऊपर नीचे करने लगी। वह बोली, देवर जी, तुम्हारा लंड तो भैया से भी बड़ा और मोटा है। अमन ने कहा, भाभी, अब यह तुम्हारा है, जितना चाहो उतना इस्तेमाल करो। कविता ने लंड के सुपारे को चूम लिया और फिर उसे अपने मुँह में भर लिया।
कविता अमन का लंड चूसने लगी, पहले धीरे धीरे और फिर तेज रफ्तार से। उसकी जीभ लंड के चारों ओर घूम रही थी और अमन के मुँह से आह निकल रही थी। अमन ने उसके बाल पकड़कर अपने लंड को और अंदर धकेला और कविता ने गले तक लेकर चूसना जारी रखा। कुछ देर बाद अमन ने उसे रोकते हुए कहा, भाभी, अब रुक जाओ, वरना मैं यहीं झड़ जाऊँगा।
कविता हँसते हुए बोली, झड़ना है तो मेरी चूत में झड़ना, मुँह में नहीं। अमन ने उसे फिर से स्लैब पर बिठाया और अपनी टाँगों के बीच खड़ा हो गया। उसने अपने लंड के सुपारे को कविता की गीली चूत पर रगड़ा और कविता ने अपनी टाँगें उसकी कमर से लपेट लीं। कविता बोली, अमन, अब देर मत करो, अंदर डालो, मैं कब से तड़प रही हूँ।
अमन ने एक धक्के में अपना आधा लंड कविता की चूत में डाल दिया और कविता के मुँह से तेज सिसकारी निकली। उसने कहा, आह, धीरे, थोड़ा धीरे, बहुत मोटा है। अमन ने रुककर उसे चूमा और फिर धीरे धीरे पूरा लंड अंदर उतार दिया। कविता की चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया और दोनों की साँसें एक हो गईं। अमन ने धक्के मारने शुरू किए, पहले धीरे और फिर तेज।
कविता ने अमन की पीठ को नाखूनों से खरोंचा और कहा, हाँ अमन, ऐसे ही चोदो, और तेज चोदो। अमन की रफ्तार बढ़ती गई और स्लैब पर बर्तन हिलने लगे। कविता के स्तन हर धक्के के साथ हिल रहे थे और अमन ने एक स्तन को मुँह में लेकर चूसते हुए धक्के जारी रखे। कविता बोली, देवर जी, तुम्हारी चुदाई में वह मजा है जो मुझे सालों से नहीं मिला।
कुछ देर बाद अमन ने कविता को गोद में उठाया और कमरे में ले गया। उसने उसे बिस्तर पर पीठ के बल लिटाया और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया। इस पोजीशन में उसका लंड कविता की चूत में और गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर कविता की चूत से गीली आवाज आ रही थी और कविता चिल्ला रही थी, हाँ, और अंदर, और गहरा।
अमन ने रफ्तार और बढ़ा दी और कविता दूसरी बार झड़ने के करीब पहुँच गई। उसका शरीर अकड़ गया, उसकी आँखें बंद हो गईं और वह तेज आवाज में चिल्लाई, अमन, मैं झड़ रही हूँ, रुकना मत। अमन ने धक्के जारी रखे और कविता का पानी बहकर बिस्तर पर फैल गया। कविता ने उसे कसकर गले लगा लिया और कहा, तुमने मुझे आज पूरी तरह खुश कर दिया।
थोड़ा आराम करने के बाद कविता ने अमन को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर बैठ गई। उसने अपने हाथ से अमन के लंड को पकड़कर अपनी चूत में डाला और धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी। अमन ने उसके स्तनों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और नीचे से भी धक्के मारने लगा। कविता की कमर लय में हिल रही थी और उसकी सिसकारियाँ कमरे में फैल रही थीं।
कविता ऊपर से चुदते हुए बोली, अमन, तुम्हारे ऊपर बैठकर चुदवाना मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। अमन ने मुस्कुराकर कहा, भाभी, तुम ऊपर से और भी खूबसूरत लगती हो। कविता ने रफ्तार बढ़ा दी और उसके स्तन अमन के चेहरे के पास झूलने लगे। अमन ने एक स्तन को मुँह में भर लिया और चूसते हुए नीचे से तेज धक्के मारे।
कुछ देर इस पोजीशन में चुदने के बाद अमन ने कविता को पलटकर घोड़ी बना दिया। वह उसके पीछे खड़ा हुआ और अपने लंड को उसकी चूत में पीछे से डाल दिया। कविता ने तकिया पकड़ लिया और कहा, हाँ, पीछे से चोदो, मुझे यही पोजीशन सबसे ज्यादा पसंद है। अमन ने उसकी कमर पकड़कर तेज धक्के मारने शुरू किए और हर धक्के पर कविता के चूतड़ हिल रहे थे।
अमन ने एक हाथ से कविता के बाल पकड़े और दूसरे हाथ से उसके स्तन को दबाते हुए चोदता रहा। कविता की आवाज तेज हो गई थी और वह बार बार कह रही थी, और तेज, और तेज, मुझे पूरा चोदो। अमन की रफ्तार चरम पर थी और उसका लंड कविता की चूत में पूरी गहराई तक जा रहा था। कविता तीसरी बार झड़ने लगी और उसका शरीर थरथरा गया।
