पापा से चुदवाने की मेरी कहानी: पापा के लंड से मेरी चूत की पहली चुदाई
पापा, आप सच में नहीं जानते कि मैं आपको कैसे देखती हूँ, मैंने धीमी आवाज में कहा और थाली नीचे रख दी। पापा से चुदवाने की मेरी कहानी आज रात से शुरू नहीं हुई थी, वह बरसों से मेरे दिल में पल रही थी। मैं निशा हूँ, उनतीस साल की, और मेरे सामने बैठे मेरे पापा सुरेश पचपन साल के हैं। मम्मी अपनी बहन के घर दो दिन के लिए गई हुई हैं, और इस खाली घर में पहली बार हम दोनों अकेले थे।
तुम क्या कह रही हो निशा, पापा ने चौंककर कहा और उनका हाथ कांप गया। मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा कि मैं अब बच्ची नहीं हूँ, मैं एक औरत हूँ। पापा ने लंबी सांस ली और बोले कि यह बात कहना भी पाप है। मैंने हंसकर कहा कि पाप तो तब होता जब मन में कुछ हो और झूठ बोला जाए।
रात का खाना ठंडा हो रहा था, पर हम दोनों की भूख कहीं और थी। पापा ने धीरे से कहा कि उन्होंने भी मुझे कई बार ऐसी नजर से देखा है जिससे वह खुद शर्मिंदा हो जाते थे। मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा कि शर्म की कोई बात नहीं है, हम दोनों बड़े हैं। पापा की उंगलियाँ मेरी हथेली पर कांप रही थीं, पर उन्होंने हाथ पीछे नहीं खींचा।
मैंने कहा, पापा, आप बताइए, क्या आपने कभी मुझे अपनी पत्नी की तरह सोचा है। पापा चुप हो गए, फिर बोले कि हाँ, कई रातों को उन्होंने सपनों में मुझे अपनी बाहों में देखा है। मेरी सांस तेज हो गई और मैंने कहा कि तो फिर आज वह सपना सच कर लीजिए। पापा ने कहा कि अगर यह गलत हुआ तो मैं उन्हें कभी माफ नहीं करूंगी, और मैंने कहा कि गलत वह होता जो जबरदस्ती हो।
हम दोनों ने एक दूसरे की आँखों में सहमति देख ली थी, कोई दबाव नहीं था, कोई जल्दबाजी नहीं थी। पापा ने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मेरे माथे को चूमा। मैंने उनके गाल को छुआ और कहा कि मैं यही चाहती हूँ, पूरी तरह से। पापा ने धीरे से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और वह पहला चुंबन लंबा और गर्म था।
जयपुर के इस पुराने घर में शाम ढल रही थी और बाहर की गली में आवाजें धीरे धीरे कम हो रही थीं। हम डाइनिंग टेबल से उठे और मैं पापा का हाथ पकड़कर अपने कमरे की ओर ले गई। पापा ने कहा कि तुम्हारा कमरा तुम्हारी दुनिया है, और मैंने कहा कि आज से यह हमारी दुनिया है। दरवाजा बंद करते ही मैंने पापा को दीवार से लगा लिया।
मैंने पापा की कुर्ते की बटनें एक एक करके खोलीं और उनकी चौड़ी छाती पर हाथ फेरा। पापा ने मेरी साड़ी का पल्लू धीरे से नीचे सरकाया और मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे स्तनों को सहलाया। मैंने सिसकी ली और कहा कि पापा, ऐसे ही छूते रहिए, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। पापा ने मेरे कान के पास फुसफुसाकर कहा कि तुम बहुत सुंदर लग रही हो।
मैंने पापा का कुर्ता उतार दिया और उनकी पीठ पर अपनी उंगलियाँ फिराईं। पापा ने मेरा ब्लाउज खोल दिया और मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे निप्पल्स को मसलने लगे। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनकी छाती पर अपना सिर टिका दिया। पापा ने मेरी ब्रा का हुक खोला और मेरे नंगे स्तनों को अपने हाथों में भर लिया।
पापा, आपके हाथ बहुत गर्म हैं, मैंने कहा और उनके होंठों को अपने स्तन पर महसूस किया। पापा ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और धीरे धीरे चूसने लगे। मैं उनके बालों में उंगलियाँ फिरा रही थी और बार बार उनका नाम ले रही थी। दूसरे स्तन को वह अपने हाथ से दबा रहे थे और मैं सिसकियाँ भर रही थी।
