सविता भाभी की कहानी: भाभी की चूत की पहली चुदाई
सविता भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने फ्लैट के अंदर खींच लिया। उनका पल्लू कंधे से सरक चुका था और उनकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जिसे मैं पहले कभी नहीं देख पाया था। यही वो शाम थी जहाँ से सविता भाभी की कहानी मेरी अपनी कहानी बन गई। उन्होंने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ मुड़कर मुस्कुराईं।
मैं बस उनकी किचन की टूटी शेल्फ ठीक करने आया था। उन्होंने कहा था कि ऊपर वाला डिब्बा उतारना है और एक पेच कसना है। मगर जैसे ही मैं स्टूल पर चढ़ा, उन्होंने नीचे से स्टूल पकड़ लिया और मेरी टाँगों के पास खड़ी हो गईं। उनकी साँसें मेरी पिंडलियों से टकरा रही थीं। मैं नीचे उतरा तो हम दोनों आमने सामने थे।
भाभी, ये डिब्बा बहुत भारी है, मैंने कहा। उन्होंने हँसकर कहा कि भारी तो बहुत कुछ है, पर तुम तो मजबूत हो। उनकी उँगलियाँ मेरी बाँह पर फिसल गईं। मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू जानबूझकर और नीचे सरका दिया। उनका ब्लाउज टाइट था और उनकी छातियों की गोलाई साफ दिख रही थी।
पति बाहर गए हुए हैं, उन्होंने धीरे से कहा। तीन दिन से घर में अकेली हूँ। तुम रोज सामने वाले फ्लैट में रहते हो, पर कभी अंदर आकर बैठते ही नहीं। मैंने कहा कि आज आ गया हूँ ना। उन्होंने मेरे गाल पर उँगली फेरी और कहा कि आज तो रुकना ही पड़ेगा। उनकी आवाज में शरारत थी और जिस्म में बेचैनी।
मैंने उनकी कमर पर हाथ रखा। उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। उल्टा उन्होंने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए और धीरे से काट लिया। मेरी साँसें तेज हो गईं। मैंने उनकी साड़ी की गाँठ खोलने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा कि जल्दी मत करो। पहले मुझे ठीक से देखो।
उन्होंने धीरे धीरे अपनी साड़ी उतारनी शुरू की। साड़ी फर्श पर गिर गई और वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थीं। उनकी कमर गोरी थी और पेट पर हल्की सी चर्बी थी जो उन्हें और भी आकर्षक बना रही थी। मैंने उनकी नाभि पर उँगली घुमाई तो वो सिहर गईं।
रोहन, तुम जानते हो मैं कितने दिन से तरस रही हूँ, उन्होंने कहा। पति महीनों से ठीक से पास नहीं आते। फोन पर ही बिजी रहते हैं। मैं रोज रात को अकेली बिस्तर पर करवटें बदलती हूँ। आज तुम आ गए तो मन किया कि सब कुछ कह दूँ। मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया।
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले धीमा चुम्बन था, फिर गहरा होता गया। उनकी जीभ मेरी जीभ से टकराई और हम दोनों एक दूसरे को चूसने लगे। उनके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मेरे हाथ उनकी कमर से नीचे उनकी गांड तक पहुँच गए। मैंने उनकी गांड को दबाया तो उन्होंने आह भरी।
उन्होंने मेरा कुर्ता ऊपर उठाया और मेरी छाती पर हाथ फेरा। मेरी छाती के बालों में उनकी उँगलियाँ उलझ गईं। उन्होंने मेरी निप्पल को उँगलियों से मसल दिया। मैं भी उनका ब्लाउज खोलने लगा। हुक एक एक करके खुलते गए और उनका ब्लाउज भी फर्श पर गिर गया।
अब वो सिर्फ ब्रा में थीं। काले रंग की ब्रा में उनकी बड़ी बड़ी छातियाँ कसी हुई थीं। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी छातियों को दबाया और चूमा। उन्होंने अपना सिर पीछे झुका दिया। मैंने ब्रा का हुक खोला और उनकी नंगी छातियाँ मेरे सामने आ गईं। उनके निप्पल कड़े और गुलाबी थे।
