हिंदी कामुक कथा: दिल्ली डायरी, भाग 1
यह हिंदी कामुक कथा दिल्ली के एक पुराने फ्लैट से शुरू होती है, जहाँ नैना कपूर नाम की एक औरत पहली बार अपने नए घर की चाबी घुमाती है और दरवाजा खोलते ही उसे लगता है कि इस घर में पहले भी कोई कहानी रह चुकी है। नैना चौंतीस साल की मैगजीन एडिटर है, उसका पति तीन महीने के लिए बाहर गया हुआ है, और उसने यह फ्लैट इसलिए लिया है क्योंकि यहाँ उसे अकेले लिखने और सोचने की जगह मिलेगी। फ्लैट छोटा है, पर उसकी खिड़कियों से शाम की रोशनी अंदर आती है, दीवारों पर पुराना पेंट है, और एक कोने में लकड़ी की अलमारी रखी है जिसके एक दराज में कुछ अटका हुआ लगता है। नैना ने दराज को जोर से खींचा तो अंदर से एक पुरानी डायरी निकल आई, जिसके पन्ने पीले पड़ चुके थे और जिस पर किसी औरत की लिखावट में छोटे छोटे नोट लिखे थे।
डायरी के पहले पन्ने पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी कि इस घर में जो भी रहता है, वह यहाँ की दीवारों से कुछ छिपा नहीं सकता, और नैना ने हँसकर उस लाइन को नजरअंदाज कर दिया, पर उसकी उँगलियाँ पन्ने पलटती रहीं। डायरी लिखने वाली औरत का नाम अंजलि था, और उसने लिखा था कि वह इस फ्लैट में अपने पड़ोसी से मिलने आती थी, कि वे दोनों शाम को चाय के बहाने मिलते थे और फिर दरवाजा बंद होते ही उनकी दुनिया बदल जाती थी। नैना को यह सब पढ़कर अजीब सी बेचैनी हुई, क्योंकि अंजलि की लिखावट में कोई शर्म नहीं थी, कोई डर नहीं था, बल्कि एक खुली हुई चाहत थी जो हर लाइन में साफ दिखती थी। उसने डायरी बंद करके रख दी, पर रात को बिस्तर पर लेटते ही उसे अंजलि के शब्द याद आने लगे और उसे लगा कि यह घर अब सिर्फ उसका नहीं रहा।
अगली सुबह नैना ने अपने सामान को जमाना शुरू किया, किताबें अलमारी में रखीं, बिस्तर पर नई चादर बिछाई, और खिड़की के पास एक छोटी सी मेज लगाई जहाँ वह अपना काम कर सके। दोपहर को जब वह बालकनी में खड़ी थी, तब सामने वाले फ्लैट का दरवाजा खुला और एक आदमी बाहर निकला जिसके हाथ में कैमरा था और जिसकी आँखें सीधे नैना से टकरा गईं। उसने मुस्कुराकर कहा कि वह रोहन मेहता है, बत्तीस साल का फोटोग्राफर है, और इस बिल्डिंग में पिछले दो साल से रह रहा है। नैना ने भी अपना नाम बताया, और रोहन ने कहा कि यह फ्लैट पहले लंबे समय तक खाली रहा था, क्योंकि यहाँ रहने वाली एक औरत अचानक चली गई थी और उसके बाद कोई भी यहाँ ज्यादा दिन नहीं टिक पाया था।
रोहन की बात सुनकर नैना के मन में डायरी वाली अंजलि का चेहरा घूम गया, पर उसने कुछ कहा नहीं, बल्कि सिर्फ इतना पूछा कि क्या वह औरत अपना कुछ सामान छोड़ गई थी। रोहन ने हँसकर कहा कि उसे नहीं पता, पर इतना जरूर पता है कि उस औरत के जाने के बाद इस फ्लैट की चाबी कई हाथों से गुजरी है। नैना को रोहन की आवाज अच्छी लगी, उसकी बात करने का तरीका सहज था, और जब वह अपने फ्लैट में वापस गई तो उसे लगा कि दिन की शुरुआत में जो अकेलापन था, वह अब थोड़ा कम हो गया है। शाम को उसने फिर डायरी खोली और अंजलि के अगले पन्ने पढ़े, जिनमें उसने लिखा था कि उसका पड़ोसी उसे छत पर मिलने के लिए कहता था, जहाँ वे दोनों देर रात तक बातें करते थे और फिर एक दूसरे के करीब आ जाते थे।
