देसी हिंदी चुदाई: उज्जैन के हाट वाली सीमा
देसी हिंदी चुदाई की इस कहानी की शुरुआत उस शाम हुई जब उज्जैन के साप्ताहिक हाट में अपनी अचार की दुकान बंद करते हुए सीमा को अपने ठेले के नीचे एक पुरानी डायरी पड़ी मिली। डायरी मसालों के एक व्यापारी की थी, और उसके पहले पन्ने पर किसी की लिखावट में एक लाइन थी जो सीमा के दिल को छू गई। उस लाइन में लिखा था कि लाल चुनरी वाली अचार बेचने वाली औरत की मुस्कान इस हाट की सबसे महंगी चीज है। सीमा ने डायरी को सीने से लगा लिया और मुस्कुराने लगी।
सीमा तीस साल की थी, तीन साल पहले उसके पति का देहांत हो गया था, और तब से वह अपने हाथ के अचार बेचकर अपना घर चलाती थी। हाट में हर कोई उसे जानता था, उसकी मिर्ची का अचार दूर दूर तक मशहूर था। जिस व्यापारी की डायरी थी उसका नाम विक्रम था, बत्तीस साल का, जो हाट में मसाले बेचता था और हमेशा सीमा के ठेले के सामने से गुजरते हुए रुककर उससे दो बातें जरूर करता था।
अगले हाट के दिन सीमा ने डायरी को अपने थैले में संभालकर रखा और इंतजार करती रही कि विक्रम कब आएगा। दोपहर के बाद विक्रम अपने ठेले पर मसाले सजाते हुए आया, और सीमा ने देखा कि वह बार बार इधर उधर कुछ ढूंढ रहा है। सीमा ने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या कुछ खो गया है, तो विक्रम ने शर्माते हुए कहा कि उसकी डायरी नहीं मिल रही है। सीमा ने धीरे से कहा कि डायरी तो मिल गई है, मगर उसे वापस लेने के लिए एक शर्त है।
विक्रम ने पूछा कि कैसी शर्त है, तो सीमा ने कहा कि पहले वह उसके ठेले की सबसे तीखी मिर्ची का अचार चखे। विक्रम ने अचार चखा, उसकी आंखों से पानी आ गया, और सीमा हंस पड़ी। विक्रम ने कहा कि तुम्हारे अचार जितनी तीखी तो तुम्हारी मुस्कान भी है। सीमा ने डायरी उसके हाथ में थमा दी और कहा कि अगली बार अपनी चीजें संभालकर रखना, हर बार कोई ईमानदार नहीं मिलेगा।
उस दिन के बाद विक्रम रोज सीमा के ठेले पर आने लगा। कभी वह उसे मसालों की नई किस्म चखाता, कभी सीमा उसे अचार का नया स्वाद देती। दोनों के बीच की बातचीत धीरे धीरे लंबी होने लगी, और हाट के दूसरे दुकानदार भी उनकी दोस्ती पर मुस्कुराने लगे। एक शाम हाट खत्म होने के बाद विक्रम ने सीमा से कहा कि उसके गोदाम में कुछ मसाले रखे हैं, अगर वह चाहे तो देख सकती है। सीमा ने हां कर दी।
गोदाम ठेले के पीछे एक छोटा सा कमरा था, जिसमें मसालों की बोरियां रखी थीं। विक्रम ने दरवाजा बंद किया और सीमा की ओर बढ़ा। उसने सीमा का हाथ पकड़ा और कहा कि डायरी में जो लिखा था वह सच था, वह पहले ही दिन से उसे पसंद करता था। सीमा ने उसकी आंखों में देखा और कहा कि वह भी उसे देखकर मुस्कुराती थी, मगर विधवा होने के कारण कभी आगे नहीं बढ़ी। विक्रम ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों को चूम लिया।
सीमा ने पहले तो उसे रोकना चाहा, फिर उसके होंठों का स्वाद उसे अच्छा लगा और वह भी उसका साथ देने लगी। विक्रम ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया, उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स को सहलाया और सीमा की सांसें तेज हो गईं। उसने विक्रम की कमीज के बटन खोले, उसके सीने पर हाथ फेरा और उसकी कमर को पकड़ लिया। दोनों बोरियों के बीच खड़े होकर एक दूसरे को चूमने लगे, जैसे हाट की सारी आवाजें दूर चली गई हों।