मैंने एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। दूसरे को हाथ से मसलने लगा। सविता भाभी की आँखें बंद हो गईं और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। आह रोहन, ऐसे ही, और जोर से, वो बोलीं। मैंने उनकी छाती पर दाँतों से हल्का काटा तो वो काँप गईं।
उन्होंने मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ लिया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था और पैंट में तना हुआ था। उन्होंने उसे ऊपर से ही सहलाया और कहा कि इतना बड़ा है। मैंने उनकी पेटीकोट की डोरी खींच दी। पेटीकोट नीचे सरक गया और वो सिर्फ पैंटी में रह गईं।
मैंने उन्हें उठाकर सोफे पर बिठा दिया। उनकी टाँगें फैल गईं और उनकी पैंटी मेरे सामने थी। पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाया। वो गीली और गर्म थी। उन्होंने अपनी टाँगें और फैला दीं और कहा कि अब और मत तड़पाओ।
मैंने उनकी पैंटी एक तरफ सरकाई और अपनी उँगली उनकी चूत में डाल दी। उनकी चूत बहुत गीली थी और अंदर से गर्म थी। मैंने उँगली अंदर बाहर की तो उनकी कमर उठने लगी। उनकी साँसें तेज हो गईं और उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। मैंने दूसरी उँगली भी डाल दी।
दो उँगलियों से उनकी चूत को चोदते हुए मैंने उनके क्लिट को अँगूठे से रगड़ा। वो चीख पड़ीं। रोहन, बस यही चाहिए था, वो बोलीं। उनका पानी निकलने लगा और मेरी उँगलियाँ पूरी गीली हो गईं। उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा कि अब मुँह से भी चाटो।
मैं सोफे के सामने घुटनों पर बैठ गया और उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। उनकी चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था। मैंने उनकी चूत के होंठों को चूसा और जीभ अंदर तक डाल दी। वो पागलों की तरह सिसक रही थीं।
उनके हाथ मेरे सिर पर थे और वो मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थीं। मैंने उनकी चूत को चाटते हुए उनके क्लिट को चूसा तो उनकी कमर जोर से उठी। उनका पहला झड़ना सोफे पर ही हो गया। उनका पानी मेरे मुँह पर लग गया और उन्होंने जोर से आह भरी।
झड़ने के बाद भी वो शांत नहीं हुईं। उन्होंने मुझे ऊपर खींचा और मेरे होंठ चूम लिए। मेरे मुँह पर उनकी चूत का पानी लगा था और उन्होंने उसे भी चाट लिया। फिर उन्होंने मेरी पैंट का बटन खोला और मेरी पैंट नीचे कर दी। मेरा लंड बाहर आ गया।
मेरा लंड लंबा और मोटा था और नसें उभरी हुई थीं। सविता भाभी ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगीं। उन्होंने उसके टोपे पर जीभ फेरी और फिर पूरा लंड मुँह में ले लिया। वो मेरे लंड को चूस रही थीं और उनकी जीभ मेरे लंड के चारों तरफ घूम रही थी।
मैंने उनके बाल पकड़ लिए और धीरे धीरे उनके मुँह में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। उनकी आँखों में पानी आ गया पर वो रुकी नहीं। वो मेरे लंड को गले तक ले जा रही थीं और चूस रही थीं। मेरे मुँह से आह निकल गई। उन्होंने मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा।
थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड मुँह से निकाला और कहा कि अब बिस्तर पर चलो। हम दोनों नंगे ही बेडरूम की तरफ गए। रास्ते में भी हम चूमते रहे। बिस्तर पर पहुँचते ही उन्होंने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ गईं।