मैंने पापा की धोती की गांठ खोली और उनका पजामा नीचे सरका दिया। उनका लंड पहले से ही खड़ा था और मेरी हथेली में आते ही और सख्त हो गया। मैंने उसे धीरे से सहलाया और कहा कि पापा, यह तो बहुत बड़ा और गर्म है। पापा ने हंसकर कहा कि यह तुम्हारे लिए ही इतने सालों से तरस रहा था।
मैं घुटनों पर बैठ गई और पापा के लंड को अपने मुँह में लेने से पहले उसे चूम लिया। मैंने उसकी नोक को अपनी जीभ से चाटा और फिर धीरे धीरे उसे अंदर लिया। पापा ने मेरे सिर पर हाथ रखा और कहा कि बेटा, धीरे से, मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उनकी बात मानकर धीरे धीरे चूसना जारी रखा और उनके लंड का स्वाद मेरी जीभ पर घुल गया।
पापा की सांसें तेज हो गई थीं और वह बार बार मेरे बाल सहला रहे थे। मैंने उनका लंड और गहराई तक लिया और अपने होंठों को कसकर उसके चारों ओर लपेट लिया। पापा ने कहा कि निशा, बस अब रुक जाओ, वरना मैं अभी झड़ जाऊंगा। मैंने मुस्कुराकर लंड को छोड़ा और खड़ी हो गई।
मैंने अपनी साड़ी पूरी तरह उतार दी और पेटीकोट भी नीचे गिरा दिया। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली थी और मेरी जांघों पर उसका पानी लग रहा था। पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी टांगें फैलाकर मेरी चूत को देखने लगे। उन्होंने कहा कि तुम्हारी चूत बहुत सुंदर और गुलाबी है।
पापा ने मेरी चूत पर अपनी जीभ रखी और धीरे धीरे चाटने लगे। मैंने बिस्तर की चादर कसकर पकड़ ली और अपनी कमर ऊपर उठा दी। पापा की जीभ मेरी चूत के अंदर बाहर हो रही थी और मैं जोर जोर से सिसक रही थी। उन्होंने मेरी चूत के दाने को चूस लिया और मैं एकदम से कांप गई।
पापा, और कीजिए, मुझे और चाहिए, मैंने कहा और अपनी टांगें और फैला दीं। पापा ने मेरी चूत में अपनी एक उंगली डाली और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे। फिर उन्होंने दूसरी उंगली भी डाल दी और मेरी चूत का पानी उनकी उंगलियों पर बहने लगा। मैं चिल्ला पड़ी कि पापा, मैं झड़ने वाली हूँ।
मेरी चूत से पानी निकल गया और मेरा पूरा शरीर कांप उठा। पापा ने मेरी चूत को चाटकर साफ किया और मेरे ऊपर आ गए। उन्होंने कहा कि अब असली चुदाई का समय है, और मैंने कहा कि हाँ पापा, अब मुझे अपनी बना लीजिए। पापा ने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा।
पापा ने धीरे से धक्का दिया और उनका लंड मेरी चूत में थोड़ा अंदर गया। मैंने दर्द और मजे की मिली हुई सिसकी ली और कहा कि पापा, धीरे से कीजिए। पापा ने रुककर मुझे चूमा और फिर एक और धक्का दिया। उनका लंड अब मेरी चूत में आधा अंदर था और मैं उनकी पीठ को नाखूनों से खरोंच रही थी।
तीसरे धक्के में पापा का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया और मैंने जोर से आह भरी। पापा ने कहा कि निशा, तुम्हारी चूत बहुत टाइट है, मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने कहा कि पापा, आपकी बेटी की चूत आज पहली बार आपके लंड से खुल रही है। पापा ने मेरी बात सुनकर और जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
बिस्तर हिलने लगा और हमारी सांसें एक दूसरे में घुल गईं। पापा कभी धीरे और कभी तेज धक्के लगा रहे थे और मैं हर धक्के पर उनका नाम ले रही थी। मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पर लपेट लीं और उन्हें और अंदर खींच लिया। पापा ने मेरे स्तनों को चूसते हुए चुदाई जारी रखी।