विक्रम ने सीमा की साड़ी ऊपर की और उसकी चूत को अपनी उंगलियों से सहलाया। सीमा गीली हो चुकी थी, उसने विक्रम का लंड अपने हाथ में लिया और उसे धीरे से हिलाने लगी। विक्रम ने कहा कि इतना गरम वह पहली बार महसूस कर रहा है। सीमा ने उसे बोरियों पर बिठाया, उसकी गोद में बैठ गई और उसका लंड अपनी चूत में डाल लिया। दोनों की आवाजें गोदाम में गूंजने लगीं।
सीमा ऊपर नीचे होने लगी, विक्रम ने उसके बूब्स को चूसा, उसकी गर्दन पर काटा और सीमा बार बार उसका नाम लेने लगी। कुछ देर बाद विक्रम ने उसे पलटा दिया, उसे बोरियों पर झुकाया और पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। सीमा ने बोरियों को कसकर पकड़ लिया, उसकी चूत से पानी बहने लगा और वह जोर से सिसकने लगी। विक्रम ने तेज धक्के मारे और दोनों साथ में झड़े, सीमा का पानी और विक्रम का पानी एक साथ बह गया।
गोदाम की उस मुलाकात के बाद सीमा ने विक्रम के कान में कहा कि मसालों की खुशबू उसे हमेशा इस दिन की याद दिलाएगी। विक्रम ने उसकी साड़ी के पल्लू को ठीक किया, उसके माथे पर बोसा दिया और कहा कि अगली बार वह उसके लिए केसर लेकर आएगा। सीमा ने कहा कि केसर से ज्यादा उसे उसकी मौजूदगी चाहिए। दोनों ने एक दूसरे को कसकर गले लगाया और कुछ देर तक वैसे ही खड़े रहे, जैसे समय रुक गया हो। बाहर हाट की आवाजें धीरे धीरे कम हो रही थीं और गोदाम में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज थी।
उसके बाद दोनों ने कपड़े ठीक किए और हाट से बाहर निकले। विक्रम ने सीमा से कहा कि वह अगले हाट तक इंतजार नहीं कर सकता। सीमा ने हंसकर कहा कि उसके घर का दरवाजा किसी के लिए बंद नहीं है, मगर आना रात को होगा जब मोहल्ला सो जाए। विक्रम ने उसका हाथ चूमा और दोनों अपने अपने रास्ते चले गए।
तीन दिन बाद रात को विक्रम सीमा के घर पहुंचा। सीमा ने दरवाजा खोला, वह लाल साड़ी में थी और उसके बाल खुले हुए थे। विक्रम ने अंदर आते ही उसे दीवार से लगा लिया और उसके होंठों को चूमने लगा। सीमा ने उसकी कमीज उतारी, उसके सीने को चूमा और उसे बिस्तर तक ले गई। उसने विक्रम का लंड अपने मुंह में लिया, उसे चूसा और विक्रम की आवाज कमरे में गूंजने लगी।
विक्रम ने सीमा को बिस्तर पर लिटाया, उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। सीमा ने चादर को मुट्ठी में पकड़ लिया, उसकी कमर ऊपर उठने लगी और वह बार बार कहने लगी कि और जोर से करो। विक्रम ने उसकी बात मानी, तेज धक्के मारे, उसके बूब्स को मसलते हुए उसकी चूत में अपना पूरा लंड उतार दिया। सीमा की आंखें बंद हो गईं, उसका शरीर कांपने लगा और वह जोर से झड़ गई।
विक्रम भी दो चार तेज धक्कों के बाद झड़ गया, उसका पानी सीमा की चूत में भर गया। दोनों पसीने में भीगे हुए एक दूसरे से लिपट गए। सीमा ने विक्रम के सीने पर सिर रखा और कहा कि तीन साल बाद पहली बार उसे किसी मर्द के साथ इतना अच्छा लगा है। विक्रम ने कहा कि वह उसे हमेशा खुश रखेगा, और सीमा ने उसकी बात पर भरोसा कर लिया।
रात के खाने के बाद दोनों ने फिर एक बार प्यार किया, इस बार धीरे धीरे और बिना जल्दी के। सीमा विक्रम के ऊपर बैठी, उसके लंड को अपनी चूत में लेकर धीरे धीरे हिली, और दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखकर अपना प्यार जताया। यह रात उनके लिए सिर्फ जिस्म की नहीं बल्कि भरोसे की रात थी।
