हिंदी चुदाई कहानी: घर वाली दोपहर
अलमारी का पुराना दराज खोला तो धूल की एक परत उड़ी और श्वेता खांस पड़ी। अंदर कपड़ों के नीचे एक पीला पड़ा लिफाफा दबा था जिस पर निखिल की जानी पहचानी लिखावट में उसका नाम लिखा था। लिफाफा खोलते ही पहला ही जुमला पढ़कर उसके गाल तपने लगे। उस पल उसे लगा जैसे कोई हिंदी चुदाई कहानी उसकी अपनी जिंदगी के पन्नों से बाहर निकल आई हो।
खत छह साल पुराना था। शादी से पहले का। निखिल ने तब लिखा था जब वो उससे अपने दिल की बात कहने से डरता था। श्वेता बिस्तर पर बैठ गई और खत को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उसकी उंगलियां कांप रही थीं।
श्वेता, मैं ये खत तुम्हें कभी दे नहीं पाऊंगा, इसलिए लिख रहा हूं। पहली ही लाइन ने उसे अंदर तक हिला दिया। आगे लिखा था कि वो उसे देखता था और देखता रह जाता था। उसकी हंसी, उसकी चाल, उसके बालों की खुशबू। सब कुछ उसे पागल कर देता था।
खत में निखिल ने वो सब लिखा था जो उसने कभी जुबान से नहीं कहा। रातों को वो उसके बारे में सोचता था। उसके बदन के बारे में। श्वेता की सांसें तेज हो गईं। पांच साल की शादी में उसने निखिल का ये रूप कभी इतना खुलकर नहीं देखा था।
मैं सोचता हूं कि एक दिन तुम मेरी बाहों में होगी और मैं तुम्हें कहीं जाने नहीं दूंगा। ये लाइन पढ़कर श्वेता के बदन में एक लहर दौड़ गई। उसने खत को सीने से लगा लिया। आंखें बंद कीं तो पुराने दिन याद आ गए। वो शामें जब निखिल उसे बस स्टैंड तक छोड़ने आता था और नजरें चुराकर देखता था।
अचानक उसे एहसास हुआ कि उसकी सलवार के अंदर सब कुछ गीला हो चुका था। वो मुस्कुराई। आज रविवार था। निखिल बाजार गया था और दो घंटे से पहले लौटने वाला नहीं था। उसके पास पूरा वक्त था। आज वो निखिल की उस पुरानी ख्वाहिश को सच करेगी। और इस बार पहल वो खुद करेगी।
श्वेता ने अलमारी से निखिल की पसंदीदा लाल साड़ी निकाली। ब्लाउज पहना तो जानबूझकर आखिरी हुक खुला छोड़ दिया। गले में परफ्यूम की दो बूंदें लगाईं। आईने में खुद को देखकर वो खुद ही शरमा गई। आज वो दुल्हन नहीं, शिकारी थी।
खत को उसने तकिए के नीचे छिपा दिया। फिर ड्राइंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गई और साड़ी का पल्लू ढीला कर लिया। घड़ी देखी। अभी एक घंटा बाकी था। उसने टीवी चला दिया पर ध्यान कहीं और था। कान दरवाजे की आहट पर लगे थे।
चाबी के घूमने की आवाज आई तो श्वेता का दिल जोर से धड़कने लगा। निखिल दो थैलियां लिए अंदर आया। पसीने से तर बतर। उसे देखते ही वो रुक गया। श्वेता सोफे पर टांग पर टांग रखे बैठी थी और मुस्कुरा रही थी। इतनी जल्दी आ गए, उसने शरारत से कहा।
निखिल ने थैलियां रखीं और बोला, तुम आज कुछ अलग लग रही हो। श्वेता उठी और तकिए के नीचे से खत निकाल लाई। निखिल का चेहरा देखकर वो हंस पड़ी। उसका चेहरा एकदम पीला पड़ गया था। ये, ये तुम्हें कहां से मिला, वो हकलाया।
श्वेता ने खत खोला और एक लाइन जोर से पढ़ी, मैं सोचता हूं कि एक दिन तुम मेरी बाहों में होगी। निखिल शर्म से लाल हो गया। वो तो बस, पुरानी बेवकूफी थी, उसने कहा। श्वेता उसके करीब आई और उसकी आंखों में देखा। बेवकूफी नहीं, वो बोली, आज मैं तुम्हारी उस ख्वाहिश को पूरा करने वाली हूं।
