हिंदी कामुक कथा: दिल्ली डायरी, भाग 2
यह हिंदी कामुक कथा वहीं से आगे बढ़ती है जहाँ पिछली रात रुकी थी, जब आधी रात को नैना के दरवाजे पर दस्तक हुई थी और रोहन उसके सामने डायरी का एक गायब पन्ना लेकर खड़ा था, जिस पर नैना का नाम बड़े अक्षरों में लिखा था। नैना ने पन्ना अपने हाथ में लिया ही था कि पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया, और नैना का दिल एक पल के लिए रुक सा गया, क्योंकि उसे लगा कि इस घर की कहानी अब उसके पीछे खड़ी है। उसने धीरे से पीछे मुड़कर देखा तो वहाँ वही औरत खड़ी थी जो दिन में खुद को अंजलि की बहन बताकर आई थी, और उसके चेहरे पर अब कोई घबराहट नहीं थी, बल्कि एक अजीब सी शांति थी, जैसे वह जानती हो कि अब सच छिपाने का कोई फायदा नहीं है।
नैना ने दरवाजा पूरा खोला और तीनों लोग उसके छोटे से फ्लैट के अंदर आ गए, जहाँ डायरी अब भी मेज पर खुली पड़ी थी और चाय के कप ठंडे हो चुके थे। रोहन ने सबसे पहले वह पन्ना नैना के सामने रखा और कहा कि इस पन्ने पर जो कुछ लिखा है, वह सच नहीं है, बल्कि अंजलि की कल्पना का एक हिस्सा है, जिसे वह अपनी डायरी में लिखकर छोड़ गई थी। नैना ने पन्ना पढ़ा तो उस पर लिखा था कि इस घर में आने वाली अगली औरत अंजलि की अधूरी कहानी को पूरा करेगी, और नैना को लगा कि यह लाइन किसी श्राप की तरह नहीं, बल्कि किसी अधूरी कहानी की दुआ की तरह लिखी गई है।
उस औरत ने धीरे से कहा कि उसका नाम कविता है, और वह अंजलि की बहन नहीं है, बल्कि उसकी पुरानी सहेली है, जो उसी फ्लैट में उसके साथ कुछ महीने रही थी। कविता ने बताया कि अंजलि ने यह डायरी अपनी कल्पनाओं से भरी थी, क्योंकि वह एक कहानी लिखना चाहती थी, और रोहन उस कहानी का सिर्फ एक किरदार था, जिसे उसने अपने मन से गढ़ा था। रोहन ने नैना की तरफ देखा और कहा कि उसने अंजलि की कभी कोई मदद नहीं की थी, सिवाय इसके कि जब अंजलि यह शहर छोड़कर जा रही थी, तो उसने उसका सामान नीचे तक पहुँचाने में मदद की थी, और उसी दिन अंजलि ने उसे यह डायरी दिखाकर कहा था कि इस घर की कहानी कभी खत्म नहीं होती है।
कविता ने सिर झुकाकर कहा कि उसने बहन होने का झूठ इसलिए बोला था, क्योंकि वह चाहती थी कि नैना इस फ्लैट को छोड़कर चली जाए, ताकि वह खुद इस फ्लैट में आकर रह सके, क्योंकि उसे लगता था कि इस घर में अंजलि की यादें बसी हुई हैं। नैना ने कविता की बात सुनकर गहरी साँस ली, और उसे लगा कि इतने दिनों से वह जिस डर में जी रही थी, वह सिर्फ एक झूठ की परछाई थी। रोहन ने कविता से कहा कि अब उसे सच बोलने के बाद यहाँ से जाना होगा, और कविता ने बिना कुछ कहे अपना बैग उठाया, दरवाजे की तरफ बढ़ी, और जाते जाते नैना से माफी माँग ली।
दरवाजा बंद होते ही फ्लैट में सिर्फ नैना और रोहन रह गए, और दोनों के बीच की हवा अचानक भारी हो गई, क्योंकि अब कोई डायरी नहीं थी, कोई झूठ नहीं था, सिर्फ दो लोग थे जो एक दूसरे को सच जानने के बाद भी उसी चाहत से देख रहे थे। रोहन ने नैना का हाथ पकड़ा और कहा कि वह उसे यह सब पहले ही बता देना चाहता था, पर डरता था कि नैना उसे भी अंजलि की कहानी का हिस्सा समझकर दूर कर देगी। नैना ने रोहन की आँखों में देखा और कहा कि अब उसे किसी कहानी से डर नहीं लगता है, क्योंकि अब यह कहानी उसकी अपनी है, और वह इसे अपनी मर्जी से लिखेगी।
रोहन ने नैना को अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों को चूम लिया, और नैना ने भी उसी गर्मी से जवाब दिया, जैसे इतने दिनों की उलझन एक ही चुम्बन में पिघल गई हो। रोहन ने नैना की कमर को पकड़ा, उसे दीवार से सटाया, और उसकी गर्दन पर चुम्बनों की लाइन बना दी, और नैना की साँसें तेज हो गईं। नैना ने रोहन की शर्ट के बटन खोले, उसकी छाती पर हाथ फेरा, और रोहन ने नैना की कुर्ती को ऊपर उठाकर उसकी पीठ को सहलाया, और दोनों के शरीर एक दूसरे से सट गए।
