हिंदी भाभी सेक्स कहानी: शावर वाली दोपहर
मीरा की आँखें खुलीं तो उसकी साँसें तेज़ थीं और उसकी नाइटी पसीने से चिपकी हुई थी। सपने में किसी के मज़बूत हाथ उसकी कमर को पकड़े थे, कोई गर्म साँस उसकी गर्दन पर थी। यह एक हिंदी भाभी सेक्स कहानी है, और उस रात मीरा का सपना इतना असली था कि जागने पर भी उसकी जाँघों के बीच गीलापन था।
सपने में कोई उसका हाथ पकड़कर अँधेरे कमरे में ले गया था। उसने चेहरा नहीं देखा था, बस मज़बूत बाँहें महसूस की थीं। उन बाँहों ने उसे बिस्तर पर पटका था। उसकी नाइटी फाड़ी थी। फिर वह मुँह उसके दूध पर था, वह हाथ उसकी चूत में था। सपने में मीरा चिल्लाई थी, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। वह झड़ गई थी, सपने में ही, और उसकी चीख के साथ उसकी आँख खुल गई थी।
घड़ी में तीन बज रहे थे। बगल में राजेश नहीं था, वह तीन दिन के टूर पर लखनऊ से बाहर था। मीरा उठी, पानी पीने रसोई में गई। ठंडा पानी गले से उतरते हुए उसने खिड़की से बाहर देखा। गली सुनसान थी। उसके अंदर कुछ बेचैन था, कुछ अधूरा।
सुबह आठ बजे दरवाज़े पर दस्तक हुई। अमन था, उसका देवर। छब्बीस साल का, लंबा, चौड़े कंधे। "भाभी, वो बाथरूम का शावर फिर लीक कर रहा है। प्लंबर को बुलाऊँ?"
मीरा ने उसे देखा। आज पहली बार उसने ग़ौर किया कि अमन अब बच्चा नहीं रहा। उसकी टी-शर्ट उसके सीने से चिपकी थी। "तुम खुद ठीक नहीं कर सकते? तुम तो इंजीनियरिंग कर रहे हो," मीरा ने मज़ाक में कहा।
अमन हँसा। "कोशिश करता हूँ।" वह बाथरूम में घुसा। मीरा दरवाज़े पर खड़ी देखती रही। अमन शावर के नीचे झुका, उसकी पैंट थोड़ी नीचे खिसकी। मीरा की नज़र वहीं अटक गई। उसने जल्दी से नज़र हटाई, लेकिन उसके गाल गर्म हो गए।
सपने की बेचैनी अभी भी उसके अंदर थी। उसने खुद को डाँटा। यह उसका देवर है। लेकिन उसका शरीर उसकी बात नहीं सुन रहा था।
"भाभी, रिंच देना," अमन ने हाथ बढ़ाया। मीरा ने रिंच पकड़ाया। उनकी उँगलियाँ छुईं। एक सेकंड। दोनों ने हाथ खींच लिए।
"हो गया।" अमन खड़ा हुआ। उसके माथे पर पसीना था। "ट्रायल कर लो।"
मीरा ने शावर चलाया। पानी की तेज़ धार। "वाह, तुम तो कमाल हो।" वह मुस्कुराई। अमन भी मुस्कुराया। उनकी नज़रें मिलीं, और इस बार दोनों में से किसी ने नज़र नहीं हटाई।
दोपहर का खाना मीरा ने बनाया। अमन टेबल पर बैठा। "भैया कब आ रहे हैं?"
"परसों।" मीरा ने दाल परोसी। "तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?"
"बस चल रही है।" अमन ने रोटी तोड़ी। "भाभी, आप आज कुछ अलग लग रही हैं।"
मीरा का दिल धड़का। "अलग? कैसी?"
"पता नहीं। अच्छी।" अमन ने नज़रें झुका लीं। उसके कान लाल हो गए।
खाने के बाद मीरा बर्तन धो रही थी। अमन पीछे से गुज़रा। रसोई छोटी थी। उसका शरीर उससे छू गया। मीरा साँस रोककर खड़ी रही। अमन भी रुका। एक पल। दो पल। फिर वह आगे बढ़ गया। लेकिन मीरा ने महसूस किया था, उसकी पैंट के अंदर कुछ कड़ा हो रहा था।
मीरा ने बर्तन रखे और पलटी। "अमन।" वह रुका। "तुम्हें शर्म आती है?" उसने सीधे पूछा।
अमन का चेहरा लाल हो गया। "किस बात की?"