इससे पहले कि निखिल कुछ कहता, श्वेता ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। ये कोई हल्का चुम्बन नहीं था। उसकी जीभ निखिल के मुंह में घुस गई और वो उसे चूसने लगी। निखिल ने पहले तो हैरानी से उसे पकड़ा, फिर उसके कूल्हों पर हाथ रखकर उसे और करीब खींच लिया।
श्वेता ने उसे धक्का देकर सोफे पर बैठा दिया और खुद उसकी गोद में सवार हो गई। साड़ी का पल्लू पहले ही कंधे से सरक चुका था। निखिल की सांसें तेज हो गईं। श्वेता, ये क्या कर रही हो, वो बोला, पर उसकी आवाज में रोक नहीं, प्यास थी।
चुप, श्वेता ने उसकी शर्ट का पहला बटन खोला। फिर दूसरा। फिर तीसरा। उसकी उंगलियां निखिल की छाती पर फिसल रही थीं। उसने झुककर उसकी गर्दन पर काटा और निखिल कराह उठा। उसकी छाती के बालों में श्वेता की उंगलियां उलझ गईं।
निखिल के हाथ अब श्वेता की कमर पर थे। उसने साड़ी का पल्लू खींचकर नीचे गिरा दिया। ब्लाउज के खुले हुक ने उसका काम आसान कर दिया। ब्लाउज कंधों से सरक गया। काली ब्रा में कसे उसके मम्मे निखिल की आंखों के सामने थे।
निखिल ने ब्रा का हुक खोला और श्वेता के मम्मे आजाद हो गए। उसने एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। श्वेता ने उसका सिर पकड़ लिया और अपने सीने से दबा लिया। और जोर से, वो कराही। निखिल ने दूसरे मम्मे को हाथ से मसलना शुरू कर दिया।
श्वेता नीचे उतरी और निखिल की पैंट की जिप खोली। उसका लंड पहले से तना हुआ था और अंडरवियर में अकड़ रहा था। उसने अंडरवियर नीचे सरकाया और लंड बाहर निकल आया। लंबा, मोटा, नसों से भरा। श्वेता ने उसे हाथ में पकड़ा और ऊपर नीचे हिलाया।
फिर उसने झुककर लंड के टोपे पर जीभ फेरी। निखिल की पूरी देह कांप गई। श्वेता ने धीरे धीरे पूरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी। उसका सिर ऊपर नीचे हो रहा था। निखिल ने सोफे की गद्दी को जोर से पकड़ लिया। श्वेता, मैं, मैं झड़ जाऊंगा, वो कराहा।
श्वेता ने लंड मुंह से निकाला और मुस्कुराई। इतनी जल्दी नहीं, जान। वो उठी और निखिल को सोफे पर लिटा दिया। फिर खुद उसकी टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गई। निखिल ने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। उसकी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी।
निखिल ने पैंटी एक तरफ सरकाई और अपनी जीभ श्वेता की चूत पर रख दी। श्वेता चीख पड़ी। उसकी जीभ अंदर बाहर हो रही थी और श्वेता की टांगें कांप रही थीं। निखिल ने उसकी चूत के दाने को दांतों से हल्के से काटा और श्वेता ने उसका सिर पकड़कर और दबा लिया।
निखिल, बस, अब नहीं सहा जाता, श्वेता चिल्लाई। उसका बदन अकड़ गया और वो जोर से झड़ गई। उसका रस निखिल के चेहरे पर लग गया। निखिल ने उसे चाटकर साफ किया और मुस्कुराया। श्वेता हांफ रही थी। उसकी आंखों में अब भी आग थी।
श्वेता ने निखिल को खींचकर ऊपर किया और खुद सोफे पर लेट गई। उसने टांगें फैला दीं। अब अंदर डालो, वो बोली। निखिल ने अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक ही झटके में अंदर धकेल दिया। श्वेता की चीख निकल गई। उसकी चूत ने लंड को कसकर जकड़ लिया।