नैना ने रोहन को बेडरूम की तरफ खींचा, और दोनों बिस्तर पर गिर पड़े, जहाँ नैना ने रोहन की पैंट खोली और उसका लंड अपने हाथ में लेकर धीरे धीरे सहलाने लगी, और रोहन ने नैना की सलवार को नीचे खिसकाकर उसकी चूत को अपनी उँगलियों से छू लिया। नैना की चूत गीली हो चुकी थी, और रोहन ने अपनी दो उँगलियाँ उसकी चूत में डालकर धीरे धीरे हिलाईं, और नैना ने उसकी कलाई पकड़कर कहा कि अब और इंतजार नहीं होगा। रोहन ने नैना की टाँगों को फैलाया, अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा, और एक झटके में अंदर डाल दिया, और नैना ने उसकी पीठ को अपने नाखूनों से पकड़ लिया।
रोहन ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, और नैना ने अपनी कमर को ऊपर उठाकर हर धक्के का जवाब दिया, और दोनों की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं। रोहन ने नैना के बोबों को अपने हाथों में लेकर दबाया, उसके निप्पलों को चूसा, और नैना ने रोहन के कंधे पर अपने दाँत गड़ा दिए, और फिर हँसकर कहा कि अब वह उसे छोड़ने वाली नहीं है। रोहन ने अपनी रफ्तार बढ़ाई, नैना की टाँगों को अपने कंधों पर रखा, और तेज धक्कों से उसकी चूत को चोदने लगा, और नैना की आँखें बंद हो गईं, उसका मुँह खुल गया, और वह जोर से चिल्लाई कि वह झड़ने वाली है।
नैना का शरीर काँपा, उसकी चूत ने रोहन के लंड को कसकर जकड़ लिया, और उसका पानी निकल गया, और रोहन ने भी उसी पल अपनी रफ्तार और बढ़ाकर अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया, और दोनों एक दूसरे से लिपटकर बिस्तर पर पड़े रहे। नैना ने रोहन की छाती पर सिर रखा, उसकी धड़कन सुनी, और कहा कि अब उसे इस घर से कोई डर नहीं है, क्योंकि इस घर की कहानी अब उसकी है। रोहन ने नैना के बालों को सहलाया, उसके माथे पर चूमा, और दोनों देर तक एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे, जब तक कि सुबह की पहली रोशनी खिड़की से अंदर नहीं आ गई।
सुबह नैना ने चाय बनाई, और दोनों बालकनी में खड़े होकर शहर को देखने लगे, जहाँ सड़क पर लोग चलने लगे थे और धूप धीरे धीरे छतों पर फैल रही थी। नैना ने रोहन से कहा कि वह डायरी को अब बंद करके रख देगी, पर उसके आखिरी पन्ने पर अपनी एक लाइन लिखेगी, ताकि इस घर में आने वाली अगली औरत को पता चले कि यहाँ डरने की कोई बात नहीं है। रोहन ने हँसकर कहा कि वह लाइन नैना को ही लिखनी चाहिए, क्योंकि अब यह कहानी उसी की है, और नैना ने डायरी उठाई, पेन लिया, और आखिरी पन्ने पर लिखा कि इस घर की कहानी अब पूरी हो चुकी है, और जो भी यहाँ आएगा, वह अपनी कहानी खुद लिखेगा।
दोपहर को नैना ने अपना लैपटॉप खोला, अपनी मैगजीन के लिए एक नया लेख लिखना शुरू किया, और रोहन अपने फ्लैट में जाकर अपने कैमरे की तस्वीरें देखने लगा, पर दोनों के बीच की दीवार अब कोई दीवार नहीं लगती थी। शाम को रोहन फिर नैना के फ्लैट में आया, इस बार उसके हाथ में कोई डायरी नहीं थी, बल्कि दो कप चाय थी, और उसने एक कप नैना की तरफ बढ़ा दिया। नैना ने चाय ली, रोहन की तरफ देखा, और कहा कि अब हर शाम चाय इसी तरह पिया करेगी, और रोहन ने मुस्कुराकर कहा कि अब हर शाम की चाय में कोई कहानी छिपी नहीं होगी, सिर्फ दो लोगों की हँसी होगी।
रात को दोनों छत पर गए, जहाँ ठंडी हवा चल रही थी और शहर की बत्तियाँ दूर तक फैली हुई थीं, और रोहन ने नैना को पीछे से गले लगाया, उसकी गर्दन पर चूमा, और नैना ने उसकी बाहों में सिर टिका दिया। रोहन ने नैना की कुर्ती को ऊपर उठाया, उसकी कमर को सहलाया, और नैना ने पीछे मुड़कर रोहन के होंठों को चूम लिया, और दोनों छत की दीवार के सहारे एक दूसरे से सट गए। रोहन ने नैना की सलवार को नीचे खिसकाया, अपना लंड उसकी चूत में पीछे से डाल दिया, और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा, और नैना ने दीवार को पकड़कर अपनी कमर को हिलाया, और दोनों की साँसें छत की हवा में घुल गईं।
