देवर भाभी सेक्स कहानी: गलत वॉइस नोट की रात
यह देवर भाभी सेक्स कहानी उस दोपहर से शुरू होती है जब नीलम के फोन की स्क्रीन पर कुणाल का जवाब आया था। "भाभी, ये वॉइस नोट किसके लिए भेजा था?" नीचे नीली टिक चमक रही थी और नीलम की उंगलियां कांपने लगीं।
वॉइस नोट तो उसने अपनी सहेली रेखा के लिए रिकॉर्ड किया था। सुबह से घर सूना था, मनोज तीन दिन के काम से लखनऊ गए थे, और दोपहर की गर्मी में नीलम बिस्तर पर लेटी बोर हो रही थी।
मज़ाक मज़ाक में उसने फोन उठाया था और दबे होंठों से बोली थी, "रेखा, आज तो घर बिल्कुल खाली है, पति बाहर, और मेरा मन कुछ शैतानी करने का कर रहा है।" उसने हंसते हुए कहा था, "काश कोई होता जो इस सूने घर में मुझे थोड़ा हंसा देता, थोड़ा छेड़ देता।" भेजते वक्त उंगली फिसली थी और नोट कुणाल की चैट में चला गया था।
अब स्क्रीन पर उसका जवाब था। नीलम ने जल्दी से टाइप किया, "गलती से चला गया, डिलीट कर दो।" जवाब तुरंत आया, "सुन तो लिया, भाभी।" नीलम का चेहरा लाल हो गया।
उसने लिखा, "क्या सुना तुमने?" कुणाल ने जवाब दिया, "यही कि आपका मन शैतानी करने का कर रहा है।" साथ में हंसने वाली इमोजी। नीलम ने फोन बिस्तर पर पटक दिया।
चौबीस साल का कुणाल, मनोज का छोटा भाई, पिछले दो साल से उसी घर में रहता था। दिन में कॉलेज, शाम को दोस्त, और घर में हमेशा भाभी से हंसी मज़ाक। लेकिन आज के मज़ाक में कुछ और था।
फोन फिर बजा। "भाभी, डिलीट कर दूं? या एक बार और सुनूं?" नीलम ने गुस्से में टाइप किया, "कुणाल! डिलीट करो अभी।" जवाब आया, "कर दिया। लेकिन अब बताओ, शैतानी कैसी?"
नीलम हंस पड़ी। गुस्सा टिक नहीं पाया। उसने लिखा, "तुम्हें इससे क्या?" कुणाल बोला, "मुझे सब पता चलता है, भाभी। वैसे आज घर पर कौन कौन है?" नीलम ने जवाब दिया, "कोई नहीं, मैं अकेली हूं।"
"फिर तो शैतानी का पूरा मौका है," कुणाल ने लिखा। नीलम का दिल धड़कने लगा। उसने टाइप किया, "तुम कॉलेज में हो, पढ़ाई करो।" जवाब आया, "क्लास खत्म, घर आ रहा हूं।"
नीलम के पेट में गुदगुदी हुई। उसने लिखा, "जल्दी मत आना।" कुणाल बोला, "क्यों? डर लग रहा है?" नीलम ने जवाब दिया, "डर किस बात का?" "यही कि भाभी की शैतानी मैं पूरी कर दूंगा।"
दोपहर के तीन बज रहे थे और कमरे में पंखा चल रहा था। नीलम बिस्तर पर पेट के बल लेटी फोन देख रही थी। उसने धीरे से लिखा, "अच्छा, तो बताओ कैसे पूरी करोगे?"
जवाब आने में दस सेकंड लगे। "पहले आप वो वॉइस नोट दोबारा भेजो, इस बार मेरे लिए।" नीलम ने होंठ काटे। उसने लिखा, "शर्म नहीं आती देवर को?" कुणाल बोला, "भाभी को शर्म आई थी वो नोट भेजते वक्त?"
नीलम ने माइक का बटन दबाया। धीमी आवाज़ में बोली, "कुणाल, तुम बहुत शरारती हो गए हो।" भेज दिया। तुरंत जवाब, "और बोलो, भाभी। आपकी आवाज़ में कुछ है आज।"
"क्या है?" उसने पूछा। "ऐसा लग रहा है जैसे आप कुछ चाह रही हो," कुणाल ने लिखा। नीलम ने आंखें बंद कीं और टाइप किया, "और अगर चाह रही हूं तो?"