निखिल धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। फिर रफ्तार बढ़ा दी। हर धक्के के साथ श्वेता के मम्मे हिल रहे थे। सोफा चरमराने लगा। और तेज, और तेज, श्वेता चिल्ला रही थी। निखिल पसीने से तर था पर रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
अचानक श्वेता ने उसे रोका और पलटी। अब वो निखिल के ऊपर थी। उसने लंड को अपनी चूत में खुद डाला और ऊपर नीचे होने लगी। उसके बाल बिखर गए थे। निखिल ने उसके कूल्हे पकड़ लिए और नीचे से धक्के मारने लगा। श्वेता की आंखें बंद थीं और चेहरे पर मस्ती थी।
तुम्हारा खत पढ़कर मुझे पता चला, श्वेता हांफते हुए बोली, तुम कितने भूखे थे। निखिल ने उसके मम्मे पकड़ लिए और मसलने लगा। श्वेता और तेज हो गई। उसकी चूत से फच फच की आवाजें आ रही थीं। पूरा कमरा उनकी कराहों से गूंज रहा था।
श्वेता फिर पलटी और घुटनों के बल हो गई। उसने अपनी गांड निखिल की तरफ कर दी। निखिल ने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला और उसके बाल पकड़ लिए। वो जोर जोर से धक्के मारने लगा। श्वेता का सिर सोफे की गद्दी में धंसा था और वो चिल्ला रही थी।
हां, ऐसे ही, मेरी चूत को फाड़ दो, श्वेता बेकाबू होकर बोली। निखिल ने उसके कूल्हे पर थप्पड़ मारा और और तेज हो गया। उसकी टांगें कांपने लगीं। श्वेता को लगा कि वो फिर झड़ने वाली है। उसने निखिल का हाथ पकड़कर अपनी चूत के दाने पर रख दिया।
दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे। श्वेता जोर से चीखी और झड़ गई। उसी पल निखिल ने लंड बाहर निकाला और उसका वीर्य श्वेता की पीठ पर गिर पड़ा। गर्म, गाढ़ा। दोनों सोफे पर ढेर हो गए। उनकी सांसें तेज चल रही थीं। पसीने से दोनों तर बतर थे।
कुछ देर तक कमरे में सिर्फ उनकी हांफने की आवाजें गूंजती रहीं। निखिल ने श्वेता को अपनी बाहों में खींच लिया। तुम आज कुछ ज्यादा ही जंगली हो गई हो, वो हंसा। श्वेता ने उसकी छाती पर सिर रखा और बोली, सब उस खत का कमाल है।
निखिल ने खत उठाया और उसे देखा। मैंने ये कभी भेजा ही नहीं। डरता था कि तुम क्या सोचोगी। श्वेता ने उसका हाथ पकड़ा। अच्छा हुआ नहीं भेजा। अगर तब भेज देते तो आज ये दोपहर इतनी खास नहीं होती। निखिल ने उसके माथे को चूमा।
श्वेता उठी और बाथरूम की तरफ जाने लगी। साड़ी उसके बदन से लिपटी थी पर अब वो सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा लग रही थी। दरवाजे पर रुककर वो पलटी। नहाकर आओ, उसने आंख मारकर कहा। अभी खत्म नहीं हुआ है। निखिल की आंखें चमक उठीं।
बाथरूम में श्वेता ने शावर चलाया और साड़ी उतार फेंकी। निखिल अंदर आया तो वो पूरी नंगी खड़ी थी। पानी उसके बदन पर गिर रहा था। निखिल ने उसे दीवार से लगा लिया और उसके होंठों को चूमने लगा। पानी दोनों के बदन पर बह रहा था।
श्वेता ने निखिल का लंड फिर से पकड़ लिया। वो फिर तन चुका था। उसने उसे हिलाना शुरू कर दिया। निखिल ने उसकी एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रख ली और लंड को उसकी चूत में डाल दिया। खड़े खड़े। पानी की धार में। श्वेता ने उसकी पीठ को नाखूनों से खरोंच दिया।