उन्होंने अपनी चूत को मेरे लंड पर रखा और धीरे धीरे नीचे बैठने लगीं। मेरा लंड उनकी गीली चूत में घुसने लगा। उनकी चूत टाइट थी और मेरा लंड अंदर जाते हुए उन्हें दर्द और मजा दोनों दे रहा था। उन्होंने आँखें बंद करके एक लंबी साँस ली।
जब मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया तो उन्होंने अपनी कमर हिलानी शुरू की। ऊपर नीचे, आगे पीछे। उनकी छातियाँ उछल रही थीं और मैं नीचे से उनकी छातियों को पकड़कर दबा रहा था। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
मैंने नीचे से धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के के साथ उनकी चूत से फच फच की आवाज आ रही थी। वो जोर जोर से सिसक रही थीं। हाँ रोहन, और जोर से चोदो, वो चिल्लाईं। मैंने उनकी कमर पकड़कर और तेज धक्के लगाए।
थोड़ी देर बाद मैंने पोजीशन बदली। मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। इस पोजीशन में मेरा लंड उनकी चूत में और गहरा जा रहा था। हर धक्का उनकी बच्चेदानी तक महसूस हो रहा था। उन्होंने बिस्तर की चादर पकड़ ली।
मैंने तेज तेज धक्के लगाए और उनकी चूत को पूरी तरह चोदने लगा। उनकी आँखें बंद थीं और मुँह खुला था। उनके मुँह से लगातार आह आह निकल रहा था। उनकी चूत का पानी बिस्तर पर फैलने लगा। उन्होंने अपनी टाँगों से मेरी कमर को कस लिया।
उनका दूसरा झड़ना बहुत जोरदार था। उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया और उनका पूरा जिस्म काँपने लगा। उन्होंने मेरे कंधों को नाखूनों से खरोंच दिया। मैंने भी धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी क्योंकि मेरा भी निकलने वाला था।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनकी छातियों पर अपना पानी निकाल दिया। मेरा वीर्य उनकी छातियों और पेट पर फैल गया। वो हाँफ रही थीं और मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने अपने हाथ से मेरे वीर्य को अपनी छाती पर फैलाया और कहा कि कितना गर्म है।
थोड़ी देर आराम के बाद उन्होंने फिर मेरे लंड को सहलाना शुरू किया। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि एक बार से मन नहीं भरेगा। मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। वो बिस्तर पर घुटनों और हाथों के बल हो गईं और उनकी गांड मेरे सामने थी।
मैंने पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। इस पोजीशन में उनकी चूत और भी टाइट लग रही थी। मैंने उनकी कमर पकड़कर धक्के लगाए। उनकी गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी। मैंने उनकी गांड पर हाथ मारा तो वो और उत्तेजित हो गईं।
मैंने उनकी गांड को दबाते हुए तेज धक्के लगाए। वो आगे पीछे हो रही थीं और बिस्तर हिल रहा था। उनकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। उन्होंने पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा और कहा कि ऐसे ही चोदते रहो।
इस बार मैंने उनकी गांड के छेद पर भी उँगली घुमाई। वो सिहर गईं पर उन्होंने मना नहीं किया। मैंने उनकी चूत को चोदते हुए उनकी गांड को सहलाया। उनका तीसरा झड़ना इसी पोजीशन में हुआ। उनकी चूत से पानी बहने लगा।
मैंने भी इस बार उनकी चूत के अंदर ही अपना पानी निकाल दिया। मेरा लंड उनकी चूत में ही झड़ गया और वीर्य अंदर भर गया। उन्होंने महसूस किया और कहा कि अंदर ही अच्छा लगता है। हम दोनों पसीने में भीगे हुए बिस्तर पर गिर गए।
