Hindi Sex Story: ऑफिस की गुप्त मुलाक़ात (Part 2)
दरवाज़े पर दस्तक इतनी ज़ोर से हुई कि अंजलि की साँस ही रुक गई। बाहर निशा की आवाज़ गूँजी, विक्रम, दरवाज़ा खोलो, मैं जानती हूँ तुम अंदर हो। उस पल अंजलि को लगा जैसे ये कोई कल्पना वाली hindi sex story नहीं बल्कि उसकी अपनी ज़िंदगी है, जहाँ पकड़े जाने का डर सबसे बड़ा मोड़ होता है।
विक्रम ने एक पल में अपनी शर्ट के बटन ठीक किए और अंजलि को इशारे से डेस्क के नीचे छिपने को कहा। अंजलि घुटनों के बल रेंगती हुई डेस्क के नीचे सरक गई, उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे लगा निशा बाहर से भी सुन लेगी। विक्रम ने दीवार के शीशे में अपना चेहरा देखा, गहरी साँस ली और दरवाज़े की ओर बढ़ा।
तभी निशा ने हैंडल को ज़ोर से हिलाया और कहा, क्या कर रहे हो अंदर, इतनी देर क्यों लगा रहे हो। विक्रम ने आवाज़ में जल्दबाज़ी लाते हुए कहा, एक मिनट निशा, क्लाइंट लाइन पर है, स्पीकर ऑन है। डेस्क के नीचे छिपी अंजलि ने दरवाज़े के नीचे की झिरी से निशा की सैंडलों की नोक देखी और उसकी साँस अटक गई।
उसने दरवाज़ा सिर्फ़ इतना खोला कि निशा अंदर झाँक न सके। निशा की आँखों में साफ़ शक था। उसने कहा, नीचे गार्ड ने बताया तुम अभी तक निकले नहीं, और तुम्हारी नई लड़की अंजलि की गाड़ी भी पार्किंग में खड़ी है। विक्रम ने हँसकर कहा, अरे वो तो बहुत पहले चली गई, मैं स्पीकर पर क्लाइंट कॉल पर था, तुमने दस्तक देकर डिस्टर्ब कर दिया।
निशा ने अंदर झाँकने की कोशिश की मगर विक्रम दरवाज़े से हटा नहीं। उसने ठंडी आवाज़ में कहा, ठीक है, मगर कल घर जल्दी आना, बेटे को बुखार है और मुझे तुमसे बात करनी है। दरवाज़ा बंद होते ही अंजलि डेस्क के नीचे से निकली, उसका चेहरा सफ़ेद पड़ा था और उसके हाथ काँप रहे थे।
उसने फुसफुसाकर कहा, ये खत्म, विक्रम, अभी इसी वक्त ये सब खत्म। मैं पकड़ी जाती तो मेरी शादी टूट जाती, मेरी नौकरी चली जाती। विक्रम ने उसके काँपते हाथ पकड़े और कहा, शांत हो जाओ, वो चली गई है, कुछ नहीं हुआ।
अंजलि की आँखों में आँसू थे। उसने कहा, अगर वो अंदर आ जाती तो, अगर उसने मुझे देख लिया होता तो मैं क्या मुँह दिखाती। विक्रम ने उसके आँसू पोंछे और कहा, तो मैं कहता तुम कोई फाइल देने आई थीं, दुनिया में हर सवाल का जवाब होता है, बस हिम्मत चाहिए। अंजलि ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की मगर विक्रम ने उसे खींचकर अपने सीने से लगा लिया।
उसकी धड़कन अंजलि के सीने से टकरा रही थी और उस गर्मी में अंजलि का डर धीरे धीरे पिघलने लगा। विक्रम ने उसके बालों में उँगलियाँ फिराईं और कहा, डर के बाद जो होता है वो सबसे ज़्यादा मीठा होता है, आज़माकर देख लो। अंजलि ने उसकी शर्ट का कॉलर पकड़ा और उसे दरवाज़े की ओर धकेल दिया।
दरवाज़े के कुंडे की खटाक आवाज़ ने दोनों को और उत्तेजित कर दिया। अंजलि ने विक्रम के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, इस बार चुम्बन में डर नहीं बल्कि बग़ावत थी। विक्रम के हाथ उसकी कमर से होते हुए कुर्ते के अंदर सरक गए और उसके नंगे पेट को सहलाने लगे। अंजलि की साँसें तेज़ हो गईं।