कविता के झड़ते ही अमन ने भी अपनी रफ्तार और बढ़ा दी क्योंकि वह भी झड़ने के करीब था। उसने कहा, भाभी, मैं भी झड़ने वाला हूँ, कहाँ झड़ूँ। कविता ने पीछे मुड़कर कहा, मेरी चूत में ही झड़ो, मुझे तुम्हारा पानी अंदर चाहिए। अमन ने कुछ तेज धक्के मारे और फिर अपना सारा पानी कविता की चूत में छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े।
कुछ देर तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे और कविता ने अमन के माथे को चूम लिया। उसने कहा, अमन, आज की रात मैं कभी नहीं भूलूँगी, तुमने मुझे वह खुशी दी जिसकी मुझे जरूरत थी। अमन ने कहा, भाभी, जब तक भैया बाहर हैं, हर रात ऐसी ही होगी। कविता हँसी और बोली, देवर जी, अब तो हर रात तुम्हारी ही है।
आधी रात के बाद कविता ने फिर से अमन को छेड़ना शुरू कर दिया। उसने उसके लंड पर हाथ फेरा और कहा, अभी तो रात बाकी है, एक बार फिर से करो। अमन का लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने कविता को अपनी बाँहों में भर लिया। इस बार उसने कविता को बिस्तर के किनारे पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाकर फिर से उसकी चूत में लंड डाल दिया।
दूसरी बार की चुदाई और भी लंबी और गहरी थी। अमन धीरे धीरे धक्के मार रहा था और बीच बीच में कविता के होंठों को चूम रहा था। कविता ने उसके कानों में कहा, अमन, धीरे धीरे चोदो, इस बार मजा लंबा चाहिए। अमन ने उसकी बात मानी और हर धक्के को गहरा और लंबा कर दिया। कविता की चूत से पानी बह रहा था और दोनों पसीने में भीग गए थे।
जब सुबह होने को आई, तब अमन ने आखिरी बार तेज धक्के मारे और कविता फिर से झड़ गई। उसने कहा, अमन, बस, अब मुझसे और नहीं होगा, तुमने मुझे पूरी तरह थका दिया। अमन ने मुस्कुराकर अपना पानी भी उसकी चूत में छोड़ दिया और दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए। कविता ने सोने से पहले उसके कान में कहा, देवर जी, कल रात फिर से यही होगा।
अगली रात कविता ने जानबूझकर दरवाजा खुला छोड़ दिया और बिस्तर पर पतली सी नाइटी में लेट गई। अमन कमरे में आते ही रुक गया और बोला, भाभी, आज तो तुमने पहले से ही तैयारी कर रखी है। कविता ने मुस्कुराकर कहा, देवर जी, कल रात का मजा अभी तक याद है, आज फिर से वही चाहिए। अमन ने दरवाजा बंद किया और बिस्तर पर उसके पास बैठ गया।
उसने कविता की नाइटी की डोरी धीरे से खोल दी और उसके स्तनों को हाथों में भर लिया। कविता ने आँखें बंद करके कहा, अमन, धीरे धीरे चूमो, आज जल्दी नहीं है। अमन ने उसके स्तनों को चूमा, निप्पल को जीभ से छुआ और फिर नीचे की ओर बढ़ गया। उसने कविता की नाइटी ऊपर सरकाई और उसकी जाँघों पर होंठ रख दिए।
कविता की चूत पहले से गीली थी और अमन ने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। वह धीरे धीरे चाट रहा था और बीच बीच में दाने को चूस रहा था। कविता ने उसके बाल पकड़ लिए और कहा, हाँ अमन, ऐसे ही चाटो, मुझे तुम्हारी जीभ बहुत पसंद है। कुछ ही देर में कविता का शरीर काँपने लगा और वह झड़ गई।
कविता ने अमन को ऊपर खींचा और कहा, अब देर मत करो, अपना लंड मेरी चूत में डालो। अमन ने अपनी टाँगों के बीच जगह बनाई और एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर उतार दिया। कविता चिल्लाई, आह, इतना गहरा, ऐसे ही चोदो। अमन ने धक्के मारने शुरू किए और हर धक्के पर कविता के स्तन हिल रहे थे।
इस बार अमन ने कविता की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और भी गहराई तक धक्के मारे। कविता ने कहा, अमन, तुम्हारा लंड मेरी चूत में पूरा समा रहा है, मुझे यही चाहिए था। अमन की रफ्तार तेज होती गई और कविता फिर से झड़ने के करीब पहुँच गई। उसने अमन को कसकर पकड़ा और कहा, रुकना मत, मैं फिर से झड़ रही हूँ।
कविता के झड़ते ही अमन ने भी तेज धक्के मारे और अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए एक दूसरे से लिपट गए और कविता ने कहा, देवर जी, तुम हर रात मुझे ऐसे ही खुश करते रहो। अमन ने उसके माथे को चूमकर कहा, भाभी, यह वादा रहा, हर रात तुम्हारी ही होगी।
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