चुदाई की कहानी: कैमरे के पीछे का सच
"थोड़ा और नीचे, मैडम... हाँ, बस ऐसे ही... पल्लू को कंधे से थोड़ा सरकाइए," कैमरे के पीछे से अर्जुन की आवाज़ आई, और मीरा ने मुस्कुराते हुए पल्लू को उंगली से धकेल दिया। यह चुदाई की कहानी उसी दोपहर से शुरू होती है, जब उदयपुर के हाथीपोल बाज़ार वाली गली में बने अर्जुन स्टूडियो की ट्यूबलाइट के नीचे मीरा पहली बार उस लड़के के सामने खड़ी थी।
स्टूडियो छोटा था, पर दीवारों पर लगे बड़े-बड़े फ्रेम बता रहे थे कि अर्जुन का हाथ साफ था। दुल्हनें, बच्चे, नेता, सबकी तस्वीरें। मीरा ने नीली कांजीवरम साड़ी पहनी थी, बालों का जूड़ा कसा हुआ, माथे पर छोटी बिंदी। तैंतीस की उम्र में उसका बदन भरा हुआ था, कमर पर हल्की चर्बी, ब्लाउज़ के अंदर कसे हुए उरोज़ जो हर सांस के साथ उठते गिरते थे।
"मैडम, आप तो हीरोइन लग रही हैं," अर्जुन ने शटर दबाते हुए कहा। सत्ताईस का लड़का, गोरा, हल्की दाढ़ी, कैमरे के पीछे से उसकी आँखें बार-बार मीरा के गले की हड्डी पर टिक जातीं।
"हीरोइन तो बनना था, बन गई बीवी," मीरा हँसी, और उसकी हँसी में वो खनक थी जो सालों से किसी मर्द ने नहीं सुनी थी। उसका पति इमरान दुबई में ड्राइवर था, साल में एक बार आता था, और आकर भी फोन में घुसा रहता था। घर में सास थीं, जो हफ्ते में चार दिन मायके रहतीं। मीरा का बदन जैसे किसी छूने का इंतज़ार करते-करते थक गया था।
"एक काम कीजिए," मीरा ने अचानक कहा, "वो बोर्ड पर लिखा है ना, पोर्टफोलियो शूट चार सौ निन्यानवे में... मुझे भी वही चाहिए। थोड़े... बोल्ड वाले।"
अर्जुन का हाथ कैमरे पर रुक गया। "बोल्ड मतलब?"
"मतलब समझिए ना," मीरा ने पल्लू को और नीचे सरकाया, इस बार जानबूझकर, "साड़ी में तो हर औरत फोटो खिंचवाती है। मुझे कुछ ऐसा चाहिए जो सिर्फ मेरे लिए हो।"
स्टूडियो में सन्नाटा छा गया। बाहर गली में ठेले वाले की आवाज़ आ रही थी, अंदर सिर्फ पंखे की घरघराहट। अर्जुन ने कैमरा ट्राइपॉड पर टिकाया और धीरे से बोला, "चेंजिंग रूम उस तरफ है। वहाँ कुछ गाउन्स रखे हैं, शूट वाले। आप देख लीजिए।"
मीरा चेंजिंग रूम में घुसी। छोटा कमरा, एक आईना, खूंटी पर टंगे दो गाउन, एक काला, एक लाल। उसने साड़ी उतारनी शुरू की। पेटीकोट और ब्लाउज़ में आईने में खुद को देखा, तो खुद ही शर्मा गई। नाड़ा खोलने में उंगलियाँ काँप रही थीं।
"मैडम, गाउन पहन लीजिए, मैं लाइट सेट करता हूँ," बाहर से अर्जुन की आवाज़ आई।
"अर्जुन," मीरा ने दरवाज़ा थोड़ा खोला, "ब्लाउज़ के हुक फँस गए हैं। ज़रा... मदद कर दोगे?"