विक्रम ने अंजलि को घुमाया और उसकी पीठ अपने सीने से लगा ली। उसका एक हाथ ऊपर जाकर उसके चूचों को कुर्ते के ऊपर से ही मसलने लगा और दूसरा हाथ नीचे सरककर उसकी सलवार के अंदर घुस गया। उसकी उँगलियों ने अंजलि की गीली चूत को छुआ और अंजलि के मुँह से दबी हुई सिसकारी निकली।
उसने विक्रम की पैंट की ज़िप खोली और उसका तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया। उसकी उँगलियों ने लंड के टोपे को रगड़ा और विक्रम के मुँह से सिसकारी निकल गई। अंजलि घुटनों पर बैठ गई और उसने लंड को अपने मुँह में ले लिया, जीभ से टोपे को चाटते हुए अंदर बाहर करने लगी।
विक्रम ने उसके बाल पकड़े और उसके मुँह को अपने लंड पर आगे पीछे करने लगा। अंजलि की आँखों में आँसू आ गए मगर उसने रुकने का नाम नहीं लिया।
तभी विक्रम ने झुककर अंजलि की सलवार नीचे खिसकाई और अपनी दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं। अंजलि का मुँह लंड पर था और नीचे उँगलियों की हरकत से उसकी कमर हिलने लगी। दोनों एक दूसरे को एक साथ मज़ा दे रहे थे और केबिन में सिर्फ़ गीली आवाज़ें गूँज रही थीं। अंजलि ने लंड को गले तक लिया और विक्रम की जाँघें काँपने लगीं। तभी अंजलि रुकी, खड़ी हुई और अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया।
उसकी गीली चूत विक्रम के सामने थी और विक्रम ने उसे उठाकर डेस्क पर बिठा दिया। उसने अंजलि की टाँगें फैलाईं और अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रगड़ा। अंजलि ने उसके कंधे पकड़े और कहा, डालो, अब देर मत करो। विक्रम ने एक झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।
अंजलि की चीख उसके गले में ही दब गई क्योंकि विक्रम ने उसके मुँह पर हाथ रख दिया। डेस्क हिलने लगी, कागज़ बिखरने लगे मगर दोनों को कोई परवाह नहीं थी। विक्रम तेज़ तेज़ धक्के मार रहा था और अंजलि की चूत से गीलापन टपककर डेस्क पर फैल रहा था।
अंजलि ने उसे पलटा और खुद उसके ऊपर चढ़ गई। उसने लंड को अपनी चूत में फँसाया और ऊपर नीचे उछलने लगी, उसके चूचे विक्रम के चेहरे पर थपक रहे थे। विक्रम ने उसके चूचों को मुँह में लिया और निप्पलों को चूसा। अंजलि की चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया और वो झड़ गई, उसका पानी विक्रम की जाँघों पर बह गया।
झड़ने के बाद अंजलि विक्रम के सीने पर लेट गई, दोनों की साँसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। तभी अंजलि के फ़ोन पर मैसेज की ट्यून बजी। रोहन का मैसेज था, फ्लाइट एक दिन और लेट हो गई है, परसों रात को आऊँगा। अंजलि ने फ़ोन विक्रम को दिखाया और दोनों की आँखों में एक ही चमक थी, एक और रात।
विक्रम ने कहा, कल दफ़्तर में नहीं, नीचे बेसमेंट पार्किंग में मेरी गाड़ी में मिलना, वहाँ कोई नहीं आता। अंजलि ने शरारत से कहा, और अगर निशा फिर आ गई तो। विक्रम ने उसके गाल पर चुम्बन दिया और कहा, इस बार दरवाज़ा नहीं, गाड़ी का लॉक होगा, और शीशों पर कालिख।
अगली रात ठीक साढ़े नौ बजे अंजलि बेसमेंट में उतरी। पीली ट्यूबलाइटों की रोशनी में विक्रम की काली गाड़ी कोने में खड़ी थी। वो पिछली सीट पर बैठी और विक्रम ने गाड़ी लॉक कर दी। शीशे ऊपर थे और बाहर सिर्फ़ पाइपों की टपकती आवाज़ आ रही थी।