फोन कुछ देर खामोश रहा। फिर लंबा मैसेज आया। "तो मैं घर आकर वो करूंगा जो भैया तीन दिन से नहीं कर पाए।" नीलम की सांस तेज हो गई। उसने लिखा, "तुम्हें कैसे पता भैया ने क्या किया?"
"भाभी की आंखें सब बता देती हैं," कुणाल ने जवाब दिया। "वैसे एक बात पूछूं? वो नोट में आपने कहा था कोई होता जो छेड़ देता। कैसी छेड़छाड़ चाहती हो?" नीलम ने फोन सीने से लगाया।
उसने हिम्मत करके लिखा, "पहले तुम बताओ, तुम क्या करोगे?" जवाब आया, "पहले आपके पास बैठूंगा। फिर आपके बालों में उंगली फिराऊंगा। फिर..." नीलम ने टाइप किया, "फिर क्या? रुके क्यों?"
"फिर आपके गाल चूमूंगा," कुणाल ने लिखा। "और फिर?" नीलम की उंगलियां कांप रही थीं। "फिर आपके होंठ," जवाब आया। "और आपके हाथ मेरे हाथ में होंगे।"
नीलम ने बिस्तर पर करवट बदली। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया था। उसने लिखा, "बस इतना?" कुणाल बोला, "भाभी, शुरुआत है। बाकी घर आकर।"
"कब आ रहे हो?" उसने पूछा। "एक घंटे में," जवाब आया। "इतनी जल्दी क्यों?" नीलम ने लिखा। कुणाल बोला, "क्योंकि अब क्लास में मन नहीं लग रहा।"
नीलम उठी और आईने के सामने खड़ी हुई। उसने बाल संवारे और साड़ी ठीक की। फिर रुक गई। उसने साड़ी उतारी और अलमारी से हल्की गुलाबी नाइटी निकाली।
नाइटी पहनकर उसने खुद को आईने में देखा। दिल धड़क रहा था। फोन पर मैसेज आया, "भाभी, क्या पहना है?" नीलम ने लिखा, "साड़ी।" कुणाल बोला, "झूठ। आपकी टाइपिंग से लग रहा है कुछ और पहना है।"
उसने हिम्मत करके सेल्फी ली, गर्दन से नीचे तक, नाइटी का गला दिख रहा था। भेज दी। तुरंत जवाब, "भाभी..." नीलम ने लिखा, "क्या हुआ?" "कुछ नहीं, बस देखता रह गया।"
"आगे भी देखोगे?" उसने पूछा। कुणाल ने लिखा, "दिखाओगी तो।" नीलम ने एक और फोटो ली, इस बार थोड़ा नीचे से। जवाब आया, "मैं अभी निकल रहा हूं।"
"इतनी जल्दी?" नीलम हंसी। "भाभी, आपने आग लगाई है," कुणाल ने लिखा। नीलम ने जवाब दिया, "तो बुझाने आओ।" भेजते ही उसे अपनी हिम्मत पर हैरानी हुई।
अगले बीस मिनट में मैसेज तेज हो गए। कुणाल ने लिखा, "घर आकर सबसे पहले क्या करूं?" नीलम ने जवाब दिया, "दरवाज़ा बंद करना।" "उसके बाद?" "मुझे देखना।"
"कैसे देखूं?" उसने पूछा। नीलम ने लिखा, "जैसे अभी फोटो में देख रहे थे।" कुणाल बोला, "फोटो में तो बस झलक थी।" नीलम ने जवाब दिया, "तो पूरी देख लेना।"
कुणाल ने वॉइस नोट भेजा। उसकी आवाज़ में हंफनी थी। "भाभी, मैं बाइक पर हूं। बीस मिनट।" नीलम ने जवाब में वॉइस नोट भेजा, "जल्दी आओ, मैं इंतज़ार कर रही हूं।"
नीलम उठी और मुख्य दरवाज़े की ओर बढ़ी। दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि कान में आवाज़ आ रही थी। घंटी बजी।