कुछ देर बाद पापा ने मुझे अपने ऊपर आने को कहा और मैं उनके लंड पर बैठ गई। मैंने धीरे धीरे ऊपर नीचे होना शुरू किया और मेरी चूत उनके लंड को कसकर जकड़ रही थी। पापा नीचे से धक्के लगा रहे थे और मेरे स्तनों को दोनों हाथों से दबा रहे थे। मैं उनकी गोद में उछल रही थी और बार बार कह रही थी कि पापा, बहुत अच्छा लग रहा है।
मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और मेरी चूत से गीला पानी पापा के पेट पर बहने लगा। पापा ने कहा कि बेटा, तुम बहुत गर्म हो, तुम मुझे पागल कर रही हो। मैंने उनके होंठ चूमे और कहा कि पापा, आप भी बहुत गर्म हैं, आपका लंड मेरी चूत को पूरा भर रहा है। हम दोनों पसीने से भीग गए थे और कमरे में सिर्फ हमारी सिसकियों की आवाज थी।
पापा ने मुझे फिर से नीचे लिटाया और मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं। इस पोजीशन में उनका लंड मेरी चूत में और गहराई तक जा रहा था। हर धक्का मेरी चूत की दीवारों से टकरा रहा था और मैं चिल्ला रही थी। पापा ने कहा कि निशा, मैं अब ज्यादा देर नहीं रुक पाऊंगा। मैंने कहा कि पापा, मेरे अंदर ही झड़ जाइए।
पापा के धक्के और तेज हो गए और मेरी चूत फिर से झड़ने लगी। मेरा पानी उनके लंड पर बह गया और मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। उसी पल पापा ने जोर से चिल्लाकर अपना सारा वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। उनका लंड मेरी चूत में कांप रहा था और हम दोनों हांफते हुए एक दूसरे से लिपट गए।
हम काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे, पापा का लंड अभी भी मेरी चूत में था। मैंने पापा के सीने पर सिर रखा और कहा कि पापा, यह मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी रात है। पापा ने मेरे माथे को चूमा और कहा कि बेटा, तुमने मुझे फिर से जवान कर दिया है। मैंने हंसकर कहा कि अभी रात बाकी है।
थोड़ी देर बाद पापा का लंड फिर से खड़ा होने लगा और मैं मुस्कुरा दी। मैंने कहा कि पापा, चलिए अब आपके कमरे में चलते हैं, वहाँ का बिस्तर बड़ा है। पापा ने मुझे गोद में उठा लिया और हम दोनों नंगे ही उनके कमरे की ओर चल दिए। गलियारे में ठंडी हवा मेरी नंगी पीठ को छू रही थी और मैं पापा की गर्दन चूम रही थी।
पापा के कमरे में पहुँचते ही पापा ने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरे ऊपर आ गए। उन्होंने मेरी चूत को फिर से चाटा और मेरी टांगें फैला दीं। मैंने कहा कि पापा, इस बार पीछे से कीजिए, मुझे वह भी देखना है। पापा ने मुझे घुटनों पर किया और मेरी कमर पकड़ ली।
पापा ने अपना लंड मेरी चूत में पीछे से डाला और धीरे धीरे धक्के लगाने लगे। मैं अपने हाथों पर झुकी हुई थी और हर धक्के पर आगे पीछे हो रही थी। पापा ने मेरी पीठ पर हाथ फेरा और मेरे बाल पकड़कर मुझे पीछे खींचा। मैंने कहा कि पापा, और तेज, मुझे आपकी पूरी ताकत चाहिए।
पापा ने मेरी बात मानकर तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए और मेरी चूत से आवाजें आने लगीं। मैंने अपने स्तनों को खुद दबाना शुरू कर दिया और पापा का नाम बार बार लिया। पापा ने कहा कि निशा, तुम्हारी चूत पीछे से और भी टाइट लग रही है। मैंने हंसकर कहा कि यह चूत अब सिर्फ आपकी है।
कुछ देर इस पोजीशन में चुदाई के बाद पापा ने मुझे सीधा किया और बिस्तर के किनारे पर बैठा दिया। उन्होंने अपनी गोद में मुझे बिठाया और अपना लंड फिर से मेरी चूत में डाला। मैं उनके सामने बैठकर ऊपर नीचे हो रही थी और हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूम रहे थे। पापा के हाथ मेरी कमर पर थे और वह नीचे से धक्के लगा रहे थे।