रोहन ने नैना के बोबों को पीछे से पकड़कर दबाया, उसकी गर्दन पर चूमा, और नैना ने कहा कि छत पर चोदना उसे अब सबसे ज्यादा पसंद है, क्योंकि यहाँ शहर की रोशनियों के सामने उनकी कहानी खुली हुई लगती है। रोहन ने अपनी रफ्तार बढ़ाई, नैना की चूत को तेज धक्कों से चोदा, और नैना ने जोर से कहा कि वह फिर झड़ रही है, और उसका पानी रोहन के लंड पर बह गया। रोहन ने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया, और दोनों छत पर एक दूसरे से लिपटकर बैठ गए, शहर की रोशनियों को देखते रहे, और नैना ने कहा कि अब यह छत भी उसकी कहानी का हिस्सा बन गई है।
नीचे आकर नैना ने डायरी को अलमारी के दराज में वापस रख दिया, पर इस बार दराज में डायरी के साथ उसकी अपनी लिखी हुई लाइन भी थी, और नैना को लगा कि अब यह दराज किसी और की कहानी नहीं, बल्कि उसकी अपनी कहानी का पहला पन्ना है। रोहन ने नैना का हाथ पकड़ा, उसे बिस्तर तक ले गया, और दोनों ने एक दूसरे को गले लगाकर सोने की तैयारी की, और नैना ने सोने से पहले रोहन से कहा कि कल सुबह वह उसे अपनी मैगजीन का नया लेख पढ़कर सुनाएगी। रोहन ने नैना के माथे पर चूमा, बत्ती बुझाई, और दोनों एक दूसरे की बाहों में सो गए, और दिल्ली की वह रात अब किसी डायरी की कहानी नहीं रही, बल्कि दो लोगों की अपनी हकीकत बन गई।
अगली सुबह नैना जल्दी उठ गई, और उसने देखा कि रोहन अब भी सो रहा है, उसकी छाती धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही है, और उसके चेहरे पर रात की थकान और सुकून दोनों साफ दिख रहे हैं। नैना ने धीरे से उसके बालों को सहलाया, और रोहन ने नींद में ही उसका हाथ पकड़ लिया, और उसे अपने पास खींच लिया। नैना ने उसके कान में कहा कि सुबह हो गई है, चाय बनाती हूँ, और रोहन ने आँखें खोले बिना कहा कि चाय बाद में, पहले तुम यहीं रहो। नैना हँसकर उसके पास लेट गई, और दोनों सुबह की धूप में एक दूसरे से लिपटे रहे, जब तक कि बाहर से दूध वाले की आवाज नहीं आ गई।
चाय पीने के बाद दोनों छत पर गए, जहाँ रात की ठंडी हवा अब सुबह की हल्की धूप में बदल गई थी, और रोहन ने नैना को पीछे से गले लगाकर कहा कि आज की सुबह उसकी जिंदगी की सबसे अच्छी सुबह है। नैना ने पीछे मुड़कर उसे चूमा, और रोहन ने उसकी कमर को पकड़कर उसे दीवार के सहारे खड़ा किया, और उसकी गर्दन पर चुम्बनों की लाइन बना दी। नैना की साँसें तेज हो गईं, उसने रोहन की शर्ट के अंदर हाथ डालकर उसकी छाती को छू लिया, और रोहन ने उसकी कुर्ती को ऊपर उठाकर उसकी पीठ को सहलाया। दोनों की सुबह की चाहत रात से कम नहीं थी, और छत पर शहर की आवाजों के बीच उनकी अपनी दुनिया फिर से शुरू हो गई।
रोहन ने नैना की सलवार को नीचे खिसकाया, अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया, और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा, और नैना ने दीवार को पकड़कर अपनी कमर को हिलाया, और सुबह की धूप में दोनों का पसीना चमकने लगा। रोहन ने नैना के बोबों को पकड़कर दबाया, उसकी गर्दन पर चूमा, और नैना ने कहा कि सुबह सुबह चोदना उसे अब सबसे ज्यादा पसंद है, क्योंकि दिन की शुरुआत ही ऐसी हो तो पूरा दिन अच्छा जाता है। रोहन ने अपनी रफ्तार बढ़ाई, नैना की चूत को तेज धक्कों से चोदा, और नैना ने जोर से कहा कि वह झड़ रही है, और उसका पानी रोहन के लंड पर बह गया। रोहन ने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया, और दोनों छत पर एक दूसरे से लिपटकर बैठ गए, और नैना ने कहा कि अब हर सुबह ऐसी ही होगी।
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