डायरी में अंजलि ने अपने पड़ोसी के बारे में लिखा था कि वह फोटोग्राफर था, कि वह उसे अपनी तस्वीरें दिखाता था, और कि उसकी तस्वीरों में औरतों की आँखें हमेशा कुछ कहती हुई लगती थीं। नैना का दिल जोर से धड़कने लगा, क्योंकि सामने वाले फ्लैट में रहने वाला रोहन भी फोटोग्राफर था, और उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह सिर्फ एक संयोग है या अंजलि की कहानी का कोई हिस्सा अब भी इस बिल्डिंग में जिंदा है। उसने डायरी को तकिए के नीचे रख दिया और खुद को समझाया कि वह एक एडिटर है, उसे कहानियों में डूबने की आदत है, और वह किसी पुरानी डायरी को अपनी जिंदगी से नहीं जोड़ सकती। पर उसी रात जब वह सोने की कोशिश कर रही थी, तब उसे बाहर से किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी, और फिर उसके दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई।
नैना ने दरवाजा खोला तो सामने रोहन खड़ा था, उसके हाथ में एक छोटा सा डिब्बा था जिसमें घर की बनी मिठाई रखी थी, और उसने कहा कि नए पड़ोसी का स्वागत करना इस बिल्डिंग की पुरानी आदत है। नैना ने उसे अंदर बुलाया, चाय बनाई, और दोनों बालकनी में बैठकर बातें करने लगे। रोहन ने बताया कि वह शादी की तस्वीरें भी खींचता है, पर उसे अकेली औरतों की पोर्ट्रेट तस्वीरें खींचना ज्यादा पसंद है, क्योंकि उनमें एक सच्चाई होती है जो भीड़ में छिप जाती है। नैना ने पूछा कि क्या उसने कभी इस फ्लैट में रहने वाली औरत की तस्वीर खींची थी, और रोहन एक पल के लिए चुप हो गया, फिर उसने कहा कि कुछ कहानियाँ तस्वीरों में नहीं, सिर्फ यादों में रहती हैं।
उस रात रोहन के जाने के बाद नैना ने फिर डायरी खोली, और इस बार अंजलि ने लिखा था कि उसका पड़ोसी उसे एक शाम अपने फ्लैट में ले गया था, जहाँ उसने उसकी तस्वीरें खींची थीं, पहले कपड़ों में, फिर बिना किसी झिझक के, और अंजलि को पहली बार लगा था कि उसका शरीर किसी की नजर में खूबसूरत है, न कि सिर्फ एक जिम्मेदारी। नैना ने उन लाइनों को दो बार पढ़ा, और उसके शरीर में एक गर्मी सी दौड़ गई, क्योंकि उसे लंबे समय से किसी ने इस तरह नहीं देखा था, किसी ने उसकी चाहत को इस तरह नहीं समझा था। उसका पति उसे प्यार करता था, पर उनका रिश्ता अब एक आदत बन चुका था, जिसमें बातें कम और काम ज्यादा थे, और नैना को लगता था कि उसकी औरत होने की पहचान धीरे धीरे कहीं खो रही है।
अगले दिन रोहन ने नैना को अपनी कुछ तस्वीरें दिखाने के लिए अपने फ्लैट में बुलाया, और नैना ने हिचकिचाते हुए हाँ कह दी। रोहन का फ्लैट साफ सुथरा था, दीवारों पर बड़ी बड़ी तस्वीरें लगी थीं, और एक कोने में पुराना कैमरा रखा था जिससे वह अब भी कभी कभी तस्वीरें खींचता था। उसने नैना को एक कुर्सी पर बैठने को कहा, और कहा कि वह उसकी एक पोर्ट्रेट तस्वीर खींचना चाहता है, जिसमें कोई बनावट न हो, सिर्फ वह जैसी है वैसी दिखे। नैना पहले हँसी, फिर उसने कहा कि वह फोटो खिंचवाने के लिए तैयार नहीं है, पर रोहन ने धीरे से कहा कि वह सिर्फ उसकी आँखों की तस्वीर लेगा, और नैना ने सिर हिला दिया।
कैमरे की आवाज के बीच नैना को लगा कि रोहन उसे बहुत ध्यान से देख रहा है, कि उसकी नजर उसके चेहरे से नीचे उसके गले तक जाती है और फिर वापस आँखों पर टिक जाती है। रोहन ने कहा कि उसकी आँखों में एक कहानी है जो वह छिपाने की कोशिश करती है, और नैना ने पूछा कि वह कौन सी कहानी है। रोहन ने जवाब दिया कि यह वह कहानी है जिसमें एक औरत अकेलेपन से थक चुकी है और फिर भी मुस्कुराती है, और नैना की आँखें भर आईं, क्योंकि किसी ने लंबे समय बाद उसके अंदर की बात को इतनी सही तरह से पढ़ा था। उसने रोहन की तरफ देखा, और दोनों के बीच एक पल के लिए सन्नाटा छा गया, जिसमें सिर्फ उनकी साँसों की आवाज सुनाई दे रही थी।
