सच्ची हिंदी सेक्स कहानी: इंदौर वाले फ्लैट की खोज
नेहा ने वार्डरोब के पीछे हाथ डाला तो उसकी उंगलियां किसी ठंडी, धूल भरी चीज से टकराईं। वह नया फ्लैट था, इंदौर के विजय नगर इलाके में, और पिछला किरायेदार अपना सामान ले जाने के बाद भी कुछ छोड़ गया था। नेहा ने खींचकर देखा तो वह एक पुराना लकड़ी का डिब्बा था, जिसके अंदर कुछ काली सफेद तस्वीरें और एक मुड़ा हुआ खत पड़ा था। खत पर लिखा था, "जो इसे पाए, वह इसे संभालकर रखे।" नेहा की धड़कन तेज हो गई। उसने तस्वीरें उठाईं। एक तस्वीर में एक लड़का छत पर खड़ा मुस्कुरा रहा था, और उसकी आंखों में कुछ ऐसा था जिसने नेहा को वहीं रोक दिया।
नेहा अट्ठाईस साल की ग्राफिक डिजाइनर थी। वह तीन हफ्ते पहले ही दिल्ली से इंदौर आई थी, एक स्टार्टअप में नौकरी के लिए। नया शहर, नया फ्लैट, नई जिंदगी। उसने सोचा था कि यहां सब कुछ शांत और सादा होगा। लेकिन उस डिब्बे ने पहले ही दिन उसकी जिंदगी में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। खत में लिखा था कि ये तस्वीरें किसी की यादों का सबसे कीमती हिस्सा हैं, और अगर कोई इन्हें पा ले तो वह इस नंबर पर खबर कर दे। नीचे एक फोन नंबर लिखा था, स्याही थोड़ी फैली हुई थी, पर नंबर पढ़ा जा सकता था।
नेहा ने दो दिन तक वह नंबर मिलाने की हिम्मत नहीं की। तीसरे दिन शाम को, जब वह बालकनी में चाय पी रही थी और बारिश की हल्की बूंदें रेलिंग पर गिर रही थीं, उसने नंबर डायल कर दिया। दूसरी तरफ एक गहरी आवाज आई, "हैलो।" नेहा ने बताया कि वह नए फ्लैट में रहने आई है और उसे एक डिब्बा मिला है। कुछ देर खामोशी रही, फिर वह आवाज बोली, "वह डिब्बा मेरा है। मैं कल शाम आकर ले जाऊंगा। मेरा नाम अर्जुन है।" नेहा ने फोन रख दिया, पर उसका दिल अब भी तेज धड़क रहा था। उस आवाज में कुछ था, एक थकान भी और एक गर्मजोशी भी।
अगली शाम अर्जुन आया। वह इकतीस साल का था, लंबा, गेहुंआ रंग, और उसकी आंखें बिल्कुल वैसी ही थीं जैसी तस्वीर में थीं। उसने दरवाजे पर खड़े होकर कहा, "मैं अर्जुन हूं।" नेहा ने उसे अंदर बुलाया। अर्जुन ने डिब्बा देखा तो उसकी आंखें नम हो गईं। उसने बताया कि ये तस्वीरें उसके बड़े भाई की हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं है, और यह डिब्बा ही उसकी आखिरी निशानी है। नेहा को लगा जैसे वह किसी बहुत निजी दर्द के सामने खड़ी है। उसने धीरे से कहा, "बैठिए, चाय पीजिए।" अर्जुन बैठ गया।
चाय के दौरान बातें खुलती गईं। अर्जुन एक फोटोग्राफर था, जो पुरानी इमारतों और छतों की तस्वीरें खींचता था। नेहा ने बताया कि वह डिजाइनर है, और उसे भी पुरानी चीजों से प्यार है। बातों बातों में शाम ढल गई। अर्जुन ने कहा, "तुम्हारी आंखें तस्वीरों को देखने का अपना तरीका रखती हैं।" नेहा हंस पड़ी, "और आपकी आवाज कहानियां सुनाने का।" दोनों के बीच कुछ ऐसा बन रहा था जिसे कोई नाम नहीं दिया जा सकता था, पर दोनों उसे महसूस कर रहे थे। जाते समय अर्जुन ने कहा, "क्या मैं कभी फिर आ सकता हूं, अपनी तस्वीरें दिखाने?" नेहा ने बिना सोचे कहा, "हां।"
अर्जुन अगले हफ्ते फिर आया, इस बार अपने कैमरे और तस्वीरों के एल्बम के साथ। उसने छत पर खड़े होकर नेहा की कुछ तस्वीरें खींचीं, शाम की रोशनी में। नेहा शरमा गई, पर उसने मना नहीं किया। अर्जुन ने कहा, "तुम कैमरे से डरती क्यों हो? तुम तो उसमें और भी खूबसूरत लगती हो।" नेहा ने उसके कंधे पर हल्का सा हाथ मारा। अर्जुन ने वह हाथ पकड़ लिया और कुछ देर तक नहीं छोड़ा। नेहा की सांस तेज हो गई। उसने हाथ छुड़ाया नहीं। दोनों एक दूसरे को देखते रहे, और उस देखने में एक साफ इशारा था।