"मुझे ऐसे देखने की। जैसे सुबह देख रहे थे।" मीरा उसके करीब आई। "मैंने देखा था, तुम्हारी नज़र कहाँ थी।"
अमन कुछ नहीं बोला। उसकी साँसें तेज़ थीं।
"बुरा मत मानो," मीरा ने धीरे से कहा। "मुझे अच्छा लगा।" वह उसके इतने करीब थी कि उसकी गर्म साँस अमन के चेहरे पर पड़ रही थी। फिर वह पीछे हटी और बर्तन उठा लिए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
अमन वहीं खड़ा रहा, हक्का-बक्का। मीरा मुस्कुराई। खेल शुरू हो चुका था।
उसका अपना शरीर जवाब दे रहा था। उसकी चूत गीली हो रही थी। उसने नल का पानी चेहरे पर मारा।
शाम को मीरा ने फ़ैसला किया। वह बाथरूम में गई और शावर के नीचे खड़ी हो गई। उसने जानबूझकर दरवाज़ा पूरा बंद नहीं किया। पानी की आवाज़ में उसने अमन का नाम पुकारा। "अमन। ज़रा तौलिया देना।"
अमन तौलिया लेकर आया। दरवाज़ा थोड़ा खुला था। भाप के बीच मीरा की धुंधली आकृति। उसके हाथ काँप रहे थे। उसने तौलिया दरवाज़े से अंदर बढ़ाया।
"अंदर आकर दे दो," मीरा की आवाज़ आई। "मेरे हाथ गीले हैं।"
अमन अंदर आया। मीरा शावर के नीचे खड़ी थी, पानी उसके बदन पर बह रहा था। उसकी नाइटी पारदर्शी हो चुकी थी, उसके बदन से चिपकी हुई। उसके बड़े-बड़े दूध पानी में चमक रहे थे। अमन की साँस रुक गई।
"भाभी..." उसकी आवाज़ फँस गई।
मीरा ने शावर बंद किया। वह उसके करीब आई। पानी की बूँदें उसके चेहरे से टपक रही थीं। "तुम्हें पता है तुम क्या कर रहे हो मेरे साथ?" उसने धीरे से कहा। "सुबह से।"
अमन कुछ नहीं बोला। उसकी छाती तेज़ी से उठ-गिर रही थी।
मीरा ने उसका हाथ पकड़ा और अपने दूध पर रख दिया। "छूकर देखो। डरो मत।"
अमन की उँगलियाँ काँपीं, फिर उन्होंने उसके दूध को दबाया। मीरा ने आँखें बंद कर लीं और कराही। "हाँ। ऐसे ही।"
फिर सब कुछ तेज़ हो गया। अमन ने उसे दीवार से लगा दिया। उसके होंठ उसकी गर्दन पर थे। उसके हाथ उसकी नाइटी को ऊपर खींच रहे थे। मीरा ने उसकी टी-शर्ट उतार दी। उसका सीना, उसके कंधे, सब कुछ वैसा ही था जैसा उसने सुबह देखा था, बस अब छूने को मिल रहा था।
मीरा ने उसकी पैंट का बटन खोला। उसका लंड बाहर आया, कड़ा, लंबा। मीरा ने उसे हाथ में लिया। "इतना बड़ा," वह बुदबुदाई। "किसी लड़की को दिखाया है कभी?"
अमन ने सिर हिलाया। "नहीं।"
"तो आज तुम्हारी पहली बार है," मीरा मुस्कुराई। "मैं सिखाती हूँ।"
वह घुटनों पर बैठ गई। उसने उसके लंड को मुँह में लिया। अमन की टाँगें काँपने लगीं। "भाभी... ओह..." मीरा ने उसे गहराई तक लिया, उसकी जीभ घुमाई। अमन ने दीवार पकड़ ली।
"बस," मीरा उठी। "अब मेरी बारी।" उसने अपनी नाइटी उतार फेंकी। अब वह पूरी नंगी थी। अमन की आँखें उसके बदन पर घूम रही थीं।
मीरा ने उसे शावर के नीचे धकेला और खुद उस पर चढ़ गई। उसने उसके लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठी। वह अंदर गया। मीरा ने ज़ोर से कराहा। "आह।"
"दर्द हो रहा है?" अमन ने पूछा।
"नहीं। मज़ा आ रहा है।" मीरा हिलने लगी। ऊपर-नीचे। उसकी चूत उसके लंड को निगल रही थी। पानी उनके बदनों पर बह रहा था। मीरा की चीखें बाथरूम में गूँज रही थीं।
अमन ने उसकी कमर पकड़ी और नीचे से धक्के देने लगा। "भाभी, आप... आप बहुत..."