वो अंदर आया। मीरा आईने के सामने खड़ी थी, पीठ उसकी तरफ। उसने काँपते हाथों से हुक खोले, एक, दो, तीन। हर हुक के साथ मीरा की सांस तेज़ होती गई। चौथा हुक खुलते ही ब्लाउज़ ढीला होकर कंधों से सरक गया। आईने में दोनों की नज़रें मिलीं।
"गाउन..." अर्जुन की आवाज़ फँस गई।
"रहने दो गाउन," मीरा ने धीरे से कहा, और ब्लाउज़ को ज़मीन पर गिर जाने दिया। आईने में उसका गोरा बदन चमक रहा था, काली ब्रा में कसे उरोज़, पेटीकोट की डोरी कमर पर। अर्जुन के हाथ अपने आप उसकी नंगी पीठ पर रखे गए, उंगलियाँ रीढ़ की हड्डी पर फिसलीं।
मीरा ने आँखें बंद कर लीं। "इतने सालों बाद किसी मर्द ने छुआ है... पता भी नहीं था कितनी भूखी हूँ।"
अर्जुन ने उसे पलटा और आईने के सामने ही उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। मीरा ने उसके बालों में उंगलियाँ धंसा दीं, जीभ से जीभ लड़ी, और दोनों की सांसें एक हो गईं। उसके हाथ अर्जुन की टी-शर्ट के अंदर घुसे, चौड़ी छाती, कसे हुए पेट। नीचे जींस में कुछ सख्त हो रहा था, जो मीरा की जांघ से टकरा रहा था।
"ये क्या है?" मीरा ने शरारत से उसकी जींस के उभार को दबाया।
"कैमरा तो उधर रखा है," अर्जुन हँसा, "ये दूसरा लेंस है।"
मीरा खिलखिलाई, और उस हँसी के बीच उसने अर्जुन की जींस की ज़िप खोल दी। अंदर अंडरवियर में कसा उसका लंड तना हुआ था। मीरा ने उसे बाहर निकाला, लंबा, मोटा, नसें उभरी हुईं। उसने उसे हाथ में लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगी।
"उफ़... मीरा..." अर्जुन की आवाज़ में दर्द और मज़ा दोनों थे।
मीरा घुटनों पर बैठ गई। उसने पहले उसकी टोपी को जीभ से चाटा, नमकीन स्वाद, फिर पूरा मुँह में भर लिया। अर्जुन का हाथ उसके जूड़े पर था, धीरे-धीरे दबाव बनाता हुआ। मीरा की जीभ उसके लंड पर घूम रही थी, गले तक ले जाती, फिर बाहर निकालती। चेंजिंग रूम की दीवारों से टकराकर गीली आवाज़ें गूंज रही थीं।
"बस... बस अब नहीं," अर्जुन ने उसे उठाया, ब्रा का हुक एक झटके में खोला, और उसके उरोज़ आज़ाद हो गए। उसने एक निप्पल मुँह में लिया, दूसरे को उंगलियों से मसलता रहा। मीरा की चीख निकली, "आह... काटो मत... चूसो..."
अर्जुन ने उसे गोद में उठाया और स्टूडियो के बड़े सोफ़े पर लिटा दिया, जहाँ दुल्हनें बैठकर फोटो खिंचवाती थीं। पेटीकोट की डोरी खींची, और मीरा पूरी नंगी उसके सामने थी, सिर्फ गले में मंगलसूत्र। अर्जुन ने उसकी जांघें फैलाईं और उसकी चूत को देखा, गीली, फूली हुई, बाल बिखरे। उसने जीभ लगाई।
"आआह!" मीरा की कमर उछली। अर्जुन की जीभ उसके दाने पर घूम रही थी, अंदर-बाहर, तेज़-धीमी। मीरा ने सोफ़े का कपड़ा मुट्ठियों में भींच लिया। उसकी चूत से पानी बह रहा था, अर्जुन की ठोड़ी गीली हो गई। "और... और अंदर..."
अर्जुन ने दो उंगलियाँ उसकी चूत में डालीं और जीभ दाने पर रखी। मीरा पागल हो रही थी, "हाँ... हाँ... ऐसे ही..." अचानक उसका बदन अकड़ गया, जांघों ने अर्जुन का सिर जकड़ लिया, और वो झड़ गई, लंबी सिसकारी के साथ। चेंजिंग रूम वाली शर्म अब कहीं नहीं थी।
"अब मेरी बारी," मीरा ने हाँफते हुए कहा। उसने अर्जुन को सोफ़े पर धकेला, उसकी जींस उतारी, और उसके लंड पर बैठने से पहले उसे अपनी चूत के मुँह पर रगड़ा। गीलापन, गर्मी, रगड़। फिर धीरे-धीरे नीचे बैठी।
लंड उसकी चूत में समाता गया, इंच-दर-इंच। मीरा की आँखें फैल गईं, मुँह खुला रह गया। "उफ़... कितना... मोटा है..." वो पूरी बैठ गई, उसका बदन काँपा। फिर उसने हिलना शुरू किया, ऊपर-नीचे, धीरे-धीरे, फिर तेज़।
अर्जुन ने उसके उरोज़ पकड़ लिए, निप्पलों को उंगलियों में मरोड़ा। मीरा की रफ़्तार बढ़ती गई, सोफ़ा चरमराने लगा। "और ज़ोर से... मुझे दबोचो..." अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ी और नीचे से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर मीरा की चीख निकलती, "हाँ... हाँ... चोदो मुझे..."