उसने दरवाज़ा खोला। कुणाल सामने खड़ा था, पसीने में भीगा शर्ट, बैग कंधे पर। उसकी आंखें नीलम की नाइटी पर टिकीं। "भाभी," उसने धीरे से कहा।
नीलम ने उसे अंदर खींचा और दरवाज़ा बंद करके कुंडी लगाई। "बैग रखो," उसने कहा। कुणाल ने बैग सोफे पर फेंका और उसकी ओर बढ़ा।
"तुम सच में आ गए," नीलम ने कहा। कुणाल मुस्कुराया, "भाभी बुलाए और देवर न आए?" उसने नीलम का हाथ पकड़ा।
कुणाल ने उसके गाल को छुआ। नीलम ने आंखें बंद कर लीं। उसने उसके बालों में उंगली फिराई, बिल्कुल वैसे जैसे मैसेज में लिखा था।
"तुम्हें याद है तुमने क्या लिखा था?" नीलम ने फुसफुसाकर पूछा। कुणाल ने उसके गाल चूमे। "सब याद है, भाभी।"
उसने नीलम के होंठों पर अपने होंठ रखे। पहला चुंबन धीमा था, फिर तेज हो गया। नीलम ने उसकी शर्ट पकड़ ली।
कुणाल ने उसे दीवार से लगाया। उसके हाथ नीलम की कमर पर थे। नाइटी का कपड़ा पतला था और नीलम को उसकी उंगलियों की गर्मी साफ महसूस हो रही थी।
"कमरे में चलें?" कुणाल ने पूछा। नीलम ने उसका हाथ पकड़ा और बेडरूम की ओर बढ़ी। दरवाज़ा बंद किया।
बिस्तर पर बैठकर नीलम ने कुणाल को देखा। "अब बताओ, आगे क्या?" कुणाल ने शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। "आगे यही कि भाभी की शैतानी पूरी होगी।"
शर्ट उतरते ही नीलम की नज़र उसकी छाती पर टिकी। कुणाल ने नाइटी के स्ट्रैप को उंगली से छुआ। "उतार दूं?" नीलम ने सिर हिलाया।
स्ट्रैप कंधों से सरके और नाइटी नीचे खिसक गई। नीलम अब सिर्फ अंदरूनी कपड़ों में थी। कुणाल की सांस तेज हो गई।
"भाभी, आप बहुत सुंदर हो," उसने कहा। नीलम ने उसे अपनी ओर खींचा। "झूठ मत बोलो, काम की बात करो।" दोनों हंस पड़े।
कुणाल ने उसके टॉप के हुक खोले। नीलम के भारी दूध सामने आए। कुणाल ने उन्हें हाथों में लिया और धीरे से दबाया।
नीलम के मुंह से सिसकी निकली। "धीरे," उसने कहा। कुणाल ने एक दूध मुंह में लिया और चूसने लगा। नीलम ने उसके बाल पकड़ लिए।
वह बारी बारी से दोनों दूध चूसता रहा। नीलम की चूत गीली होने लगी। उसने कुणाल का सिर दबाया। "बस, अब नीचे," वह फुसफुसाई।
कुणाल नीचे सरका। उसने नीलम की पैंटी को उंगली से छुआ। गीलापन साफ महसूस हो रहा था। "भाभी तो पहले से तैयार हैं," वह मुस्कुराया।
उसने पैंटी उतारी। नीलम की चिकनी चूत सामने थी। कुणाल ने उसे देखा और फिर जीभ से चाटा। नीलम की कमर उछल गई।
"कुणाल," वह चीखी। कुणाल ने उसकी जांघें पकड़ीं और चूत को चूसने लगा। उसकी जीभ अंदर बाहर हो रही थी।
नीलम बिस्तर की चादर पकड़े थी। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। कुणाल उसे चाटता रहा, कभी धीरे कभी तेज।
"मैं झड़ने वाली हूं," नीलम ने कहा। कुणाल ने जीभ और तेज चलाई। नीलम का बदन कांपा और वह पहली बार झड़ गई।