"चोदो मुझे," मीरा ने उसके कान में कहा। "ज़ोर से।"
अमन ने रफ़्तार बढ़ा दी। मीरा का बदन हिल रहा था। उसके दूध उछल रहे थे। अमन ने एक को मुँह में ले लिया और चूसा। मीरा पागल हो रही थी।
"मैं आने वाली हूँ," वह चिल्लाई। उसका बदन अकड़ गया। उसकी चूत ने उसके लंड को भींच लिया। वह झड़ गई, लंबी, गहरी।
अमन भी नहीं रुक सका। उसने उसे कसकर पकड़ा और उसके अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया। दोनों हाँफ रहे थे। पानी अभी भी बह रहा था।
रात को खाने के बाद अमन अपने कमरे में जाने लगा। मीरा ने उसका हाथ पकड़ा। "मेरे कमरे में आओ। दरवाज़ा बंद कर लेना।"
बिस्तर पर मीरा ने उसे सिखाया। हर पोज़िशन। पहले वह उसके ऊपर आई, धीरे-धीरे, उसे सिखाते हुए कि कैसे हिलना है। फिर वह नीचे लेटी और अमन को ऊपर आने दिया। अमन की रफ़्तार बढ़ती गई। मीरा ने उसके कंधे पकड़े और उसे गाइड किया। "धीरे। हाँ। अब तेज़।"
फिर मीरा ने उसे पलटा और खुद उसके ऊपर बैठ गई, उसकी पीठ अमन की तरफ़। उसने उसके लंड को अंदर लिया और हिलने लगी। अमन ने उसके दूध पीछे से पकड़े। मीरा ने सिर पीछे टेक दिया। "तुम बहुत जल्दी सीखते हो," वह हाँफते हुए बोली।
फिर पीछे से। मीरा घुटनों पर थी। अमन ने उसे पीछे से लिया। उसके धक्के गहरे थे। मीरा की चीखें तकिए में दब रही थीं। "और ज़ोर से," वह बोली। "डरो मत।"
अमन ने उसकी कमर पकड़ी और पूरी ताक़त से चोदा। मीरा का बदन बिस्तर पर आगे-पीछे हो रहा था। वह दो बार झड़ी। दूसरी बार इतनी तेज़ कि उसकी आँखों में आँसू आ गए।
अमन जल्दी सीख रहा था। उसकी जवानी की ताक़त और मीरा का तजुर्बा, दोनों मिलकर धमाका कर रहे थे।
तीसरी बार जब वे झड़े, तो रात के दो बज रहे थे। मीरा उसकी छाती पर सिर रखकर लेटी थी। "कल फिर?" उसने पूछा।
अमन ने उसे कसकर पकड़ा। "कल फिर। परसों फिर। जब तक भैया नहीं आते।"
मीरा मुस्कुराई। उसने लाइट बंद की। अँधेरे में उसने उसका लंड फिर से हाथ में लिया। "सोने से पहले एक बार और।"
अमन हँसा। "भाभी, आप तो..."
"चुप।" मीरा उसके ऊपर चढ़ गई। "यह मेरी कहानी है। मैं जैसे चाहूँगी, वैसे चलेगी।"
सुबह मीरा जल्दी उठी। अमन अभी सो रहा था, चादर उसकी कमर तक थी। मीरा ने उसे देखा, फिर रसोई में जाकर चाय बनाई। जब अमन बाहर आया, तो दोनों की नज़रें मिलीं। कोई शर्म नहीं थी। कोई अफ़सोस नहीं था।
"चाय पियोगे?" मीरा ने पूछा, जैसे कल कुछ हुआ ही न हो।
अमन ने कप लिया। उनकी उँगलियाँ फिर छुईं। इस बार किसी ने हाथ नहीं खींचा। मीरा ने उसकी आँखों में देखा और धीरे से बोली, "आज रात फिर।"
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