रोहन ने धीरे से नैना का हाथ पकड़ा, और नैना ने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा, बल्कि उसकी उँगलियों को अपने हाथ में महसूस किया। रोहन ने कहा कि वह उसे कोई दबाव नहीं देना चाहता, और नैना ने कहा कि उसे दबाव नहीं, बल्कि एक सच्चाई चाहिए, जिसमें वह खुद को छिपाए बिना रह सके। रोहन ने उसके करीब आकर उसके माथे को चूमा, फिर उसके गाल को, और नैना ने आँखें बंद करके उस स्पर्श को महसूस किया। उसके शरीर में लंबे समय बाद एक हलचल हुई, और उसे लगा कि वह फिर से एक औरत की तरह महसूस कर रही है, न कि सिर्फ एक पत्नी या एक एडिटर की तरह।
नैना ने रोहन को अपने फ्लैट में वापस बुलाया, और इस बार दरवाजा बंद होते ही दोनों के बीच की झिझक खत्म हो गई। रोहन ने नैना को दीवार से सटाकर खड़ा किया, उसके बालों को पीछे किया, और उसके होंठों को अपने होंठों से छू लिया। नैना ने भी उसी गर्मी से जवाब दिया, उसके हाथ रोहन की पीठ पर चले गए, और दोनों की साँसें तेज हो गईं। रोहन ने नैना की कुर्ती के बटन धीरे धीरे खोले, और नैना ने उसकी शर्ट को ऊपर उठाकर उसकी छाती को छू लिया। दोनों एक दूसरे के शरीर की गर्मी को महसूस कर रहे थे, और नैना को लगा कि डायरी में पढ़ी हुई हर लाइन अब उसकी अपनी कहानी बन रही है।
रोहन ने नैना को बिस्तर तक ले जाकर लिटाया, और उसके कपड़े एक एक करके उतारने लगा, पहले उसकी कुर्ती, फिर उसकी सलवार, और फिर उसके अंदर के कपड़े, और हर बार वह रुककर उसे देखता था, जैसे वह उसकी इजाजत माँग रहा हो। नैना ने भी रोहन की शर्ट और पैंट उतारने में मदद की, और जब दोनों पूरी तरह एक दूसरे के सामने थे, तो नैना ने रोहन के लंड को अपने हाथ में लिया और उसे धीरे धीरे सहलाने लगी। रोहन ने नैना की चूचियों को अपने हाथों में लिया, उन्हें दबाया, उसके निप्पलों को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा, और नैना की आवाज कमरे में गूँजने लगी।
नैना ने रोहन से कहा कि वह उसे पूरी तरह चाहती है, और रोहन ने उसकी चूत को अपनी उँगलियों से छूकर देखा कि वह पूरी तरह गीली हो चुकी है। रोहन ने अपनी उँगली को अंदर डालकर धीरे धीरे हिलाया, और नैना ने अपनी कमर को ऊपर उठाकर उसका साथ दिया। फिर रोहन ने नैना की टाँगों को फैलाया, अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा, और धीरे से अंदर धकेल दिया। नैना ने एक लंबी साँस ली, और रोहन ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, पहले धीमे, फिर तेज, और नैना की आवाज हर धक्के के साथ बढ़ती गई।
रोहन ने नैना को कई पोजीशन में चोदा, पहले मिशनरी में, फिर उसे अपने ऊपर बिठाकर, जहाँ नैना अपनी कमर को खुद हिलाती रही और रोहन की छाती को चूमती रही, और फिर पीछे से, जहाँ नैना ने तकिया पकड़ रखा था और रोहन ने उसकी कमर को पकड़कर तेज धक्के लगाए। नैना की चूत से पानी निकलने लगा, उसका शरीर काँपने लगा, और उसने रोहन का नाम लेकर कहा कि वह झड़ने वाली है। रोहन ने भी अपनी रफ्तार बढ़ाई, और दोनों एक साथ झड़े, नैना की चूत ने रोहन के लंड को कसकर जकड़ लिया, और रोहन का पानी उसकी चूत के अंदर ही निकल गया। दोनों पसीने में भीगे हुए एक दूसरे से लिपटकर लेट गए, और नैना ने रोहन की छाती पर सिर रखकर कहा कि उसे ऐसा बहुत समय बाद महसूस हुआ है।