वह हांफ रही थी। कुणाल ऊपर आया और उसके होंठ चूमे। नीलम को अपने पानी का स्वाद उसके मुंह में महसूस हुआ।
"अब मेरी बारी," नीलम ने कहा। उसने कुणाल की पैंट का बटन खोला। उसका लंबा मोटा लंड बाहर आया, तना हुआ।
नीलम ने उसे हाथ में लिया। गर्म और सख्त। उसने धीरे से हिलाया। कुणाल ने आंखें बंद कर लीं।
उसने लंड को मुंह में लिया। पहले टोपा चूसा, फिर धीरे धीरे अंदर लिया। कुणाल के मुंह से आवाज़ निकली।
नीलम उसे चूसती रही। उसका हाथ लंड के नीचे वाले हिस्से को सहला रहा था। कुणाल ने उसके बाल पकड़े।
"भाभी, बस, अब नहीं," कुणाल ने कहा। "क्यों?" नीलम ने पूछा। "अभी झड़ जाऊंगा," वह हंसा।
नीलम लेट गई और टांगें फैलाईं। "तो आओ," उसने कहा। कुणाल उसके ऊपर आया। लंड चूत के मुंह पर था।
उसने धीरे से धक्का दिया। लंड चूत में घुसा। नीलम ने सांस रोकी। "पूरा डालो," उसने कहा।
कुणाल ने पूरा लंड अंदर डाला। नीलम की चूत उसे कसकर पकड़े थी। वह धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा।
चुदाई शुरू हो गई थी। कुणाल की कमर हिल रही थी। नीलम ने उसकी पीठ पकड़ी। "और तेज," वह बोली।
कुणाल ने रफ्तार बढ़ाई। बिस्तर हिलने लगा। नीलम की सिसकियां कमरे में गूंज रही थीं।
कुणाल ने उसे पलटा। अब नीलम घोड़ी बनी थी। कुणाल पीछे से आया और लंड चूत में डाला।
इस पोजीशन में लंड और गहरा जा रहा था। नीलम ने तकिया पकड़ा। कुणाल ने उसके दूध पकड़े और धक्के मारने लगा।
"हां, ऐसे ही," नीलम चीखी। कुणाल की उंगलियां उसके दूध मसल रही थीं। चुदाई तेज हो गई।
नीलम दूसरी बार झड़ने वाली थी। उसकी चूत ने लंड को कस लिया। "मैं आ रही हूं," वह बोली।
फिर नीलम ऊपर आई। वह कुणाल के ऊपर बैठी और लंड को अपनी चूत में लिया। अब वह खुद हिल रही थी।
उसके दूध उछल रहे थे। कुणाल ने उन्हें पकड़ा। नीलम तेज तेज ऊपर नीचे हो रही थी।
"भाभी, आप तो कमाल हो," कुणाल ने कहा। नीलम मुस्कुराई। "देवर भी कुछ कम नहीं।"
कुणाल झड़ने वाला था। "भाभी, मैं आने वाला हूं," उसने कहा। नीलम ने रफ्तार बढ़ाई।
कुणाल ने लंड बाहर निकाला और नीलम के पेट पर झड़ गया। गर्म पानी की धार। नीलम ने उसे देखा।
दोनों हांफ रहे थे। कुणाल नीलम के बगल में लेट गया। उसने उसे बांहों में लिया।
"तो भाभी की शैतानी पूरी हुई?" कुणाल ने पूछा। नीलम ने उसके सीने पर सिर रखा। "पूरी तो हुई, लेकिन..."
"लेकिन क्या?" कुणाल ने पूछा। नीलम बोली, "लेकिन ये वॉइस नोट वाली गलती दोबारा नहीं होगी।" कुणाल हंसा।
शाम के सात बज रहे थे। बाहर हल्की हवा चल रही थी। नीलम उठी और नाइटी पहनी।
रसोई में नीलम चाय बना रही थी। कुणाल पीछे से आया और उसे गले लगाया। "क्या कर रहे हो?" नीलम हंसी।
चाय पीते हुए दोनों सोफे पर बैठे। कुणाल ने नीलम का हाथ पकड़ा। "भाभी, एक बात कहूं?"