अंजलि विक्रम की गोद में बैठ गई और उसके होंठों को चूमने लगी। उसके हाथ विक्रम की शर्ट के बटन खोल रहे थे और विक्रम के हाथ उसकी साड़ी का पल्लू खींच रहे थे। आज अंजलि साड़ी में आई थी और विक्रम की आँखों में भूख साफ़ दिख रही थी।
विक्रम ने उसका ब्लाउज़ उतारा और उसके नंगे चूचों को अपने हाथों में भर लिया। उसने निप्पलों को उँगलियों से मरोड़ा और फिर मुँह में लेकर चूसने लगा। अंजलि ने सिसकारी भरी और विक्रम का सिर अपने सीने में दबा लिया।
फिर अंजलि नीचे सरकी और विक्रम की गोद में बैठकर उसका लंड अपने मुँह में ले लिया। गाड़ी की पिछली सीट पर वो झुककर लंड चूस रही थी और विक्रम ने सीट पर फैलकर अपनी टाँगें फैला दीं। उसने अंजलि का पेटीकोट ऊपर किया और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी। अंजलि के मुँह से लंड निकला और वो ज़ोर से सिसक पड़ी।
फिर अंजलि ने विक्रम की पैंट उतारी और उसका लंड अपने हाथ में ले लिया। उसने लंड को अपनी चूत के दाने पर रगड़ा और दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। विक्रम ने उसे सीट पर लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गया।
उसने अपना लंड अंजलि की गीली चूत में डाला और धीरे धीरे धक्के मारने लगा। गाड़ी हल्के हल्के हिल रही थी मगर बेसमेंट में कोई देखने वाला नहीं था। अंजलि ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर लपेट लीं और हर धक्के पर अपनी कमर उछालने लगी।
विक्रम ने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाई और अंजलि की चूत से फच्च फच्च की आवाज़ गाड़ी में गूँजने लगी। अंजलि ने उसके कंधों पर नाखून गड़ा दिए और कहा, और ज़ोर से, आज मुझे तोड़ दो। विक्रम ने उसे पलटकर घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में लंड पेल दिया।
इस पोज़ में लंड और गहराई तक जा रहा था और अंजलि की चीखें गाड़ी की बंद खिड़कियों से टकरा रही थीं। विक्रम ने उसके चूचों को पीछे से पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारता रहा। अंजलि की चूत ने दो बार पानी छोड़ा और उसकी जाँघें पूरी गीली हो गईं।
आख़िर में विक्रम ने लंड बाहर निकाला और अंजलि के पेट पर अपना सारा पानी छोड़ दिया। दोनों पसीने में भीगे हुए सीट पर लेट गए।
कुछ देर खामोशी रही, फिर अंजलि ने पूछा, रोहन परसों आ जाएगा, उसके बाद हम कहाँ मिलेंगे। विक्रम ने कहा, मेरे एक दोस्त का गेस्ट हाउस है नोएडा में, वहाँ कोई नहीं पूछता, बस तुम्हें बहाना बनाना होगा। अंजलि ने उसके सीने पर उँगली से दिल बनाया और कहा, बहाने तो मैं बना लूँगी, तुम बस वक्त निकालना। अंजलि ने हँसकर कहा, अब बताओ, ये सिलसिला चलेगा या खत्म। विक्रम ने उसके माथे पर चुम्बन दिया और कहा, चलेगा, मगर अब नियमों के साथ।
उसने नियम गिनाए, दफ़्तर में बिना बहाने के कभी अकेले नहीं मिलेंगे, फ़ोन पर कोई मैसेज नहीं होगा, और निशा को कभी शक नहीं होने देंगे। अंजलि ने कहा, और रोहन को भी नहीं। दोनों हँस पड़े और उस हँसी में एक राज़ की मिठास थी।
गाड़ी से उतरकर दोनों लिफ़्ट में ऊपर आए। लिफ़्ट के शीशे में अंजलि ने अपनी बिखरी साड़ी ठीक की और विक्रम ने उसके कंधे पर हाथ रखा। लिफ़्ट रुकने से ठीक पहले अंजलि ने फुसफुसाकर कहा, कल फिर, उसी वक्त। विक्रम मुस्कुराया और लिफ़्ट का दरवाज़ा खुल गया।
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