तभी स्टूडियो का शटर बाहर से खड़खड़ाया। दोनों जम गए। "अर्जुन भैया! प्रिंट लेने आया हूँ!" बाहर नौकर छगन की आवाज़।
"रुक... एक मिनट!" अर्जुन चिल्लाया, और मीरा के मुँह पर हाथ रख दिया। मीरा की चूत में अब भी उसका लंड था, दोनों के बदन पसीने से तर। छगन के कदमों की आहट दूर हुई, तो मीरा ने उसका हाथ हटाया और फुसफुसाई, "डरा दिया ना... अब तो दोगुनी सज़ा मिलेगी।"
उसने रफ़्तार दोगुनी कर दी। अर्जुन ने उसे पलटा, मिशनरी में उसकी टांगें कंधों पर रखीं, और पूरी ताक़त से चोदने लगा। मीरा की चूत से फच-फच की आवाज़ें आ रही थीं, उसके उरोज़ हर धक्के पर उछल रहे थे। "मैं आने वाली हूँ... मैं..."
"मैं भी..." अर्जुन ने लंड बाहर निकाला और मीरा के पेट और उरोज़ों पर झड़ गया, गाढ़ा, गर्म। मीरा ने उंगली से उसे छुआ और चाट लिया, आँख मारते हुए।
दोनों सोफ़े पर निढाल पड़े थे। मीरा ने साड़ी उठाई, "फोटो तो एक भी नहीं खिंची।"
"खिंचेगी," अर्जुन ने उसकी नंगी कमर पर हाथ फेरा, "कल आना। री-प्रिंट के बहाने।"
मीरा घर गई, पर रात भर उसे नींद नहीं आई। चूत में अब भी हल्की जलन थी, और हर बार करवट बदलने पर अर्जुन का चेहरा दिखता था। अगले दिन दोपहर को उसने सास से कहा, "बाज़ार जा रही हूँ," और स्टूडियो पहुँच गई। शटर पर ताला था, अंदर अर्जुन इंतज़ार कर रहा था।
"आज क्या शूट होगा?" मीरा ने दरवाज़ा बंद करते ही पूछा।
"आज डार्करूम में," अर्जुन ने उसे अंदर के कमरे में खींचा, जहाँ लाल बत्ती जलती थी और तस्वीरें धुलती थीं। "लाल रोशनी में तेरा बदन... देखना चाहता हूँ।"
लाल रोशनी में मीरा ने खुद ही साड़ी उतार दी, इस बार बिना शर्माए। अर्जुन ने उसे डेवलपिंग काउंटर पर झुकाया, ठंडी धातु उसके पेट से टकराई। पीछे से उसने उसकी चूत में उंगलियाँ डालीं, गीली तो वो पहले से थी।
"कल रात मैंने अपने बिस्तर पर..." मीरा हाँफ रही थी, "उंगली से... पर मज़ा नहीं आया। तेरे जैसा कोई नहीं।"
अर्जुन ने पीछे से ही अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक झटके में अंदर डाल दिया। मीरा चीखी, "आह! धीरे... नहीं... ज़ोर से!" उसने उसकी कमर पकड़ी और धक्के मारने शुरू किए, डॉगी स्टाइल में। लाल बत्ती में दोनों के पसीने से तर बदन चमक रहे थे।
मीरा ने एक हाथ पीछे बढ़ाकर उसके अंडकोष सहलाए, दूसरे से काउंटर पकड़ा। "तेरा लंड... मेरी चूत फाड़ देगा... और फाड़..." अर्जुन की रफ़्तार बढ़ती गई, काउंटर दीवार से टकराने लगा।
फिर अर्जुन ने उसे घुमाया, काउंटर पर बिठाया, टांगें फैलाकर अपने कंधों पर रखीं, और खड़े-खड़े उसे चोदने लगा। मीरा के उरोज़ उछल रहे थे, उसने खुद ही उन्हें पकड़कर मसलना शुरू कर दिया। "चूस इन्हें... काट..." अर्जुन झुका और निप्पल को दांतों से हल्के से काटा, मीरा की चीख निकली।
"मैं झड़ने वाली हूँ..." मीरा की आवाज़ टूट रही थी।
"साथ में," अर्जुन ने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाई, और दोनों एक साथ झड़े, मीरा की चूत ने उसके लंड को निचोड़ा, उसका पानी उसकी जांघों पर बहा। लाल बत्ती में दोनों हाँफ रहे थे, एक-दूसरे से लिपटे।
मीरा ने कपड़े पहने, बाल ठीक किए। जाते-जाते उसने अर्जुन के गाल पर एक किस किया और बोली, "अगले महीने फिर शूट करवाऊँगी। और हाँ, इस बार गाउन वाला पैकेज नहीं... बिना गाउन वाला।"
अर्जुन हँसा, "तेरे लिए स्टूडियो हमेशा खुला है।"
"खुला तो तू भी रहना," मीरा ने आँख मारी, शटर उठाया, और गली की धूप में निकल गई, होंठों पर वो मुस्कान लिए जो सिर्फ़ एक संतुष्ट औरत के चेहरे पर होती है।
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