उस रात के आखिरी पहर में सीमा ने विक्रम को अपने हाथों से दूध पिलाया और दोनों ने बालकनी में बैठकर चांद को देखा। विक्रम ने कहा कि उज्जैन की रातें अब उसे और भी ज्यादा पसंद आने लगी हैं। सीमा ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और कहा कि अब यह घर सिर्फ उसका नहीं बल्कि दोनों का है। दोनों ने एक दूसरे के कंधे पर सिर रखकर कुछ देर तक चुपचाप बैठना पसंद किया, बिना कुछ कहे, बिना किसी जल्दी के।
सुबह विक्रम के जाने से पहले सीमा ने उसे अचार का एक डिब्बा दिया और कहा कि यह डिब्बा हर हफ्ते उसके ठेले पर मिलेगा, मगर इसके साथ एक शर्त है कि वह अपनी डायरी अब कभी नहीं खोएगा। विक्रम ने हंसकर कहा कि डायरी तो अब उसके दिल में लिखी जा चुकी है। सीमा ने उसे दरवाजे तक छोड़ा और दोनों ने एक दूसरे को अलविदा कहा।
अगले हाट के दिन सीमा ने देखा कि विक्रम का ठेला उसके ठेले के और करीब आ गया है। दोनों ने एक दूसरे को देखकर मुस्कुराया, और हाट के लोगों ने भी उनकी मुस्कान को देखकर समझ लिया कि कुछ नया होने वाला है। सीमा ने अपने अचार के ठेले पर एक नई तख्ती लगाई जिस पर लिखा था कि यहां मसाले भी मिलते हैं। विक्रम ने उस तख्ती को देखकर ठहाका लगाया और सीमा ने भी हंसकर उसका हाथ थाम लिया।
उस दिन शाम को हाट बंद होने के बाद दोनों ने साथ में चाय पी और अपने आने वाले दिनों की बातें कीं। सीमा ने कहा कि वह चाहती है कि विक्रम हर हाट में उसके साथ रहे, और विक्रम ने कहा कि वह अब कहीं और नहीं जाएगा। दोनों की यह कहानी हाट की गलियों में धीरे धीरे फैल गई, और लोग कहने लगे कि अचार वाली सीमा को अब मसाले वाले विक्रम का साथ मिल गया है।
रात को घर लौटकर सीमा ने अपनी अलमारी से वह डायरी निकाली जिसमें विक्रम ने उसके बारे में लिखा था। उसने उस पन्ने को फिर से पढ़ा, मुस्कुराई और डायरी को संभालकर रख दिया। उसे लगा कि किस्मत कभी कभी किसी खोई हुई चीज के रूप में आती है, और जो चीज खो जाती है वह कभी कभी दिल को वापस मिल जाती है।
अगले हाट के दिन विक्रम सच में केसर की एक छोटी सी डिब्बी लेकर आया। उसने डिब्बी सीमा के हाथ में थमाई और कहा कि यह उसके वादे की निशानी है। सीमा ने डिब्बी को आंखों से लगाया और कहा कि अब हर हाट में उसे कुछ नया मिलेगा। दोपहर को जब हाट में भीड़ कम हुई तो विक्रम ने इशारे से उसे गोदाम की ओर बुलाया।
गोदाम में पहुंचते ही सीमा ने दरवाजा बंद किया और विक्रम से लिपट गई। विक्रम ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया, उसके बूब्स को चूमा और उसकी चूत को अपनी उंगलियों से सहलाया। सीमा गीली हो गई, उसने विक्रम का लंड बाहर निकाला और उसे अपने मुंह में ले लिया। वह उसे चूसने लगी, उसकी जीभ से उसके लंड की नोक को छेड़ने लगी और विक्रम की सांसें तेज हो गईं।
विक्रम ने उसे उठाया, बोरियों पर बिठाया और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। सीमा ने उसकी कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया और दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते हुए हिलने लगे। हर धक्के के साथ सीमा की आवाज निकलती थी, मगर वह अपनी आवाज को दबाने की कोशिश करती थी ताकि बाहर किसी को पता न चले। विक्रम ने उसके बूब्स को मसलते हुए तेज धक्के मारे और कुछ ही देर में दोनों साथ झड़ गए।