उस रात के बाद नैना और रोहन के बीच एक नई समझ बन गई, वे दोनों शाम को मिलते, कभी चाय पीते, कभी तस्वीरें देखते, और फिर दरवाजा बंद होते ही एक दूसरे के शरीर में खो जाते। नैना ने डायरी को फिर पढ़ना शुरू किया, और उसे लगा कि अंजलि की कहानी और उसकी कहानी के बीच एक अजीब सी समानता है, पर वह इस बात को नजरअंदाज करती रही, क्योंकि उसे रोहन के साथ बिताया हर पल सच्चा लगता था। एक शाम जब रोहन उसके फ्लैट में था, तब नैना ने उससे पूछा कि क्या वह अंजलि को जानता था, और रोहन ने एक पल के लिए रुककर कहा कि अंजलि उसकी एक पुरानी दोस्त थी, जो इस फ्लैट में रहती थी और जिसकी तस्वीरें उसने खींची थीं।
नैना को यह सुनकर झटका लगा, पर रोहन ने कहा कि अंजलि के जाने के बाद उसने कभी किसी औरत को इस तरह नहीं देखा था, और नैना पहली औरत है जिसने उसे फिर से कैमरा उठाने पर मजबूर किया है। नैना ने रोहन की बात पर भरोसा कर लिया, पर उसके मन में एक सवाल रह गया कि अंजलि की डायरी में आखिरी पन्ने क्यों फटे हुए थे, और उन पन्नों पर क्या लिखा था। उसने डायरी को ध्यान से देखा, और पाया कि बीच के कुछ पन्ने गायब थे, जैसे किसी ने उन्हें जानबूझकर निकाल लिया हो। नैना ने रोहन से इस बारे में नहीं पूछा, बल्कि उसने खुद उन गायब पन्नों को ढूँढने का फैसला किया।
अगले दिन नैना ने अलमारी के हर दराज को फिर से खंगाला, बिस्तर के नीचे देखा, और पुरानी अलमारी के पीछे एक छोटा सा लिफाफा पाया जिसमें एक तस्वीर रखी थी। तस्वीर में अंजलि और रोहन एक साथ खड़े थे, और अंजलि के हाथ में वही डायरी थी, पर उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी, बल्कि एक अजीब सी उदासी थी। नैना ने तस्वीर को पलटकर देखा तो पीछे लिखा था कि कुछ कहानियाँ खत्म नहीं होतीं, वे सिर्फ अपना चेहरा बदल लेती हैं। नैना का दिल तेजी से धड़कने लगा, और उसे लगा कि वह किसी ऐसी कहानी में फँस रही है जिसका अंत उसे नहीं पता।
उसी शाम रोहन ने नैना को छत पर मिलने के लिए बुलाया, जहाँ वे दोनों पहली बार अकेले में लंबी बातें कर चुके थे। छत पर ठंडी हवा चल रही थी, दूर से शहर की रोशनियाँ दिख रही थीं, और रोहन ने नैना को अपनी एक नई तस्वीर दिखाई जिसमें नैना सोते हुए दिख रही थी, उसके बाल बिखरे हुए थे और उसके चेहरे पर एक सुकून था। नैना ने पूछा कि उसने यह तस्वीर कब खींची थी, और रोहन ने कहा कि उस रात जब वह उसके फ्लैट में रुका था, तब उसने चुपके से यह तस्वीर ली थी। नैना को यह बात अजीब लगी, पर साथ ही उसे यह भी लगा कि रोहन उसे हर पल देखना चाहता है, और यह चाहत उसे डराने के साथ साथ खींच भी रही थी।
छत पर ही रोहन ने नैना को फिर से अपनी बाहों में लिया, उसके होंठों को चूमा, उसके गले को चूमा, और नैना ने भी उसका साथ दिया। दोनों छत की दीवार के सहारे खड़े होकर एक दूसरे को चूमते रहे, रोहन के हाथ नैना की कमर से नीचे उसकी सलवार तक गए, और नैना ने रोहन के लंड को अपने हाथ से दबाकर महसूस किया कि वह फिर से खड़ा हो चुका है। नैना ने रोहन से कहा कि वह उसे यहीं चाहती है, और रोहन ने उसकी सलवार को नीचे खिसकाया, अपनी पैंट खोली, और उसे पीछे से पकड़कर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। छत की खुली हवा में, शहर की रोशनियों के सामने, दोनों ने एक दूसरे को पूरी ताकत से चोदा, नैना की आवाज हवा में घुल गई, और दोनों फिर से एक साथ झड़े।