रात गहरी हो चुकी थी। खिड़की से दिल्ली की बत्तियाँ दिख रही थीं। सविता भाभी ने मेरे माथे को चूमा और कहा कि तुमने आज मुझे फिर से औरत होने का एहसास दिलाया। मैंने उनकी छाती पर हाथ रखा और कहा कि ये एहसास हर रात दिलाऊँगा।
थोड़ी देर बाद वो फिर मेरे पास आ गईं और मेरे लंड को हाथ में लेकर बोलीं कि एक बार और हो जाए। मैंने उन्हें दीवार से लगा दिया और उनकी एक टाँग उठाकर फिर से उनकी चूत में लंड डाल दिया। खड़े खड़े ही हम फिर चुदाई करने लगे।
दीवार के सहारे उनकी चूत को चोदते हुए मैंने उनके होंठ चूमे। उनकी छातियाँ दीवार और मेरी छाती के बीच दब रही थीं। हर धक्के के साथ वो आह भर रही थीं। पड़ोस के फ्लैट की आवाजों से हमें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
आखिरी बार झड़ने के बाद हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। सविता भाभी ने मुझे कसकर गले लगा लिया। उन्होंने कहा कि अब तुम रोज आओगे ना। मैंने कहा कि तुम्हारी चूत की आदत लग गई है, अब रोज आना ही पड़ेगा। वो मेरे सीने पर हँसते हुए सो गईं।
सुबह छह बजे मेरी आँख खुली तो सविता भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर सो रही थीं। उनकी साँसें धीमी थीं और उनकी एक टाँग मेरी टाँग पर थी। मैंने धीरे से उनके बालों को सहलाया तो उन्होंने आँखें खोलीं और मुस्कुरा दीं। उन्होंने कहा कि रात भर में इतना मजा आया कि अब सुबह भी वैसी ही चाहिए।
उन्होंने चादर हटाई और मेरे ऊपर आ गईं। उनकी नंगी छातियाँ मेरी छाती से टकरा गईं। उन्होंने मेरे होंठ चूमे और फिर नीचे की तरफ सरकने लगीं। उन्होंने मेरी छाती को चूमा, मेरे पेट को चूमा और फिर मेरे लंड को हाथ में ले लिया। मेरा लंड सुबह से ही खड़ा था।
उन्होंने मेरे लंड को सहलाते हुए उसके टोपे पर जीभ फेरी। फिर उन्होंने उसे मुँह में लिया और धीरे धीरे चूसने लगीं। उनकी जीभ मेरे लंड के चारों तरफ घूम रही थी और उनके हाथ मेरे अंडों को सहला रहे थे। मैं उनके बाल पकड़कर आह भरने लगा।
थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड मुँह से निकाला और मेरी तरफ देखा। उन्होंने कहा कि अब चूत में डालो, सुबह सुबह यही चाहिए। वो मेरे ऊपर बैठ गईं और अपनी चूत को मेरे लंड पर रखा। उनकी चूत रात से ही गीली थी और मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया।
उन्होंने अपनी कमर हिलानी शुरू की। ऊपर नीचे की रफ्तार धीरे धीरे तेज होती गई। उनकी छातियाँ उछल रही थीं और मैं उन्हें नीचे से पकड़कर दबा रहा था। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी और हर धक्के के साथ उनके मुँह से सिसकारी निकल रही थी।
मैंने नीचे से तेज धक्के लगाए और उनकी कमर को पकड़ लिया। उन्होंने अपना सिर पीछे झुका दिया और जोर से आह भरी। उनकी चूत का पानी मेरे लंड पर बहने लगा। उन्होंने कहा कि बस ऐसे ही, रुकना मत। मैंने उनकी गांड को दबाते हुए और तेज धक्के लगाए।
उनका सुबह वाला झड़ना बहुत जोरदार था। उनका पूरा जिस्म काँप गया और उन्होंने मेरे कंधों को कसकर पकड़ लिया। मैंने भी उसी वक्त अपना पानी उनकी चूत के अंदर ही निकाल दिया। मेरा वीर्य उनकी चूत में भर गया और वो मेरे ऊपर ही लेट गईं।
हम दोनों हाँफ रहे थे। उन्होंने मेरे कान में कहा कि अब चाय बनाती हूँ, पर तुम यहीं रहोगे। मैंने कहा कि चाय के बाद एक बार और होगा। वो हँस पड़ीं और मेरी छाती पर काट लिया। सुबह की ये शुरुआत हमारी नई आदत बन गई।
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