उस रात नेहा सो नहीं पाई। उसने अर्जुन के बारे में सोचा, उसकी उंगलियों की गर्मी के बारे में, उसकी नजर के बारे में। अगले दिन उसने अर्जुन को मैसेज किया, "आज शाम छत पर चाय?" अर्जुन ने जवाब दिया, "जरूर।" शाम को छत पर दोनों बैठे। हवा में मिट्टी की खुशबू थी। अर्जुन ने नेहा के बालों से एक सूखा पत्ता निकाला, और उसके गाल को छू लिया। नेहा ने उसकी ओर देखा और कहा, "अर्जुन, तुम जानते हो ना कि यह सब कहां जा रहा है?" अर्जुन ने कहा, "जानता हूं। और मैं रुकना नहीं चाहता।" नेहा ने उसके हाथ को अपने हाथ में ले लिया।
छत से नीचे आकर दोनों कमरे में बैठे। अर्जुन ने नेहा को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह चुम्बन धीमा था, पर उसमें एक भूख थी। नेहा ने उसके गले में अपनी बांहें डाल दीं और उसे और करीब खींच लिया। अर्जुन के हाथ नेहा की कमर पर घूम रहे थे, धीरे धीरे ऊपर की ओर। नेहा की कुर्ती के नीचे उसकी त्वचा गर्म हो रही थी। अर्जुन ने उसके कान के पास फुसफुसाकर कहा, "तुम बहुत खूबसूरत हो।" नेहा ने जवाब में उसके होंठों को काट सा लिया, हल्के से।
अर्जुन ने नेहा की कुर्ती के बटन एक एक करके खोले। नेहा की सांसें तेज हो रही थीं। जब कुर्ती नीचे गिरी तो अर्जुन ने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को सहलाया, धीरे से, फिर जोर से दबाया। नेहा ने आह भरी और अपना सिर पीछे झुका दिया। अर्जुन ने ब्रा का हुक खोल दिया और उसके नंगे मम्मों को अपने हाथों में ले लिया। उसने एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा, कभी हल्के से काटते हुए। नेहा की उंगलियां उसके बालों में उलझ गईं। वह बोली, "अर्जुन, और जोर से।" अर्जुन ने दूसरा मम्मा भी अपने मुंह में ले लिया।
नेहा ने अर्जुन की शर्ट के बटन खोले और उसकी छाती पर अपने हाथ फिराए। उसकी छाती चौड़ी और गर्म थी। नेहा ने उसके निप्पल पर अपनी जीभ फिराई तो अर्जुन ने सिसकारी भरी। उसने नेहा को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। नेहा की पैंटी गीली हो चुकी थी। अर्जुन ने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया, एक उंगली से धीरे धीरे रगड़ते हुए। नेहा की कमर उठने लगी। वह बोली, "अर्जुन, प्लीज, अब मत तड़पाओ।" अर्जुन ने मुस्कुराकर पैंटी उतार दी।
अर्जुन ने नेहा की टांगें फैलाईं और उसकी चूत को देखा, जो गीली और चमक रही थी। उसने अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी और धीरे धीरे चाटने लगा। नेहा ने चादर को मुट्ठियों में भींच लिया। अर्जुन की जीभ अंदर तक जा रही थी, कभी ऊपर के दाने को चूसते हुए, कभी गहराई में उतरते हुए। नेहा की आहें कमरे में गूंज रही थीं। वह बोली, "अर्जुन, मैं आ रही हूं।" अर्जुन ने और तेज चाटा, और नेहा का बदन कांप उठा। उसका पानी निकल गया, और वह हांफती हुई बिस्तर पर पसर गई।
अर्जुन ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड तना हुआ, मोटा और लंबा था। नेहा ने उसे अपने हाथ में लिया और सहलाया। वह गर्म और सख्त था। नेहा ने उसे अपने मुंह में लिया और चूसने लगी, ऊपर नीचे, कभी सिरे को जीभ से छूते हुए। अर्जुन ने उसके सिर पर हाथ रखा और धीरे धीरे धक्के देने लगा। नेहा की आंखों में पानी आ गया, पर उसने रुकना नहीं चाहा। कुछ देर बाद अर्जुन ने उसे रोका, "अब अंदर डालना है।" नेहा ने टांगें फैला दीं।
अर्जुन ने अपना लंड नेहा की चूत के मुंह पर रखा और धीरे से अंदर धकेला। नेहा ने आह भरी, दर्द और मजे का मिला जुला एहसास। अर्जुन रुका, फिर और अंदर गया, जब तक कि पूरा लंड अंदर नहीं समा गया। फिर उसने धीरे धीरे धक्के देने शुरू किए। हर धक्के के साथ नेहा की आहें बढ़ती गईं। अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ ली और धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। बिस्तर हिलने लगा। नेहा ने अपनी टांगें उसकी कमर पर लपेट लीं और कहा, "और तेज, अर्जुन, और तेज।"