रात आधी बीत चुकी थी, पर हमारी आग बुझी नहीं थी। हम दोनों ने एक बार फिर जोरदार चुदाई की और साथ में झड़े। मेरा पानी और पापा का वीर्य मेरी चूत में मिल गया और हम थककर लिपट गए।
पापा ने मुझे चादर ओढ़ाई और कहा कि निशा, कल मम्मी के आने से पहले हम यह बात किसी को नहीं बताएंगे। मैंने कहा कि पापा, यह बात सिर्फ हम दोनों के बीच रहेगी, पर यह रात हर रात दोहराई जाएगी। पापा मुस्कुराए और बोले कि बेटा, तुमने आज मुझे वह खुशी दी है जो बरसों से खो गई थी। मैंने उनके होंठों पर एक लंबा चुंबन दिया और कहा कि पापा, अब सो जाइए, सुबह मैं आपके लिए चाय बनाऊंगी।
अगली शाम मम्मी के आने से पहले पापा रसोई में चाय बना रहे थे और मैं पीछे से आकर उनसे लिपट गई। मैंने कहा कि पापा, कल रात के बाद मैं आपके बिना एक पल भी नहीं रह पा रही हूँ। पापा ने चाय का बर्तन नीचे रखा और मुझे अपनी ओर घुमा लिया। उन्होंने कहा कि निशा, तुमने मुझे फिर से जवान कर दिया है, और मैं तुम्हें हर शाम ऐसे ही चाहता हूँ।
मैंने पापा की कमीज के अंदर हाथ डाला और उनकी छाती को सहलाने लगी। पापा ने मेरे कुर्ते के ऊपर से मेरे स्तनों को दबाया और मेरे होंठों को चूम लिया। मैंने कहा कि पापा, रसोई में ही कर लीजिए, कोई नहीं देखेगा। पापा हंसे और कहा कि तुम्हारी हिम्मत दिन पर दिन बढ़ रही है।
पापा ने मुझे रसोई की स्लैब से टिका दिया और मेरा कुर्ता ऊपर उठा दिया। उन्होंने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और मेरी चूत पर हाथ फेरा। मेरी चूत पहले से गीली थी और पापा की उंगलियों पर उसका पानी लग गया। मैंने सिसकी ली और कहा कि पापा, जल्दी कीजिए, मुझे आपका लंड चाहिए।
पापा ने अपना पजामा नीचे किया और उनका खड़ा लंड मेरी जांघों से टकराया। उन्होंने मेरी एक टांग ऊपर उठाई और अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा। एक ही धक्के में उनका लंड मेरी चूत में घुस गया और मैं जोर से आह भर उठी। पापा ने कहा कि बेटा, तुम्हारी चूत आज भी उतनी ही टाइट है।
पापा स्लैब के सहारे मुझे चोदने लगे और मैं उनकी गर्दन पकड़कर हर धक्के पर उछल रही थी। उन्होंने मेरे स्तनों को कुर्ते के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया और मेरे कान में कहा कि निशा, तुम बहुत गर्म हो। मैंने कहा कि पापा, और तेज कीजिए, मुझे आपकी चुदाई का नशा हो गया है।
कुछ देर बाद पापा ने मुझे घुमाया और स्लैब पर झुका दिया। उन्होंने पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाला और तेज धक्के लगाने लगे। मैं स्लैब को पकड़े हुए थी और मेरी चूत से पानी टपक रहा था। पापा ने मेरी कमर पकड़ी और कहा कि आज मैं तुम्हें रसोई में ही झड़ाकर रहूंगा।
मैंने अपने स्तनों को खुद दबाया और पापा का नाम बार बार लिया। पापा के धक्के और तेज हो गए और मेरी चूत झड़ने लगी। मेरा पानी उनकी जांघों पर बह गया और मैं कांप उठी। उसी पल पापा ने भी अपना वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया और हम दोनों हांफते हुए एक दूसरे से लिपट गए।
पापा ने मुझे चूमा और कहा कि निशा, चाय ठंडी हो गई है, पर यह गर्मी अभी बाकी है। मैंने हंसकर कहा कि पापा, चाय बाद में, पहले मुझे अपनी बाहों में थोड़ी देर और रखिए। पापा ने मुझे कसकर गले लगाया और कहा कि बेटा, तुम अब मेरी हर रात की आदत बन गई हो।
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