"कहो," नीलम ने कहा। "अगली बार वॉइस नोट सही नंबर पर भेजना," कुणाल मुस्कुराया। "या फिर गलत नंबर पर ही भेजना।"
नीलम ने कप रखा और उसकी ओर देखा। "तुम्हें क्या लगता है, अगली बार क्या होगा?" कुणाल ने उसका हाथ दबाया। "वही जो आज हुआ, बस थोड़ा और।"
रात के ग्यारह बज रहे थे। घर में सन्नाटा था। नीलम अपने कमरे में लेटी थी, लेकिन नींद आंखों से कोसों दूर थी। शाम वाली चुदाई की याद बार बार आ रही थी।
तभी दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। नीलम का दिल धड़क उठा। "कौन?" उसने धीरे से पूछा। "मैं," कुणाल की आवाज़ आई। "दरवाज़ा खोलो, भाभी।"
नीलम ने दरवाज़ा खोला। कुणाल सिर्फ लोअर और बनियान में था। उसकी आंखों में वही शरारत थी जो दोपहर में थी। "नींद नहीं आ रही?" उसने पूछा।
"तुम्हें कैसे पता?" नीलम बोली। कुणाल अंदर आया और दरवाज़ा बंद किया। "क्योंकि मुझे भी नहीं आ रही।" वह बिस्तर पर बैठ गया।
नीलम ने दरवाज़ा अंदर से बंद किया। "अगर कोई आ गया तो?" कुणाल मुस्कुराया, "घर में हमारे अलावा है ही कौन? भैया लखनऊ में हैं।"
वह नीलम के पास आया। नीलम ने उसकी बनियान उतारी। उसकी छाती पर हाथ फिराया। कुणाल ने नीलम की नाइटी का स्ट्रैप सरकाया।
"दोपहर में मज़ा आया था?" कुणाल ने पूछा। नीलम ने उसके होंठ चूमे। "इतना कि अब दोबारा चाहिए।" कुणाल हंसा, "भाभी की फरमाइश सिर आंखों पर।"
उसने नीलम को बिस्तर पर लिटाया और उसकी नाइटी उतारी। नीलम की नंगी चूत चमक रही थी। कुणाल ने उंगली डाली। "अभी से गीली हो?"
"तुम्हें देखकर हो जाती हूं," नीलम बोली। कुणाल ने उंगली अंदर बाहर की। नीलम सिसकने लगी। उसने दूसरी उंगली भी डाली।
"धीरे," नीलम ने कहा। कुणाल ने उंगलियां तेज चलाईं। नीलम की चूत से पानी निकलने लगा। वह उंगलियों पर ही झड़ गई।
"अब लंड चाहिए," नीलम ने कहा। कुणाल ने लोअर उतारा। उसका लंड तना खड़ा था। नीलम ने उसे मुंह में लिया और चूसने लगी।
वह पूरे जोश से चूस रही थी। कुणाल ने उसके बाल पकड़े। "भाभी, धीरे, वरना अभी निकल जाएगा।" नीलम ने आंख मारकर चूसना जारी रखा।
कुणाल ने उसे उठाया और दीवार से लगाया। एक टांग उठाई और लंड चूत में डाल दिया। खड़े खड़े चुदाई शुरू हो गई।
नीलम ने उसकी गर्दन पकड़ी। कुणाल धक्के मार रहा था। "हां, और तेज," नीलम फुसफुसाई। दीवार के उस पार सन्नाटा था।
फिर वह उसे बिस्तर पर लाया। नीलम घोड़ी बनी। कुणाल ने पीछे से लंड डाला और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
उसके धक्कों से नीलम का बदन हिल रहा था। कुणाल ने उसकी कमर पकड़ी। "भाभी, आपकी चूत बहुत टाइट है," वह बोला।
"तो फाड़ दो आज," नीलम ने कहा। कुणाल ने रफ्तार और बढ़ाई। नीलम दूसरी बार झड़ गई। उसकी चीख तकिए में दब गई।
कुणाल भी अब आखिरी मोड़ पर था। उसने लंड बाहर निकाला और नीलम के दूधों पर झड़ गया। गर्म धार उसके सीने पर फैल गई।
दोनों बिस्तर पर गिर पड़े। नीलम ने चादर से खुद को पोंछा। कुणाल ने उसे बांहों में लिया। "अब नींद आएगी?" उसने पूछा।
नीलम ने उसकी छाती पर सिर रखा। "अब आएगी," वह बोली। "लेकिन कल दोपहर फिर यही होगा।" कुणाल हंसा, "भाभी का हुक्म।"
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