अर्जुन ने नेहा को पलटकर घोड़ी बनाया। उसने पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाला और जोर जोर से धक्के देने लगा। उसके हाथ नेहा के मम्मों को पकड़े हुए थे, उन्हें मसलते हुए। नेहा का सिर तकिए में धंसा था, और उसकी आवाजें अब चीखों में बदल रही थीं। अर्जुन ने उसके बाल पकड़े और उसे पीछे खींचा, और धक्के और गहरे हो गए। नेहा बोली, "मैं फिर आ रही हूं, अर्जुन।" अर्जुन ने कहा, "साथ में।" दोनों एक साथ झड़ गए, नेहा का बदन कांपता हुआ, अर्जुन का पानी उसकी चूत में भरता हुआ।
दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। अर्जुन ने नेहा को अपनी बांहों में ले लिया। नेहा ने उसकी छाती पर सिर रखा और कहा, "यह डिब्बा मुझे तुमसे मिलाने के लिए ही मिला था, है ना?" अर्जुन हंस पड़ा, "शायद मेरे भाई ने ऊपर से यही चाहा हो।" नेहा ने कहा, "तो फिर यह डिब्बा अब मेरा भी है।" अर्जुन ने उसके माथे पर चूमा। बाहर बारिश फिर शुरू हो गई थी, और कमरे में दोनों की सांसों की आवाज के अलावा कुछ नहीं था।
अगले हफ्तों में अर्जुन अक्सर आने लगा। कभी वह अपनी नई तस्वीरें लाता, कभी नेहा उसके लिए खाना बनाती। एक शाम अर्जुन ने कहा, "मैं इस शहर में एक प्रदर्शनी करना चाहता हूं, पुरानी छतों की तस्वीरों की। और उसमें तुम्हारी भी एक तस्वीर होगी, छत वाली।" नेहा ने कहा, "तो फिर मेरी तस्वीर के नीचे मेरा नाम भी लिखना।" अर्जुन ने कहा, "नाम के साथ एक खत भी होगा, जो मैंने तुम्हारे लिए लिखा है।" नेहा ने उसे देखा और मुस्कुरा दी।
प्रदर्शनी की रात नेहा ने देखा कि उसकी तस्वीर के नीचे लिखा था, "नेहा, वह लड़की जिसने एक डिब्बे को खोलकर मेरी जिंदगी खोल दी।" नेहा की आंखें भर आईं। अर्जुन ने सबके सामने उसका हाथ थामा। नेहा ने धीरे से कहा, "अर्जुन, यह सच्ची कहानी है, है ना?" अर्जुन ने कहा, "हां, और इसका हर पन्ना अभी लिखा जा रहा है।" नेहा ने उसके हाथ को और कसकर पकड़ लिया।
अगली सुबह नेहा की आंख खुली तो अर्जुन उसके बगल में सो रहा था, उसकी बांह नेहा की कमर पर थी। नेहा ने धीरे से उसकी बांह हटाए बिना करवट ली और उसे देखने लगी। सुबह की रोशनी खिड़की से आ रही थी। अर्जुन की आंखें खुलीं और उसने मुस्कुराकर कहा, "सुप्रभात।" नेहा ने कहा, "चाय बनाऊं?" अर्जुन ने उसे खींचकर अपने करीब ले लिया और कहा, "पहले यह।" उसने नेहा के होंठों को चूम लिया, लंबा और गहरा चुम्बन।
नेहा ने उसकी छाती पर हाथ रखा और कहा, "तुम्हें जाना नहीं है क्या?" अर्जुन ने कहा, "आज कोई काम नहीं। आज का दिन तुम्हारा है।" नेहा हंस पड़ी और उसके ऊपर आ गई। उसने अर्जुन के लंड को अपने हाथ में लिया, जो सुबह से ही तना हुआ था, और उसे अपनी चूत के मुंह पर रखा। धीरे से नीचे बैठते हुए उसने उसे पूरा अंदर ले लिया। दोनों ने एक साथ आह भरी। नेहा ने धीरे धीरे ऊपर नीचे होना शुरू किया, उसके मम्मे अर्जुन के चेहरे के सामने झूल रहे थे।
अर्जुन ने उसके मम्मों को अपने हाथों में लिया और निप्पलों को चूसने लगा। नेहा की रफ्तार बढ़ गई। वह जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी, उसकी आहें कमरे में गूंज रही थीं। अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के देने लगा। नेहा ने अपना सिर पीछे झुका दिया और कहा, "अर्जुन, मैं आ रही हूं।" अर्जुन ने कहा, "रुकना मत।" नेहा का बदन कांप उठा और वह अर्जुन के ऊपर ही झड़ गई, उसका पानी उसकी जांघों पर बह रहा था।
अर्जुन ने उसे पलटा और उसके ऊपर आ गया। उसने अपना लंड फिर से उसकी चूत में डाला और तेज धक्के देने लगा। नेहा की टांगें उसकी कमर पर लिपटी थीं। कुछ ही धक्कों में अर्जुन भी झड़ गया, उसका पानी उसकी चूत में भर गया। दोनों हांफते हुए एक दूसरे से लिपट गए। नेहा ने कहा, "अब चाय?" अर्जुन ने हंसकर कहा, "अब तो दो कप बनती है।"
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