उस रात नैना जब अपने फ्लैट में वापस आई, तो उसने देखा कि उसकी मेज पर डायरी खुली हुई पड़ी है, हालाँकि उसने उसे बंद करके अलमारी में रखा था। डायरी के खुले पन्ने पर एक नई लाइन लिखी थी, जो पहले वहाँ नहीं थी, और उसमें लिखा था कि नैना, तुम्हारी कहानी अब शुरू हुई है। नैना का शरीर ठंडा पड़ गया, क्योंकि यह लिखावट अंजलि की ही थी, और उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह लाइन किसने लिखी है, कब लिखी है, और इसका मतलब क्या है। उसने डायरी को बंद किया, दरवाजा अंदर से बंद किया, और बिस्तर पर लेट गई, पर उसकी आँखों के सामने बार बार वही लाइन घूम रही थी।
अगली सुबह नैना ने रोहन को फोन करके डायरी वाली बात बताई, और रोहन ने कहा कि वह तुरंत उसके फ्लैट में आ रहा है। रोहन के आने से पहले नैना ने डायरी को फिर खोला, और इस बार उसे एक और पन्ना मिला जो पहले नहीं था, जिसमें लिखा था कि जो औरत इस डायरी को पढ़ती है, वह इस घर की अगली कहानी बन जाती है। नैना ने डायरी को जोर से बंद किया, और तभी उसके दरवाजे पर दस्तक हुई। उसने दरवाजा खोला तो सामने रोहन नहीं, बल्कि एक अनजान औरत खड़ी थी, जिसके हाथ में वही पुरानी डायरी की एक फटी हुई पन्ना थी।
उस औरत ने नैना से कहा कि वह अंजलि की बहन है, और वह अपनी बहन की डायरी के गायब पन्ने ढूँढ रही है, क्योंकि उन पन्नों में एक ऐसा सच लिखा है जो रोहन के बारे में है। नैना ने पूछा कि वह सच क्या है, और उस औरत ने कहा कि वह सच वह उसे तभी बताएगी जब नैना उसे अंदर आने देगी। नैना ने दरवाजा थोड़ा और खोला, और उस औरत ने अंदर कदम रखा, पर उसी पल पीछे से रोहन की आवाज आई, जिसने कहा कि दरवाजा बंद कर दो, यह औरत जो कह रही है वह सच नहीं है। नैना दोनों के बीच खड़ी रह गई, उसके एक हाथ में डायरी थी, दूसरे हाथ में दरवाजे की कुंडी थी, और उसे समझ नहीं आ रहा था कि किसकी बात पर भरोसा करे।
रोहन ने नैना की तरफ बढ़कर कहा कि वह औरत अंजलि की बहन नहीं है, बल्कि एक ऐसी औरत है जो अंजलि की कहानी को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। उस औरत ने हँसकर कहा कि रोहन को डर है कि उसका सच सामने आ जाएगा, और उसने अपने हाथ में पकड़ा हुआ पन्ना नैना की तरफ बढ़ा दिया। नैना ने पन्ना लेने के लिए हाथ बढ़ाया, पर रोहन ने उसका हाथ पकड़ लिया, और दोनों की नजरें एक दूसरे से टकरा गईं। नैना को लगा कि इस पल में उसकी पूरी कहानी दाँव पर लगी है, और उसने धीरे से कहा कि वह पन्ना पढ़कर ही फैसला करेगी।
नैना ने पन्ना अपने हाथ में लिया, और जैसे ही उसने पहली लाइन पढ़ी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया, क्योंकि उस पन्ने पर उसका अपना नाम लिखा था, और नीचे लिखा था कि नैना इस घर में अंजलि की जगह लेने नहीं आई है, बल्कि उसे अंजलि की अधूरी कहानी को पूरा करना है। नैना ने पन्ने को नीचे गिरा दिया, और पीछे हटकर दीवार से सट गई। रोहन ने उसे संभालने की कोशिश की, पर नैना ने उसे रोक दिया और कहा कि उसे अकेला छोड़ दिया जाए। रोहन चुपचाप बाहर चला गया, और वह अनजान औरत भी उसके पीछे पीछे निकल गई, पर जाते जाते उसने कहा कि अगली बार जब डायरी खुलेगी, तो उसमें नैना की कहानी लिखी होगी।