निखिल उसे दीवार से लगाकर जोर जोर से चोदने लगा। श्वेता की चीखें बाथरूम की दीवारों से टकराकर गूंज रही थीं। निखिल, मैं फिर झड़ रही हूं, वो चिल्लाई। उसका बदन अकड़ा और वो तीसरी बार झड़ी। निखिल ने भी उसी पल अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।
दोनों शावर के नीचे खड़े हांफ रहे थे। पानी अब ठंडा हो चुका था पर किसी को परवाह नहीं थी। निखिल ने श्वेता के गीले बालों को पीछे किया और उसके होंठों पर एक लंबा चुम्बन दिया। तुम्हें पता है, वो बोला, आज तुमने मुझे वो खत जीकर सुना दिया।
श्वेता मुस्कुराई और बोली, तो अब हर रविवार को एक नया खत लिखना। और हां, इस बार भेजना मत भूलना। निखिल हंस पड़ा। उसने श्वेता को गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ चल पड़ा। दरवाजे पर पहुंचकर वो रुका और बोला, आज की दोपहर मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा।
रात के ग्यारह बज रहे थे। निखिल बिस्तर पर लेटा टीवी देख रहा था। श्वेता बाथरूम से निकली तो उसने सिर्फ एक पतली नाइटी पहनी थी। अंदर कुछ नहीं था। नाइटी के नीचे उसके मम्मों के निप्पल साफ नजर आ रहे थे।
निखिल ने टीवी बंद कर दिया। तुम आज रुकने का नाम नहीं ले रही, वो मुस्कुराया। श्वेता बिस्तर पर चढ़ी और उसके ऊपर लेट गई। खत वाली दोपहर तो ट्रेलर था, वो फुसफुसाई। असली फिल्म अभी बाकी है।
उसने निखिल का लोअर नीचे खींचा। उसका लंड आधा तना था। श्वेता ने उसे मुंह में लिया और चूसने लगी। निखिल ने उसके बाल पकड़ लिए। उसकी जीभ लंड के टोपे पर घूम रही थी। निखिल की कराहें कमरे में गूंजने लगीं।
श्वेता ने नाइटी उतार फेंकी। अब वो पूरी नंगी थी। वो निखिल के ऊपर बैठी और लंड को अपनी चूत में डाल लिया। धीरे धीरे। पूरी गहराई तक। उसकी आंखें बंद हो गईं। निखिल ने उसके कूल्हे पकड़ लिए।
श्वेता ऊपर नीचे होने लगी। उसके मम्मे निखिल के चेहरे के सामने झूल रहे थे। निखिल ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा। श्वेता की रफ्तार बढ़ गई। बिस्तर चरमराने लगा। पूरा कमरा उनकी सांसों से भर गया।
मैं झड़ने वाली हूं, श्वेता चिल्लाई। उसका बदन अकड़ गया। निखिल ने उसे पलटकर नीचे लिटाया और खुद ऊपर आ गया। उसने लंड को और गहरा धकेला। दोनों एक साथ झड़े। श्वेता की चीख उसके कंधे में दब गई।
निखिल उसके ऊपर ही लेटा रहा। दोनों पसीने से तर थे। श्वेता ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा, कल सुबह भी एक खत मिलेगा। निखिल हंसा। इस बार भेजना मत भूलना, वो बोला। श्वेता ने उसे जोर से भींच लिया।
कुछ देर बाद श्वेता उठी और निखिल के लिए पानी लाई। निखिल ने उसे खींचकर फिर अपने पास लिटा लिया। तुम्हें पता है, उसने कहा, छह साल पहले ये खत लिखते वक्त मैंने सोचा भी नहीं था कि एक दिन तुम खुद इसे सच कर दोगी। श्वेता मुस्कुराई। अब सो जाओ, उसने कहा, कल सुबह एक नया खत तुम्हारा इंतजार करेगा। निखिल ने उसकी हथेली चूमी और दोनों एक दूसरे की बाहों में सो गए।
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