बाहर निकलने से पहले सीमा ने विक्रम के कान में कहा कि केसर की डिब्बी अब उसकी सबसे कीमती चीज है। विक्रम ने मुस्कुराकर कहा कि कीमती तो वह खुद है। दोनों ने हंसकर एक दूसरे को देखा और अपने अपने ठेलों पर लौट गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
शाम को हाट बंद होने के बाद दोनों ने साथ में चाय पी। सीमा ने केसर वाली चाय बनाई और विक्रम ने चाय की पहली चुस्की लेते हुए कहा कि अब हर हाट का दिन उसके लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। सीमा ने कहा कि त्योहार तो तब होगा जब वह उसके घर पर पूरी रात रुकेगा। विक्रम ने उसका हाथ थामा और कहा कि वह रात बहुत जल्द आएगी। दोनों ने चाय खत्म की और अपने अपने घरों की ओर चल दिए, दिल में अगली मुलाकात की उम्मीद लिए हुए।
Readers who enjoyed “देसी हिंदी चुदाई: उज्जैन के हाट वाली सीमा” also read
8 curated storiesहाईवे के ढाबे पर एक रात
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर आधी रात को ट्रक ड्राइवर सूरज रानी के ढाबे पर रुकता है। खाने की खुशबू, बातचीत और एक ऐसी रात, जो दोनों कभी नहीं भूलेंगे।
गर्मी की दोपहर भाभी के साथ अकेला घर जब साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था और जो हुआ दोपहर की गर्मी से भी ज्यादा गर्म था
घर में कोई नहीं था। भाभी रसोई में काम कर रही थीं। साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था। फिर जो हुआ वो दोपहर की गर्मी से भी ज्यादा गर्म था।
गर्मी की रात प्रिया की गीली प्यास जब पंखे की आवाज़ में दबी चीखें और साड़ी कमर तक उठी हुई थी
पंखे की आवाज़ में दबी चीखें। प्रिया की साड़ी पहले ही कमर तक उठी हुई थी और रोहन उसके अंदर बेतहाशा धक्के मार रहा था।
रात भर की प्यास रिया की बेकाबू हवस जब उसने ब्रा उतारी तो लंड पहले से तंबू बना चुका था और दोनों ने एक-दूसरे को पूरी तरह चखा
रिया ने ब्रा उतारी तो आरव का लंड पहले से ही तंबू बना चुका था। रात भर चली वो कामुक लड़ाई, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे को पूरी तरह चखा।
हिंदी स्टोरी सेक्सी वाली: जयपुर की छत से बेड तक ऋतु की चुदाई
हिंदी स्टोरी सेक्सी वाली: जयपुर की छत पर होली की पुरानी याद और आज की रात की कहानी। ऋतु और कबिर की धड़कनें, पुरानी शरारत और नई हिम्मत।
बेस्ट हिंदी सेक्स कहानी: नागपुर की राधा और भूली हुई स्केचबुक
बेस्ट हिंदी सेक्स कहानी में नागपुर की राधा को बालकनी में एक भूली हुई स्केचबुक मिलती है, जिसमें उसकी ही तस्वीरें बनी हैं।
हिंदी रोमांटिक सेक्स कहानी: उदयपुर में काव्या और कबीर की सालगिरह वाली रात
उदयपुर की झील के किनारे सालगिरह मनाने पहुंची काव्या के लिए कबीर ने एक सरप्राइज शाम सजाई है। यह हिंदी रोमांटिक सेक्स कहानी धीमी शुरुआत से एक यादगार रात तक जाती है, जहां हर पल में प्यार और चाहत है।
भाई बहन की छुपी हुई चुदाई कहानी: बहन की चूत में भाई का लंड, दिल्ली घर की पहली रात
भाई बहन की छुपी हुई चुदाई कहानी में दिल्ली के घर की एक रात, जब माता पिता शादी में गए थे और दो दिलों के बीच छुपा एहसास सामने आया।