रात को नैना अकेले अपने फ्लैट में बैठी रही, डायरी उसके सामने खुली पड़ी थी, और उसके मन में सैकड़ों सवाल घूम रहे थे। उसे रोहन के साथ बिताए पल याद आ रहे थे, उसकी गर्मी, उसकी आवाज, उसके स्पर्श, और साथ ही उसे अंजलि की चेतावनी भी याद आ रही थी। उसने फैसला किया कि वह इस कहानी से भागेगी नहीं, बल्कि इसका सच जानकर ही रहेगी, चाहे वह सच कितना भी मुश्किल क्यों न हो। उसने डायरी को बंद किया, अपनी चाय बनाई, और बालकनी में खड़ी होकर शहर की रोशनियों को देखने लगी, जहाँ उसे रोहन का फ्लैट भी दिख रहा था, जिसकी बत्ती अब भी जल रही थी।
आधी रात को नैना के दरवाजे पर फिर दस्तक हुई, इस बार धीमी और लंबी, जैसे कोई उसे जगाना चाहता हो, पर डराना नहीं चाहता हो। नैना ने धीरे से दरवाजा खोला, और सामने रोहन खड़ा था, उसके हाथ में डायरी का एक गायब पन्ना था, जिस पर नैना का नाम बड़े अक्षरों में लिखा था। रोहन ने कहा कि वह उसे सब कुछ सच सच बताना चाहता है, पर उससे पहले नैना को यह पन्ना पढ़ना होगा। नैना ने पन्ना अपने हाथ में लिया, और जैसे ही उसने उसे पढ़ने के लिए आँखें झुकाईं, पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया। अगला भाग जल्द आ रहा है।
नैना ने डायरी का वह पन्ना फिर से खोला जिसमें छत वाली रात का जिक्र था, और उसे लगा कि उस रात की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। रोहन ने उससे कहा कि छत पर जो कुछ हुआ था, वह सिर्फ शुरुआत थी, और असली कहानी तो उसके बाद शुरू हुई थी। नैना ने रोहन का हाथ पकड़ा, और दोनों छत की सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर गए, जहाँ ठंडी हवा चल रही थी और शहर की बत्तियाँ दूर तक फैली हुई थीं। रोहन ने नैना को दीवार के सहारे खड़ा किया, उसके बालों को पीछे किया, और उसके होंठों को चूमा, और नैना ने भी उसी गर्मी से जवाब दिया।
रोहन ने नैना की कुर्ती को ऊपर उठाया, उसकी कमर को सहलाया, और नैना ने रोहन की शर्ट के अंदर हाथ डालकर उसकी छाती को छू लिया। दोनों की साँसें तेज हो गईं, और रोहन ने नैना की सलवार को नीचे खिसकाया, अपनी पैंट खोली, और उसे पीछे से पकड़कर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। नैना ने दीवार को पकड़ रखा था, और रोहन ने उसकी कमर को पकड़कर तेज धक्के लगाए, और नैना की आवाज छत की हवा में घुल गई। दोनों ने एक दूसरे को पूरी ताकत से चोदा, और जब दोनों झड़े, तो नैना ने रोहन की छाती पर सिर रखकर कहा कि यह छत वाली रात अब उसकी अपनी कहानी बन गई है।
उस रात के बाद नैना ने डायरी के उस पन्ने पर अपनी एक लाइन लिख दी, जिसमें उसने लिखा कि अब यह कहानी उसकी है, और कोई भी इसे उससे छीन नहीं सकता। रोहन ने वह लाइन पढ़कर मुस्कुराया, और नैना को गले लगा लिया। दोनों छत पर देर तक बैठे रहे, शहर की रोशनियों को देखते रहे, और नैना को लगा कि डायरी की हर अधूरी कहानी अब उसके साथ पूरी हो रही है। रोहन ने नैना का हाथ पकड़ा, और दोनों नीचे अपने फ्लैट में वापस आ गए, जहाँ उनकी कहानी का अगला पन्ना उनका इंतजार कर रहा था।
हिंदी कामुक कथा: दिल्ली डायरी, भाग 2
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